
बोले सहारनपुर : चिलकाना की आबादी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित
Saharanpur News - चिलकाना कस्बा, जो नकुड़ विधानसभा में स्थित है, समस्याओं से जूझ रहा है। यहां बस स्टैंड की कमी, जाम, गंदगी, और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। नगर की बढ़ती जनसंख्या और यातायात दबाव के बावजूद उचित सुविधाएं नहीं हैं। स्थानीय लोग समस्याओं के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
जनपद की नकुड़ विधानसभा में स्थित चिलकाना कस्बा, लगभग 26,000 की आबादी वाला एक महत्वपूर्ण ग्रामीण-शहरी मिश्रित क्षेत्र है। यहां का मेन बाजार, जिसमें करीब 250 दुकानें संचालित होती हैं, आसपास के कई गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जरुरतों को पूरा करता है। चिलकाना की भौगोलिक स्थिति और आस-पास के क्षेत्रों के लिए इसका केंद्र बिंदू होना इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। बावजूद इसके कस्बे में बस स्टैंड का अभाव, जलभराव, जाम, साफ-सफाई, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं वर्षों से नासूर बनी हुई हैं। स्थानीय लोग इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं, मगर आज भी समस्याओं का समस्या जस का तस है।
चिलकाना नकुड़ विधानसभा का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां से पटेड़, सरसावा, नकुड़ और ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोग रोजाना आवागमन करते हैं। इतनी बड़ी आबादी और यातायात गतिविधियों के बावजूद चिलकाना में बस स्टैंड का अभाव है। यही कारण है कि कस्बे में लगातार अव्यवस्था बढ़ती जा रही है और लोगों की परेशानी भी। वर्तमान स्थिति यह है कि चिलकाना में आने-जाने वाली सभी बसें सीधे मुख्य चौराहे पर ही खड़ी होती हैं। यह चौराहा पहले ही बेहद व्यस्त रहता है क्योंकि यह कई मार्गों को जोड़ने वाला प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट है। बसों के रुकने से यहाँ अचानक भीड़ जमा हो जाती है और चारों ओर अव्यवस्थित तरीके से वाहन खड़े हो जाते हैं। न तो बसों के खड़े होने के लिए कोई निश्चित जगह है और न ही यातायात नियंत्रण की कोई स्थायी व्यवस्था। सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को उठानी पड़ती है। बसों के इंतजार के लिए प्रतीक्षा शेड (सहारा स्थल) तक उपलब्ध नहीं है। बरसात के मौसम में लोग भीगते हुए बस का इंतजार करते हैं और गर्मियों में तपती धूप में सड़क किनारे खड़े रहने को मजबूर होते हैं। खासकर महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और विद्यार्थी इस कष्टदायक स्थिति का सबसे ज्यादा सामना करते हैं। इसके अलावा शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी पूर्ण अभाव है। यदि किसी यात्री को शौचालय की आवश्यकता पड़े तो आसपास कोई व्यवस्था नहीं मिलती, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। लंबे सफर के लिए जाने वाले यात्रियों को पानी की भी दिक्कत आती है क्योंकि बस स्टैंड न होने के कारण दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। बसों के चौराहे पर रुकने से जाम की समस्या भी बढ़ रही है। बस खड़ी होते ही ई-रिक्शा, ऑटो, बाइक और पैदल यात्रियों की भीड़ एक जगह जमा हो जाती है। कई बार चौराहे पर इतना जाम लग जाता है कि वाहन 10-15 मिनट तक वहीं फंसे रह जाते हैं। इससे न केवल व्यापारियों और आम लोगों को समय की बर्बादी का सामना करना पड़ता है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। स्पष्ट है कि चिलकाना की बढ़ती जनसंख्या और यातायात दबाव को देखते हुए यहाँ एक व्यवस्थित, सुविधायुक्त और सुरक्षित बस स्टैंड की स्थापना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि बस स्टैंड का निर्माण कर बसों के रुकने का स्थान चौराहे से हटाया जाए तो न केवल जाम कम होगा, बल्कि यात्रियों को भी सम्मानजनक और सुविधाजनक माहौल मिल सकेगा। मुख्य बाजार और मुख्य चौराहे पर जाम की विकट समस्या चिलकाना कस्बे का मेन बाजार और मुख्य चौराहा आज जाम की गंभीर समस्या का केंद्र बना हुआ है। सुबह से देर शाम तक इस मार्ग पर ट्रैफिक इतना अव्यवस्थित रहता है कि वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। यह समस्या वर्षों से बढ़ती जा रही है और अब विकट रूप ले चुकी है। जाम की स्थिति का सबसे बड़ा कारण है बस स्टैंड का अभाव। बसें सीधे मुख्य चौराहे पर ही खड़ी होती हैं, जिससे अचानक भीड़ बढ़ जाती है और सड़क संकरी हो जाती है। बस रुकते ही उसके आसपास यात्रियों, रिक्शाओं और अन्य वाहनों की भीड़ जमा हो जाती है, जिससे पूरा मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा की अनियंत्रित पार्किंग भी जाम को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है। इनके लिए कोई निर्धारित स्टैंड नहीं है, इसलिए चालक सड़क के बीच या दुकानों के सामने ही वाहन खड़ा कर देते हैं। बढ़ती संख्या में रिक्शाओं के कारण पूरा रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। यही नहीं, अवैध पार्किंग से भी मेन बाजार की संकरी सड़क और ज्यादा तंग हो जाती है। दुकानदार और ग्राहक अपनी बाइकों को जहां जगह मिले वहीं खड़ी कर देते हैं, जिससे सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है। इस अव्यवस्था को और गंभीर बनाता है मुख्य चौराहे पर रखा हुआ ट्रांसफार्मर चौराहे की चौड़ाई को और छोटा कर देता है। ट्रांसफार्मर के आसपास बनी सुरक्षा रेलिंग सड़क पर अतिरिक्त कब्जा कर लेती है, जिससे वाहनों के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती और जाम की समस्या और अधिक बढ़ जाती है। कई बार बड़े वाहनों को इसके पास से निकलने में भी मुश्किल होती है। ट्रैफिक कर्मियों की स्थायी तैनाती न होने से स्थिति और भी बिगड़ जाती है। इन सभी कारणों से प्रतिदिन मेन बाजार और मुख्य चौराहे पर जाम लगता है, और कई बार पैदल चलने वालों को भी कछुआ चाल में आगे बढ़ना पड़ता है। यह समस्या न केवल असुविधा पैदा करती है बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बढ़ाती है। चिलकाना की व्यवस्था सुधारने के लिए इस जाम की समस्या का समाधान जरूरी है। सफाई व्यवस्था की बड़ी समस्या - खासकर वाल्मीकि मंदिर के पास चिलकाना कस्बे में सफाई व्यवस्था कई स्थानों पर बेहद खराब स्थिति में है, लेकिन सबसे चिंताजनक हालात वाल्मीकि मंदिर के पास देखने को मिलते हैं। इस क्षेत्र में लंबे समय से गंदगी का ढेर जमा रहता है, जिसे समय पर हटाने की कोई पुख्ता व्यवस्था दिखाई नहीं देती। नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण उनमें अक्सर कचरा भर जाता है और वे ओवरफ्लो की स्थिति में आ जाती हैं। इससे आसपास बदबू फैलती है और राहगीरों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी निकासी न होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे लोगों का चलना तक मुश्किल हो जाता है। नालियों से निकलने वाली गंदगी और लगातार जमा कचरे से मच्छर, मक्खियों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। गंदगी की यह स्थिति न केवल बदबू और असुविधा का कारण बनती है, बल्कि बीमारियों के फैलने का खतरा भी लगातार बना रहता है। विशेषकर डेंगू, मलेरिया और संक्रमण संबंधी रोगों की आशंका यहां हमेशा बनी रहती है। चिलकाना जैसे महत्वपूर्ण कस्बे में सफाई की इस बदहाल स्थिति को देखते हुए आवश्यक है कि नगर निकाय इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देकर नियमित सफाई सुनिश्चित करे। पानी की निकासी की गंभीर समस्या चिलकाना के मेन बाजार की सबसे पुरानी और गंभीर समस्याओं में से एक है पानी की निकासी का अभाव है। बाजार की नालियां वर्षों से जर्जर स्थिति में हैं। कई जगह नालियां बेहद छोटी हैं, कई स्थानों पर टूटी-फूटी पड़ी हैं और अधिकांश हिस्सों में वे हमेशा चोक रहती हैं। इस कारण बरसात के दिनों में थोड़ी सी बारिश भी बाजार को तालाब में बदल देती है। जैसे ही बारिश होती है, मेन बाजार के अधिकांश हिस्सों में पानी भर जाता है। दुकानों के सामने पानी का रुकना आम बात हो गई है। कई बार तो पानी दुकानों के अंदर तक चला जाता है, जिससे व्यापारियों को सामान खराब होने का खतरा रहता है। कई दुकानदारों को पानी हटाने और सफाई में अतिरिक्त खर्च व मेहनत करनी पड़ती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। जलभराव के कारण ग्राहकों का बाजार आना भी कम हो जाता है, जिससे व्यापार और प्रभावित होता है। वहीं, पानी भरने से सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोग वर्षों से निकासी की व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। चिलकाना जैसे व्यस्त बाजार में पानी निकासी की यह समस्या जल्द समाधान मांगती है, ताकि व्यापार और आम जनजीवन प्रभावित न हो। आपातकालीन सुविधाएं न मिलने से बढ़ रही परेशानी चिलकाना कस्बे में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। यहां स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बड़ी धनराशि खर्च हुई है। लेकिन वास्तविकता में यह स्थानीय लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है और आपातकालीन सेवाएं तो लगभग न के बराबर हैं। गंभीर बीमारियों या आकस्मिक स्थितियों में यहां इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। न तो आवश्यक मशीनें उपलब्ध हैं और न ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती है। कई बार तो मरीजों को सामान्य जांच कराने में भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। सबसे बड़ी समस्या तब सामने आती है जब सड़क दुर्घटना में कोई घायल हो जाता है। ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को तुरंत जिला अस्पताल सहारनपुर भेजना पड़ता है, जो समय और दूरी दोनों के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण है। कई मामलों में देरी की वजह से मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण बड़े उद्देश्यों के साथ हुआ था, लेकिन सेवाएं शुरू नहीं होने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। जरूरत है कि स्वास्थ्य केंद्र को पूरी तरह सक्रिय किया जाए और आपातकालीन सुविधाओं को तुरंत प्रारंभ किया जाए, ताकि जनता को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके। समस्याएं एवं सुझाव -चिलकाना में बस स्टैंड नहीं है, बसें चिलकाना चौराहे पर खड़ी होती हैं -चिलकाना के मेन बाजार और मुख्य चौराहे पर जाम की समस्या -वाल्मीकि मंदिर के पास बदहाल सफाई व्यवस्था -चिलकाना के मेन बाजार में पानी की निकासी की समस्या सुझाव -चिलकाना में बस स्टैंड का निर्माण कराया जाए -जाम की समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं -सफाई व्यवस्था में सुधार लाया जाए -पानी की निकासी की समस्या का समाधान कराया जाए प्रतिक्रियाएं चिलकाना बाजार की अव्यवस्था लंबे समय से बढ़ रही है। बसें चौराहे पर रुकने से जाम की समस्या और बिगड़ती है। पानी निकासी की कमी के कारण बरसात में पूरा बाजार तालाब बन जाता है। अमित उपाध्याय चिलकाना कस्बे में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। गंभीर बीमारियों या आकस्मिक स्थितियों में यहां इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। युसूफ कुरैशी मेन बाजार में ई-रिक्शा व ऑटो की अव्यवस्थित पार्किंग से हर समय जाम लगता है। बस स्टैंड न होने से यात्रियों को भारी दिक्कत होती है। बरसात में पानी भरने से दुकानों का सामान खराब हो जाता है। सुधीर सैनी चिलकाना के मुख्य चौराहे पर ट्रांसफॉर्मर और बसों की वजह से हमेशा भीड़ रहती है। जाम के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों तक को परेशानी होती है। सचिन गर्ग बाजार की सड़कें पहले ही संकरी हैं, ऊपर से अवैध पार्किंग और बसों की भीड़ जाम को और बढ़ा देती है। पानी निकासी की व्यवस्था बेहद खराब है। यशपाल रोहिला जाम की समस्या इतनी गंभीर है कि कभी-कभी पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बस स्टैंड की अनुपस्थिति यातायात को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर देती है। प्रवीण गोयल पानी निकासी सिस्टम इतना कमजोर है कि थोड़ी बारिश से भी सड़कें जलभराव में बदल जाती हैं, जिससे कई बार दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और व्यापार प्रभावित होता है। रमेश कश्यप मेन बाजार का जाम चिलकाना की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। बसों और ई-रिक्शाओं की अनियमित पार्किंग से हालात और कठिन हो जाते हैं। ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। राकेश शर्मा स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है और आपातकालीन सेवाएं तो लगभग न के बराबर हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है। विनोद लाम्बा बरसात के दिनों में थोड़ी सी बारिश भी बाजार को तालाब में बदल देती है। जैसे ही बारिश होती है, मेन बाजार के अधिकांश हिस्सों में पानी भर जाता है। राकेश एरन -वर्जन चिलकाना क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा। कई कार्य प्रगति पर हैं और शेष जल्द शुरू होंगे। जनता की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता है। मुकेश चौधरी, नकुड़ विधायक

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