भगवान ने इंद्र का अभिमान तोड की गौकुलवासियों की रक्षा
श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। कथावाचक पं. सुधीर शर्मा ने असुरों के संहार और गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भजनों और संकीर्तन का आनंद लिया। इस अवसर पर कई भक्तजन उपस्थित रहे।

श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। और श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति व सदाचार का संदेश दिया। श्री विश्वकर्मा धर्मशाला में आयोजित भागवत कथा में कथावाचक पं. सुधीर शर्मा ने पूतना, त्रिणावर्त, बकासुर और अघासुर जैसे असुरों के संहार का प्रसंग सुनाया और माखन चोरी और ग्वाल-बालों तथा गोपियों के साथ उनकी बाल लीलाओं का भी चित्रण किया। गोवर्धन पूजा के प्रसंग में उन्होंने बताया कि जब देवराज इंद्र ने अभिमानवश गोकुल पर मूसलधार वर्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर इंद्र का अभिमान तोड गोकुलवासियों की रक्षा की।
संगीतमय भजनों और संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। शक्ति सिंह ने ढोलक, भूपेंद्र ने साउंड और कपिल पांचाल ने पियानो पर संगत दी। मनदीप, रानी, मनोज, राजेश, रामपाल, मनोज, प्रवीण, महिपाल, सुरेंद्र, पुष्पा, शर्मिष्ठा, संतोष, अरुणा, अंजना, ओमवती, अनीता, सेवावती, पूनम भारती, संतोष, विरमवती, शशि खन्ना आदि मौजूद रहे।
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