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27 सितम्बर, 2020|3:03|IST

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श्राद्ध: कोरोना काल मे बदल रहा दान का स्वरूप

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सनातन धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व होता है। पितरों की याद में लोग खूब दान करते हैं लेकिन इस बार कोरोना में दान का स्वरूप भी बदल रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग के चलते कुछ लोग विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ऑनलाइन तर्पण करा रहे हैं, वहीं कुछ लोग पितरों की याद में मास्क, दस्ताने, ऑक्सीमीटर, सेनेटाइजर के साथ औषधीय पौधे आदि भी भेंट कर सकते हैं।

ज्योतिषिचार्यों और पंडितों का कहना हैं कि ब्राह्मणों को आर्थिक स्थिति तथा आवश्यकतानुसार दान किया जा सकता है। कोरोना का संक्रमण काल है तो स्वास्थ्य या चिकित्सा संबंधी दान का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसे में लोग पितरों की याद में मास्क, दस्ताने, ऑक्सीमीटर, पीपीई किट, थर्मल स्केनर, सैनिटाइजर, औषधीय पौधे भी भेंट कर सकते हैं या आवश्यकता अनुसार निर्धन को खाद्य सामग्री भेंट कर सकते हैं।

इस बार कोरोना के चलते पके भोजन की बजाय कच्चा राशन दिया जा सकता हैं। हालांकि कोरोना के चलते कई पुरोहित व पंडित घर पर ब्रह्मभोज से भी दूरी बना रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन तर्पण कराया जा सकता हैं। भुगतान भी ऑनलाइन होगा।

वृद्धाश्रम में भी खिला सकते हैं भोजन

ज्योतिषाचार्य पं. अमित भारद्वाज बताते हैं कि कई श्रद्धालुओं ने उनसे संपर्क किया है। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए श्राद्धकर्म संपन्न कराएंगे। दूसरा, आचार्य कहते हैं कि अगर पुरोहित या पंडित बिल्कुल नहीं आ पा रहे हैं तो एक थाल में ब्रह्म भोज निकालकर कौवे, कुत्ते और गाय का ग्रास निकाल दें।

वृद्धाश्रम, कुष्ठाश्रम, अनाथालय एवं जरूरतमंदों को भोजन व जरूरी सामान देकर पितरों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करें।

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  • Web Title:Shraddha The nature of charity changing in the Corona era