
दीपावली पर पटाखा हादसे, हाथ-पैर झुलसे
Saharanpur News - दीपावली की रात सहारनपुर में पटाखा हादसों में करीब चार दर्जन लोग झुलस गए। बच्चों में हादसे की संख्या अधिक रही। लापरवाही से पटाखे जलाने और वीडियो बनाने के चक्कर में ये घटनाएँ हुईं। कई गंभीर रूप से घायल...
दीपावली की रात जिले में आतिशबाजी खुशियों के बजाय कई परिवारों के लिए दर्द बन गई। जिले में अलग-अलग स्थानों पर पटाखा हादसों में करीब चार दर्जन लोग झुलस गए। कई घायलों की हालत गंभीर है। देर रात तक सरकारी अस्पताल और निजी हॉस्पिटलों में घायलों की लगातार आमद होती रही। अधिकांश घायलों के हाथ, चेहरा और बांहें झुलसी हुई मिलीं। हादसों में कुछ लोगों के कपड़ों में भी आग लग गई। फोन के कैमरे से पटाखा जलाने, हाथ में बम जैसी आतिशबाजी पकड़कर जलाने और भीड़ में पटाखा फेंकने जैसी लापरवाही इन हादसों का कारण बनी। डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ गंभीर रूप से झुलसे लोगों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

अस्पताल प्रशासन ने त्योहार की रात अतिरिक्त स्टाफ तैनात कर रखा था, ताकि घायलों का तुरंत उपचार किया जा सके। अधिकतर हादसे असावधानी और अवैधानिक आतिशबाजी के कारण हुए हैं। दीपावली के उत्साह के बीच हुई इन घटनाओं ने सुरक्षा के प्रति लापरवाही की बड़ी तस्वीर सामने रख दी है। ज्यादातर बच्चे हुए हादसे के शिकार सहारनपुर। पटाखा हादसों में सबसे अधिक बच्चे झुलसे। खेल-खेल में लापरवाही और बिना निगरानी के पटाखे जलाना बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बना। कई बच्चे तेज आवाज वाले पटाखों को हाथ में पकड़कर जलाते हुए घायल हो गए, जबकि कुछ के कपड़ों में आग लग गई। हादसों में पहुंचे अधिकांश मरीज 8 से 15 वर्ष की आयु के थे। वीडियोग्राफी का शौक भी पड़ा महंगा सहारनपुर। दीपावली पर पटाखों के साथ वीडियो बनाने का क्रेज कई लोगों को भारी पड़ गया। सोशल मीडिया पर वायरल करने के लिए युवा मोबाइल फोन लेकर पटाखों के बेहद करीब पहुंचकर शूटिंग करते रहे, जिसके चलते कुछ हादसे हुए। कुछ युवाओं के हाथ में पकड़ा पटाखा अचानक फट गया तो उंगलियां भी झुलस गईं। कई मामलों में फोन की फ्लैश लाइट जलती रही और अचानक विस्फोट ने नुकसान पहुंचाया। वर्जन दीपावली की रात पटाखा हादसों में बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे। अधिकतर मरीजों के हाथ व चेहरे झुलसे हुए थे। प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश को घर भेज दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। -डॉ सुधा, सीएमएस

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