
रेहड़ी के बाद रेल भी दौड़ाएगा सहारनपुर के तीतरो का युवक
Saharanpur News - सेठपाल कश्यप के बेटे विशाल कश्यप ने मेहनत से लोको पायलट बनने का सपना पूरा किया। पहले पिता की रेहड़ी पर मदद करने वाले विशाल ने पढ़ाई के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी की। अब वह रेलवे में ट्रेनिंग के लिए जा रहा है। गांव में उसकी सफलता ने अन्य युवाओं को प्रेरित किया है।
आदमी अपने मन में कुछ ठान ले तो क्या नहीं कर सकता गांव ढायकी निवासी सेठपाल कश्यप के बेटे विशाल कश्यप ने इसी को चरितार्थ किया है। विशाल कश्यप पहले पिता का हाथ उनके काम में बटाता था अब वह लोको पायलट बनने के बाद रेल भी दौड़एगा। सेठपाल कश्यप पहले गांव गांव जाकर रेहडी पर सामान बेचते थे। अब वह सहारनपुर में काम करते हैं। रेहडी पर वह चश्मा हेलमेट आदि पर सामान बेचते हैं। विशाल कश्यप पढ़ाई के साथ-साथ उनके काम में हाथ इसीलिए ताकि पिता पर काम बोझ ज्यादा ना हो लेकिन इसी के साथ-साथ वह सरकारी नौकरी की भी तैयारी कर रहा था।
विशाल कश्यप की मेहनत रंग लाई तो उसे रेलवे में लोको पायलट बनने का अवसर मिल गया। अब वह लोको पायलट की ट्रेनिंग के लिए जाएगा। विशाल कश्यप ने पॉलिटेक्निक जनपद मुजफ्फरनगर के एक संस्थान से की है। विशाल कश्यप अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजन तथा अध्यापकों को देते हैं। विशाल कश्यप ने हाई स्कूल में 88% से अधिक तथा इंटरमीडिएट में 81% अंक प्राप्त किए थे। विशाल कश्यप ने बताया कि उनके पिता पढ़े लिखे हैं लेकिन मां अनपढ़ है लेकिन इसके बावजूद भी वह उन्हें और ज्यादा से ज्यादा शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करती थी। विशाल कश्यप का लोको पायलट में चयन के बाद गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि विशाल कश्यप ने लोको पायलट बनकर अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनने का काम किया है।

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