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20 सितम्बर, 2020|2:56|IST

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मजदूर दिवस इस बार जैसा कभी न आए

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लॉकडाउन के कारण दिहाड़ी मजदूर, कामगार घर बैठ गए हैं। अपने घर से दूर फंसे इन कामगारों के लिए तीन-चार लोगों के परिवार को पालना काफी मुश्किल हो रहा है।मजदूर दिवस पर चारों और सड़कों पर फैला सन्नाटा सैनिकों के लिए परेशानी लेकर आया।

राधा स्वामी सत्संग ब्यास मेजर सेंटर सहारनपुर में शेल्टर होम में बिहार के 49, उत्तराखंड के 20, हरियाणा के पांच, रामपुर मनिहारान के 45, बे हट के 156, सदर सहारनपुर के 103, नकुड के 62, देवबंद के 48 मजदूर है। मजदूरों में शामिल अनूप राजवीर फरमान रहमान प्रताप सोमपाल राजेंद्र ने कहा कि जिला प्रशासन ने हमें 14 दिनों के लिए यहां रोक दिया है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। काम की तलाश में घर छोड़ा दो वक्त की रोटी तो नहीं मिली 14 दिन राधा स्वामी में रहने के लिए जरूर विवश होना पड़ गया है।

सरकार जो मदद दे रही है कुछ मदद से साल भर काम नहीं चलेगा केवल गेहूं चावल नमक ही कोटे से मिल रहा है इसके अलावा भी परिवार की और बहुत सारी जरूरतें हैं। यदि घर होते तो गेहूं की कटाई या कहीं मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर लेते। आज परिवार के सामने दो वक्त की रोटी रोटी का मसला खड़ा हो गया है। सभी मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि जैसा मजदूर दिवस इस बार आया है ऐसा मजदूर दिवस कभी भी मजदूरों के जीवन में ना आए।

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  • Web Title:Labor Day should never come this time