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सरकारी अस्पताल में ठप हैं आग बुझाने के इंतजाम, निजी में भी खामियां

सहारनपुर। दिल्ली के अस्पताल में आग से हादसे के बाद सहारनपुर में अग्निशमन विभाग हरकत में आ गया है। जिला अस्पताल समेत एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों...

सरकारी अस्पताल में ठप हैं आग बुझाने के इंतजाम, निजी में भी खामियां
हिन्दुस्तान टीम,सहारनपुरMon, 27 May 2024 11:25 PM
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सहारनपुर। दिल्ली के अस्पताल में आग से हादसे के बाद सहारनपुर में अग्निशमन विभाग हरकत में आ गया है। जिला अस्पताल समेत एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों की चेकिंग की गई। सरकार अस्पताल में अग्निशमन यंत्र बंद मिले। वहीं निजी अस्पतालों में भी स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। कुछ अस्पतालों में इमरजेंसी गेट स्थाई रूप से बंद मिले। आग बुझाने के उपकरण चलाने का प्रशिक्षण भी कर्मचारियों को नहीं है। यहां तक की ज्यादातर अस्पतालों के मानक भी पूरे नहीं हैं।

दिल्ली के एक हॉस्पिटल में आग लगने से आधा दर्जन से अधिक बच्चों की मौत हो गई। जिसके बाद पूरे देश में एक बार फिर हॉस्पिटल में आग से सुरक्षा के इंतजाम को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सहारनपुर में भी अस्पतालों की स्थिति बदहाल है। सोमवार को अग्निशमन विभाग की टीम ने जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पाल में अग्नि सुरक्षा की जांच की। जिला अस्पताल में ज्यादातर उपकरण अक्रियशील अवस्था में मिले। इसके साथ ही जिला महिला अस्पतला में आधुनिक सिस्टम लगाया गया था। लेकिन, यहां पर भी अग्निशन उपकरण काम नहीं कर रहे हैं। अग्निशमन विभाग ने अस्पताल को सुरक्षा को देखते हुए अग्निशमन उपकरणों को दुरूस्त करने को कहा है।

इसके बाद अग्निशमन विभाग की टीम ने बाजोरिया रोड स्थित हॉस्पिटल में जांच की। हॉस्पिटल में इमरजेंसी गेट नहीं हैं। एक बड़े हॉस्पिटल में लोहे की सीढ़ी लगाकार गेट बनाया गया है। लेकिन, वह गेट पूरी तरह से बंद मिला। वहीं कुछ अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगे मिले। लेकिन, आग लगने की स्थिति में इमरजेंसी गेट नहीं हैं। यही नहीं कर्मचारियों को कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। जिस कारण आग लगने की स्थिति में हादसे से बचा जा सके।

एनओसी तक नहीं

जिले में हॉस्पिटलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई बड़े हॉस्पिटलों का निर्माण हुआ है। वहीं, कुछ चिकित्सकों ने भीड़ वाले स्थानों पर अपने अस्पताल खोल लिए हैं। कुछ एक दो हॉस्पिटलों को छोड़ दिया जाए जो ज्यादातर के पास किसी तरह की एनओसी भी अग्निशमन विभाग ने नहीं ली है। जिलेभर में मात्र सात हॉस्पिटलों के पास ही फायर एनओसी है।

यह बोले विभागीय अधिकारी

अग्निशमन विभाग :

नोटिस भेजकर होगी कार्रवाई: मुख्य अग्निशमन अधिकारी

मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रताप सिंह ने बताया कि आग से बचाव के लिए ज्यादातर हॉस्पिटलों में इंतजाम नहीं हैं। जिला अस्पताल में अग्निशमन यूनिट अक्रियशील स्थिति में मिली है। सभी को नोटिस भेजकर मानकों को पूरा करने के लिए कहा गया है। मानक पूरा नहीं करने वालों के खिलाफ सील बंदी की कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य विभाग

जांच कराकर कमियों में कराएंगे सुधार

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में आग बुझाने के पूरे इंतजाम हैं। दिल्ली हादसे के बाद अब पुन: जांच करायी जाएगी। जहां कुछ कमियां मिलेगी, उनमें सुधार कराया जाएगा।

बिजली विभाग:

चीफ इंजीनियर विद्युत एसके अग्रवाल ने बताया कि किसी भी संस्थान आदि में आग लगने के पीछे अक्सर शॉर्ट सर्किट बड़ा कारण होता है। कई बार गर्मी में लोड बढ़ने पर तार चिपक जाते हैं। लिहाजा अच्छी गुणवत्ता वाले तार व स्विच आदि लगवाएं। वायरिंग आदि अच्छे से कराए। एमसीबी जरूर लगवाएं।

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ओवरलोड से तार गर्म होकर लग रही आग

मुख्य अग्निशमन अधिकारी के मुताबिक, आग लगने की दुर्घटना कई कारणों से हो सकती है। लेकिन, ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि बिजली का शॉर्ट सर्किट मुख्य कारण रहा है। शॉर्ट सर्किट, अलग-अलग वोल्टेज पर होने वाले इलेक्ट्रिक सर्किट के दो नोड्स के बीच असामान्य कनेक्शन होता है। सबसे पहले, बिजली का शॉर्ट सर्किट करंट ओवरलोड का कारण बनता है। दूसरा, यह ओवरलोड उच्च ताप का कारण बनता है। यह उच्च ताप आस-पास की सामग्रियों के तापमान को तब तक बढ़ाता है। शॉर्ट सर्किट गंभीर क्षति, आग और यहाँ तक कि छोटे पैमाने पर विस्फोट का कारण बन सकता है।

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