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27 सितम्बर, 2020|5:09|IST

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दुष्यंत की शायरी समाज की पीढ़ा और एक विचारधारा थी: डा. नवाज देवबंदी

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विख्यात शायर डा. नवाज देवबंदी ने प्रसिद्ध शायर एवं कवि दुष्यंत कुमार के जन्म दिवस पर उन्हें याद करते हुए कहा कि दुष्यंत एक ऐसी विचारधारा का नाम है, जो भेदभाव को मिटा कर न्याय चाहता है। उनकी कविता और शायरी को युग बताते हुए कहा कि उनके अंदर की जो ज्वालामुखी था, वह उनकी शायरी में दिखाई देता है।

दुष्यंत पुरस्कार से दो-दो बार सम्मानित डा. नवाज देवबंदी ने उनके जन्म दिवस पर याद करते हुए उनके ख्यालो में काफी देर तक गुम रहे। वह कहते हैं कि वह दुष्यंत की विचारधारा को मानने वालो में से हैं। क्योंकि दुष्यंत ने अपनी शायरी में समाज की खराबियों को महसूस कराया है।

उनकी शायरी में जहां ज्वालामुखी था, वहीं गजल का हुस्न भी था। उन्होंने अपनी शायरी में जनसाधारण के दुख को उतारकर समाज में बदलाव की चाहत पेश की है। डा. नवाज ने बताया कि दुष्यंत ने उन्होंने अपनी पीड़ा को शायरी के माध्यम से गंगा बनाकरं उतारा है।

दुष्यंत ने जीवन के घटनाक्रम को शायरी और कविता बनाने का कमाल हासिल किया है। दुष्यंत की शायरी की आसानी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जिंदगी को अपने ही शेर में बड़ी आसानी से बयान करते हुए कहा कि... तू किसी रेल से गुजरती है, में किसी पुल से थर्राता हूं। उन्होंने कहा कि दुष्यंत ने व्यवस्था को बड़ी मजबूती के साथ ललकारते हुए समाज की पीढ़ा को उठाया है।

दुष्यंत का यह शेर सुनाते हुए उन्हें श्रद्धाजंली दी । कहा-आज यह दीवार पर्दो की तरह हिलने लगीं, शर्त थी कि यह बुनियाद हिलनी चाहिए। दुष्यंत अपनी शायरी से समाज में फैल रही नाइंसाफी को खत्म करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने गजल को इंसाफ हासिल करने का हथियार बनाया।

दुष्यंत का एक ओर शेर सुनाते हुए कहा कि उन्होंने जिंदगी की हकीकत इस शेर में इस तरह पेश की। .... यह सारा जिस्म झुककर बोझ से दोहरा हुआ होगा, में सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा। दुष्यंत अपनी शायरी में सामाजिक व्यवस्था, सामाजिक कुरीतियों पर नजर रखते थे। यहां तक आते आते सूख जाती है सारी नदिया, मुझे मालुम है कहा पानी ठहर रहा है।

वह जानते थे कहां से आवाज को उठाना हैं। इसलिए वह दुख, पीढ़ा सामाजिक बुराईयों के खिलाफ उठने वाली आवाज नहीं बल्कि रुमानी शायरी के भी बडे़ शायरी पेश किया है।

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  • Web Title:Dushyant 39 s poetry was the torment of the society and an ideology Dr Nawaz Deobandi