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नए साल में फिर से कलकल करती बहेगी सिंधली नदी

नए साल में फिर से कलकल करती बहेगी सिंधली नदी

संक्षेप:

Saharanpur News - नए साल के आगमन पर सिंधली नदी के पुनर्जीवन से जिलेवासियों को खुशखबरी मिली है। जिला प्रशासन और एनजीटी के प्रयासों से नदी की खुदाई का कार्य तेजी से चल रहा है। इससे किसानों और स्थानीय लोगों को लाभ होगा, सिंचाई आसान होगी, और क्षेत्र का पर्यावरण सुधरेगा।

Dec 20, 2025 11:23 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सहारनपुर
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नए साल के आगमन पर नदियों के पुनर्जीवन यानी पर्यावरण के मोर्चे पर भी जिलेवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। वर्षों से उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार होकर विलुप्त हो चुकी करीब 25 किलोमीटर लंबी सिंधली नदी अब फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौटने की ओर अग्रसर है। जिला प्रशासन के ठोस प्रयासों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद, यमुना की सहायक सिंधली नदी के पुनरोद्धार का भगीरथी कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। डीएम मनीष बंसल की पहल पर इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारा गया है और एनजीटी आदेशों के क्रम में अब तक 21 किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में नदी की खुदाई पूरी की जा चुकी है।

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शेष काम भी नए साल के शुरुआती महीनों यानी इसी वित्तीय वर्ष में मार्च से पूर्व ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि इस पूरे काम में मनरेगा की मदद ली जा रही है, जिससे एक ओर नदी का कायाकल्प हो रहा है तो दूसरी ओर, ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है। बीडीओ गंगोह असलम परवेज ने बताया कि सिंधली नदी की खुदाई का कार्य अंतिम दौर में पहुंच गया है। पांच गांवों हुसैनपुर, बीनपुर, सकरपुर, साकरोर व बसी में चिन्हांकन न हो पाने से खुदाई कार्य प्रभावित हुआ है जिसके अतिशीघ्र होने की आशा है। नोडल अधिकारी असलम परवेज के अनुसार, विलुप्त सिंधली नदी सहारनपुर में नकुड़ की दो और गंगोह ब्लॉक की 16 ग्राम पंचायतों बिशनगढ, बसी, सिनौली, कल्लरहेडी, हुसैनपुर, बुडढाखेडा, लखनौती, सनौली, सुखेडी, आलमपुर, पखनपुर, सकरपुर शाकरोर, खालिदपुर, बीनपुर, इस्सोपुर कलालहटी आदि से होकर चौसाना शामली तक बहती है। पूरे क्षेत्र की खुशहाली का प्रतीक बनेगी सिंधली सिंधली नदी के पुनर्जीवित होने से पर्यावरण के साथ क्षेत्र के किसानों और स्थानीय लोगों को सीधा लाभ होगा। सिंचाई आसान होगी, भूजल स्तर सुधरेगा, फसल उत्पादन बढ़ेगा। प्रशासन के अनुसार, सिंधली नदी का पुनरोद्धार केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास है। जल्द ही सिंधली नदी को कलकल बहते हुए देख सकेंगे, जो पूरे क्षेत्र के लिए खुशहाली का प्रतीक बनेगी।