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1 जुलाई, 2020|5:34|IST

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कोरोना से डटकर किया जूनियर डॉक्टर्स ने मुकाबला

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कोरोना महामारी में जहां एक और सीनियर डॉक्टर ने रात दिन काम कर कोरोना से पीड़ित मरीजों को ठीक किया। वहीं उनके साथ जेआर यानी जूनियर डॉक्टर ने भी उनसे बहुत कुछ सीखा। जूनियर डॉक्टर ने कहा कि जो चीज किताबों में पढ़ाई जा रही थी। उसे अपनी आंखों से अपने हाथों से करके देख लिया। कोरोना काल में जहां हर कोई कोरोना से संक्रमित मरीजों से दूरी बनाने के लिए मजबूर हो गया। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टरों ने मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ी।

राजकीय मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉ विवेक मिश्रा ने कहा मेरे साथ ही साथ मेरी पत्नी शोभा वाजपेई ने इलाज के लिए आए कोरोना से पीड़ित मरीजों का इलाज किया। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से हर कोई भयभीत था। ऐसे में अचानक कॉलेज प्रशासन द्वारा कोरोना से पीड़ित मरीजों की देखभाल करने क लिए ड्यूटी लगाई गई। देश दुनिया में पहली बार इस तरह की बीमारी आई तो डर स्वाभाविक था, लेकिन हमने डर के आगे हार नहीं मानी।

गर्मी के मौसम में पीपी किट पहन कर काम किया। डॉ शोभा वाजपेई ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इस बीमारी को देखा सुना नहीं उसका इलाज करना पड़ेगा। जिस बीमारी से सभी डर कर अपनी जान बचाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग तक का पालन करेंगे। उस बीमारी से लड़ने का हमें मौका मिलेगा। कोरोना वायरस से सभी लोग डरे हुए थे। जब तक ड्यूटी कर रहे हैं तब तक एक दूसरे से नहीं मिलेंगे।

डॉ रिजवान हसन व डॉ रोबिन त्यागी ने कहा कि डॉक्टरी पैसा ही ऐसा पैसा है। जो बिना किसी भेदभाव के डॉक्टर के पास आने वाले प्रत्येक मरीज को ठीक करने की कोशिश करता है। डॉ अनुज ने कहा डॉक्टर का काम होता है कि उसके पास जो मरीज जाए उसे वह अच्छे से अच्छा इलाज देखकर ठीक करें। कोरोना काल मे जो सीखने को मिला शायद उसे सीखने में अभी लंबा इंतजार करना पड़ता।

डॉ गीता ने कहा कि धरती पर डॉक्टर को यूं ही भगवान नहीं कहा जाता डॉक्टर ऐसी बीमारियों से लड़ता है जिनका नाम सुनने मात्र से लोग घबरा जाते हैं। लाइफ में ऐसी बीमारी देखने को आई कि लोग उसके नाम मात्र से डर रहे थे शुरुआती दौर में मुझे भी डर लगा।

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  • Web Title:Junior doctors compete against Corona