
बोले सहारनपुर : व्यवस्था से जूझ रहे पेंशनर्स, जीवित प्रमाण पत्र की जद्दोजहद
संक्षेप: Saharanpur News - सहारनपुर में 16 हजार सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारियों को पेंशन प्राप्त करने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जीवित प्रमाण पत्र जमा करने के लिए उन्हें लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, और 18 महीने का महंगाई राहत भत्ता भी लंबित है।
सहारनपुर के करीब 16 हजार सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारी अपने जीवन के उस पड़ाव में हैं, जहां वह वर्षों की सेवाओं के बाद सम्मानजनक वृद्धावस्था की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन पेंशनर आज भी कई प्रशासनिक जटिलताओं से जूझ रहे हैं। हर साल नवंबर माह में जीवित प्रमाण पत्र जमा कराने की प्रक्रिया के दौरान जो असुविधा देखने को मिलती है, वह उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। इन पेंशनर्स ने राज्य के विकास में अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया, लेकिन लेकिन बुढ़ापे में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वह व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। पेंशनरों की सबसे बड़ी समस्या इन दिनों जीवित प्रमाण पत्र जमा कराने को लेकर है।

कोषागार कार्यालय में सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। बुजुर्ग कर्मचारियों को घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होती, न ही पीने के पानी या शौचालय की सुविधा उपलब्ध रहती है। उम्र के इस पड़ाव में जहां चलना-फिरना भी मुश्किल होता है, वहां घंटों धूप में खड़े रहना उनके लिए कष्टदायक बन जाता है। कर्मचारियों की संख्या और उनकी उम्र को देखते हुए भी पर्याप्त काउंटर नहीं खोले गए हैं। परिणामस्वरूप, बुजुर्गों को एक साधारण प्रमाण पत्र के लिए पूरा दिन खड़ा रहना पड़ता है। कई मामलों में बुजुर्ग महिलाएं और बीमार पेंशनर तक बिना किसी सहायता के घंटों प्रतीक्षा करते रहते हैं। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक ने जीवित प्रमाण पत्र प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी भीड़ प्रतिवर्ष ट्रेजरी कार्यालयों में देखने को मिलती है, जिससे वृद्ध पेंशनरों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस भीड़भाड़ को रोकने और बुजुर्गों को राहत देने के लिए राज्य सरकार को चाहिए कि वह पूर्व की भांति वही व्यवस्था पुनः लागू करे, जिसके तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने संबंधित बैंक शाखा प्रबंधक के समक्ष ही उपस्थित होकर अपना जीवित प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकते थे। पहले यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू थी। उस समय जीवन प्रमाण पत्र के निर्धारित प्रपत्र में प्रथम कॉलम में ही यह उल्लेख रहता था कि बैंक प्रबंधक के हस्ताक्षर और सत्यापन के बाद यह फॉर्म सीधे ट्रेजरी कार्यालय को भेजा जाएगा। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ता था और ट्रेजरी कार्यालयों में भीड़ भी नहीं होती थी। सुझाव है कि इस व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए, ताकि वृद्ध पेंशनरों को अपने जीवन प्रमाण पत्र के लिए ट्रेजरी कार्यालयों में धक्के न खाने पड़ें और वे सम्मानपूर्वक अपनी पेंशन संबंधी प्रक्रिया पूरी कर सकें। महंगाई राहत भत्ता (डीए) का बकाया भुगतान न होना चिंता का विषय सेवानिवृत्त कर्मचारियों की प्रमुख समस्याओं में से एक है कोरोना काल के दौरान रोकी गई महंगाई राहत भत्ता (डीए) की 18 माह की बकाया राशि। राज्य सरकार ने महामारी की आपात स्थिति का हवाला देकर उस समय यह भत्ता स्थगित कर दिया था, लेकिन अब तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इसका भुगतान नहीं किया गया है। पेंशनरों के लिए यह राशि अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज जब रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं, तब महंगाई राहत भत्ते का भुगतान न मिलना उनके लिए भारी आर्थिक बोझ साबित हो रहा है। कई बुजुर्ग कर्मचारी चिकित्सा, किराया और घरेलू खर्च पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं। पेंशनरों का कहना है कि संवेदनशील रवैया अपनाते हुए तत्काल इस लंबित डीए का भुगतान करना चाहिए। यह किसी उपकार का विषय नहीं, बल्कि उनका वैध अधिकार है। यदि यह बकाया राशि जल्द जारी कर दे, तो लाखों बुजुर्ग कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की बड़ी राहत मिल सकती है। कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना’ शुरू की गई थी, ताकि उन्हें निजी अस्पतालों में बिना किसी आर्थिक परेशानी के इलाज की सुविधा मिल सके। इस योजना का उद्देश्य बुजुर्ग कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना था, लेकिन व्यवहार में यह योजना अब भी कागजों तक सीमित है। कई पेंशनरों का कहना है कि निजी अस्पताल इस योजना के तहत उपचार करने से बचते हैं। उनका तर्क होता है कि सरकार की ओर से भुगतान समय पर नहीं किया जाता, जिसके कारण वे कैशलेस इलाज की सुविधा देने से इंकार कर देते हैं। मजबूर होकर पेंशनरों को अपनी जेब से हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कई बार वे बिलों की प्रतिपूर्ति के लिए महीनों तक चक्कर लगाते हैं, फिर भी फाइलें लंबित रह जाती हैं। मांग है कि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करे और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी व समयबद्ध बनाए, ताकि बुजुर्ग कर्मचारियों को वास्तव में कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सके। राशिकरण अवधि में राहत की मांग सेवानिवृत्त कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में से एक है पेंशन के राशिकरण (कम्यूटेशन) की अवधि को कम किया जाना। वर्तमान में यह अवधि 15 वर्ष निर्धारित है, अर्थात पेंशनर को कम्यूट की गई राशि वापस मिलने में पूरे 15 वर्ष लगते हैं। इतने लंबे समय के इंतजार में अनेक बुजुर्ग पेंशनर जीवन से विदा हो जाते हैं और उनकी राशि राज्य के खजाने में रह जाती है। पेंशनरों का कहना है कि यह व्यवस्था उनके साथ अन्याय के समान है, क्योंकि सेवा समाप्ति के बाद वृद्धावस्था में उनकी आय का एकमात्र स्रोत यही पेंशन होती है। 15 वर्ष की लंबी अवधि तक राशि न मिल पाने के कारण वे आर्थिक तंगी का सामना करते हैं। कई पेंशनर बीमारियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते समय पर अपने अधिकारों का उपयोग ही नहीं कर पाते। उनकी मांग है कि राशिकरण अवधि को घटाकर करीब 11 वर्ष किया जाए, जिससे वे अपने जीवनकाल में उस राशि का उपयोग कर सकें। यह न केवल मानवीय दृष्टिकोण से उचित होगा, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा की भावना को भी मजबूत करेगा। सरकार को इस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। समस्याएं -जीवित प्रमाण पत्र के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। -घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। -बैठने, पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था नहीं है। -कोरोना काल में रोके गए 18 माह के महंगाई राहत भत्ते का भुगतान नहीं हुआ। -निजी अस्पतालों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा। -पेंशन राशिकरण की अवधि 15 वर्ष है, जो बहुत लंबी है। सुझाव -जीवित प्रमाण पत्र के लिए एक से अधिक काउंटर लगाए जाएं। -बैठने, पानी और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। -कोरोना काल का लंबित महंगाई राहत भत्ता जल्द भुगतान किया जाए। -कैशलेस चिकित्सा योजना को प्रभावी बनाया जाए। -पेंशन राशिकरण की अवधि घटाकर 11 वर्ष की जाए। प्रतिक्रियाएं हर साल जीवित प्रमाण पत्र के लिए ट्रेजरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लंबी लाइनें, धूप और बिना पानी की सुविधा बुजुर्गों के लिए परेशानी बन गई है। सीताराम कोरोना काल में रोकी गई डीए की 18 माह की राशि अब तक नहीं मिली है। मंहगाई बहुत बढ़ चुकी है, और यह पैसा हमारे लिए बड़ी राहत बन सकता है। सरकार को इसे तुरंत जारी करना चाहिए। राजकुमार शर्मा पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ नहीं मिल रहा। निजी अस्पताल कैशलेस इलाज से मना कर देते हैं। बुजुर्गों के इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। हुकुम सिंह 70 वर्ष की उम्र में घंटों लाइन में लगना बहुत मुश्किल होता है। सरकार को मोबाइल वैन या बैंक सत्यापन जैसी पुरानी प्रणाली फिर से लागू करनी चाहिए। बुध सिंह पेंशन राशिकरण की अवधि 15 वर्ष बहुत लंबी है। कई साथियों का जीवन 15 वर्ष पूरा होने से पहले ही समाप्त हो जाता है। इसे घटाकर 11 वर्ष किया जाना चाहिए। बिशनलाल लंबी कतारों में घंटों का इंतजार आसान नहीं होता है। हमारे लिए बैठने या पानी की व्यवस्था तक नहीं होती। हर ट्रेजरी पर ‘वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र’ बनाना चाहिए। महावीर डीए का बकाया न मिलना बहुत अन्याय है। सरकार जब चाहे तब रोक देती है, लेकिन लौटाने में सालों लगा देती है। यह बुजुर्गों के साथ संवेदनहीन व्यवहार है। श्याम सिंह पहले बैंक मैनेजर के सामने जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की व्यवस्था थी, जिससे बुजुर्गों को सुविधा रहती थी। वही प्रणाली फिर शुरू करनी चाहिए ताकि ट्रेजरी में भीड़ न लगे। जय सिंह सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ सहयोग की भावना होनी चाहिए। उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। सुविधा के लिए अलग ‘सीनियर सिटीजन काउंटर’ बनाया जाना चाहिए। असलम खां कैशलेस योजना में अस्पताल इलाज से मना कर देते हैं। कई बार पैसे न होने पर हमें प्राइवेट अस्पताल से लौटना पड़ा। निजी अस्पतालों से सख्ती से अनुबंध लागू कराना चाहिए। शरीफ अहमद इस उम्र में महिलाओं के लिए कतारों में खड़े रहना आसान नहीं है। ऑनलाइन का विकल्प है। जीवित प्रमाण पत्र प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। विमला हमारे उम्र में ऑनलाइन प्रक्रिया समझना मुश्किल होता है। सरकार को हर ब्लॉक स्तर पर “डिजिटल हेल्प डेस्क” शुरू करनी चाहिए, जो पेंशनरों को ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनवाने में मदद करे। शकुंतला सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने संबंधित बैंक शाखा प्रबंधक के समक्ष ही उपस्थित होकर अपना जीवित प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकते थे। इस व्यवस्था को दोबारा शुरु किया जाए। शशि शर्मा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सुविधा के लिए हर साल नवंबर में “पेंशनर सुविधा सप्ताह” मनाया जाए, जिसमें सभी लंबित मामलों का निस्तारण किया जाए। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा। नरेश चड्डा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की प्रमुख समस्या कोरोना काल के दौरान रोकी गई महंगाई राहत भत्ता (डीए) की 18 माह की बकाया राशि का भुगतान का न होना है। जल्द से जल्द भुगतान मिले। केडी गौतम आठवें वेतन आयोग में यह सुनिश्चित किया जाए कि पूर्व पेंशनर्स और वर्तमान पेंशनर्स के बीच कोई भेदभाव न हो। सभी पेंशनर्स को समान वेतन पुनरीक्षण और महंगाई राहत का लाभ समान रूप से दिया जाए। राज सिंह जब महंगाई भत्ता (डीए) 50 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो उसे मूल पेंशन में समायोजित (मर्ज) कर दिया जाता है। इससे पेंशन की मूल राशि बढ़ती है और भविष्य के डीए की गणना उसी पर होती है। राजेश्वर प्रसाद -वर्जन सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारियों की सुविधा के लिए जीवित प्रमाण पत्र ऑनलाइन भी भरा जा सकता है। जिनके पास स्मार्ट फोन की सुविधा नहीं है, वो अपने परिजनों के मोबाईल से भी भर सकते हैं। सूरज कुमार, मुख्य कोषाधिकारी

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