Saharanpur News: सत्संग पैकेज:: आस्था का सैलाब, सेवा का अनुशासन और मन की शांति का संदेश
Saharanpur News: सहारनपुर में राधा स्वामी सत्संग ब्यास के सत्संग केंद्र में दो दिवसीय समागम का आयोजन हुआ। इसमें भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हुजूर जसदीप सिंह गिल महाराज ने आस्था, सेवा और मन के विकारों से मुक्त होने का संदेश दिया। समागम में मंत्री, सांसद, और जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

Saharanpur News: सहारनपुर/सरसावा। सहारनपुर के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास के सत्संग केंद्र में मंगलवार को आस्था, सेवा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। दो दिवसीय विशाल सत्संग समागम के पहले दिन उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में संगत पहुंची। एक ओर हुजूर जसदीप सिंह गिल महाराज ने नाम सिमरन, सेवा और विकारों से मन को मुक्त करने का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर करीब सात हजार सेवादारों ने भारी भीड़ के बीच यातायात, पार्किंग, प्रवेश-निकासी और लंगर की व्यवस्था संभाली। सत्संग में मोबाइल की मेमोरी का उदाहरण देते हुए हुजूर ने कहा कि जिस तरह मेमोरी फुल होने पर नई फाइल के लिए जगह नहीं बचती, उसी तरह मोह-माया, काम, क्रोध और लोभ से भरे मन में परमात्मा का ध्यान नहीं टिकता। उन्होंने नाम सिमरन और नाम की कमाई को 84 लाख योनियों के बंधन और संसार के आवागमन से मुक्ति का मार्ग बताया। सवाल-जवाब सत्र में क्रोध, नशा, डर, परिवार और बच्चों से जुड़े सवालों पर उन्होंने सहज अंदाज में जवाब दिए। वहीं विशाल लंगर पंडालों में दिन-रात सेवा चलती रही और हजारों श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ लंगर प्रसाद ग्रहण किया। समागम में मंत्री, सांसद, विधायक और सैन्य अधिकारियों समेत कई जनप्रतिनिधि व अधिकारी भी पहुंचे और हुजूर के दर्शन किए。
समागम स्थल पर व्यवस्थित सेवा
समागम स्थल पर भीड़ के बावजूद प्रवेश और निकासी को व्यवस्थित रखने पर विशेष जोर रहा। अलग-अलग स्थानों पर सेवादार लगातार श्रद्धालुओं को दिशा-निर्देश देते रहे। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर पंडाल लगाए गए थे। यहां दिन-रात भोजन तैयार कर संगत को परोसा गया। सत्संग समाप्त होने के बाद भी लंगर में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। संगत ने अनुशासन के साथ बैठकर लंगर प्रसाद ग्रहण किया। समागम में धार्मिक आयोजन के साथ व्यवस्थाओं का बड़ा हिस्सा भी सेवादारों ने संभाला। यातायात से लेकर पार्किंग और लंगर तक अलग-अलग जिम्मेदारियों में सेवादारों की टीमें सक्रिय रहीं।
उपस्थिति में मंत्री और अधिकारी
-----------------
0-मंत्री, सांसद और सैन्य अफसर भी पहुंचे
-सत्संग समागम में उत्तराखंड के परिवहन कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, सहारनपुर सांसद इमरान मसूद, एमएलसी शाहनवाज खान, रामपुर मनिहारान विधायक देवेंद्र निम और वायुसेना स्टेशन सरसावा के एयर कमोडोर संदीप सिंह सहित कई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। सभी ने हुजूर जसदीप सिंह गिल महाराज के दर्शन किए।
------
हुजूर का मुख्य संदेश
यह दिये मुख्य संदेश
-नाम सिमरन से मन को विकारों से खाली करो
-नाम सिमरन को मुक्ति का मार्ग बताया।
-सेवा को अहंकार कम करने का माध्यम बताया।
-क्रोध पर नियंत्रण के लिए अपेक्षाएं कम करने की सीख दी।
-दुनियावी नशे के बजाय नाम के नशे का संदेश दिया।
-डर और वहम छोड़कर परमात्मा पर विश्वास रखने को कहा।
-बच्चों के लिए प्यार और अनुशासन का संतुलन रखने की सीख दी।
--------
खबर-2
मोबाइल की मिसाल के जरिए मन की स्थिति को समझाया
सरसावा, संवाददाता।
हुजूर जसदीप सिंह गिल महाराज ने मंगलवार के सत्संग में आधुनिक जीवन से जुड़ी मोबाइल की मिसाल के जरिए मन की स्थिति को समझाया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन की मेमोरी जब फोटो, वीडियो और दूसरी फाइलों से पूरी तरह भर जाती है तो उसमें नई फाइल के लिए जगह नहीं बचती। इसी तरह मन यदि मोह-माया, काम, क्रोध, लोभ और सांसारिक इच्छाओं से भरा रहेगा तो उसमें परमात्मा के ध्यान के लिए जगह बनाना मुश्किल होगा।
उन्होंने संगत को संदेश दिया कि मन को खाली करने का अर्थ जिम्मेदारियों से भागना नहीं, बल्कि उनके बीच रहते हुए विकारों पर नियंत्रण पाना है। नाम सिमरन इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सेवा को भी इसी संदर्भ में समझाया। सेवा करने का उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए कि कितने घंटे सेवा की या कितने लोगों ने उसे देखा। सेवा का वास्तविक उद्देश्य मन से अहंकार और ‘मैं’ की भावना को कम करना है। जब व्यक्ति बिना दिखावे और स्वार्थ के सेवा करता है तो उसमें विनम्रता आती है। हुजूर ने कहा कि मनुष्य की सबसे बड़ी चुनौती बाहर की परिस्थितियां नहीं, बल्कि भीतर चलने वाले विचार हैं। इसलिए मन को नियंत्रित करने और उसे सही दिशा देने की जरूरत है। सत्संग में मौजूद संगत ने आधुनिक उदाहरण के माध्यम से दिए गए इस संदेश को ध्यान से सुना। नाम सिमरन और सेवा को उन्होंने मन की सफाई तथा आत्मिक शांति से जोड़ते हुए संगत को नियमित अभ्यास का संदेश दिया।
-----------------
सवाल-जवाब सत्र में विचार और समाधान
खबर-2 : सवाल-जवाब में गुस्से से लेकर काले जादू तक के सवाल
-‘दूसरे की जगह खुद को रखकर देखो, गुस्सा अपने आप कम होगा’
सरसावा, संवाददाता।
सत्संग के सवाल-जवाब सत्र में संगत ने दुनियावी जीवन से जुड़े कई सवाल हुजूर जसदीप सिंह गिल महाराज के सामने रखे। क्रोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब हमारी इच्छाएं और अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं तो गुस्सा पैदा होता है। इसलिए दूसरों से अपेक्षाएं कम रखनी चाहिए। साथ ही किसी के व्यवहार पर प्रतिक्रिया देने से पहले यह सोचना चाहिए कि यदि यही व्यवहार हमारे साथ किया जाता तो हमें कैसा लगता।
उन्होंने गुस्से को तन, मन और धन तीनों के लिए नुकसानदायक बताया। उनके अनुसार व्यक्ति क्रोध में ऐसा निर्णय कर सकता है जिसका नुकसान बाद में उसे खुद उठाना पड़ता है। नशे से जुड़े सवाल पर उन्होंने दुनियावी नशों और नाम के नशे के बीच अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि दुनियावी नशे का असर अस्थायी होता है, जबकि नाम का नशा मन को शांति और आनंद की ओर ले जाता है। डर और काले जादू से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि डर और वहम मन के भ्रम हैं। परमात्मा पर विश्वास रखने वाले व्यक्ति को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। सतगुरु जीव को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। सवाल-जवाब के दौरान माहौल में हल्के-फुल्के क्षण भी आए। एक बहन ने पति द्वारा तारीफ नहीं किए जाने की बात कही तो हुजूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आज घर जाकर पति जरूर तारीफ करेंगे, क्योंकि उन्होंने यहां सब सुन लिया है। बच्चों की शरारतों से जुड़े सवाल पर उन्होंने प्यार और अनुशासन के बीच संतुलन रखने का संदेश दिया। सहारनपुर में हर वर्ष सत्संग की संगत की मांग पर उन्होंने मुस्कुराते हुए हर साल आने का वचन दिया।
-------------


