अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने सांसद, विधायक को सौंपा ज्ञापन
Saharanpur News - सहारनपुर में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा, जिसमें यूजीसी की सवर्ण-विरोधी नीतियों को निरस्त करने की मांग की गई। महासभा का आरोप है कि 2016 में लागू यूजीसी एक्ट से सवर्ण बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर संकट आ गया है। उन्होंने समानता के नाम पर संवैधानिक विश्वासघात बताया।
सहारनपुर। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सांसद इमरान मसूद और नगर विधायक राजीव गुंबर को सौंपा गया। ज्ञापन में यूजीसी की कथित सवर्ण-विरोधी एवं मेरिट-विरोधी नीतियों को निरस्त करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए यूजीसी एक्ट के माध्यम से सवर्ण समाज के बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर सुनियोजित प्रहार किया जा रहा है। महासभा का आरोप है कि मेरिट, योग्यता और प्रतिस्पर्धा को कमजोर करने की व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे सवर्ण बच्चों को उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक नेतृत्व से बाहर किया जा सके।
महासभा ने यह भी कहा कि जिस प्रकार 2018 के एससी-एसटी एक्ट संशोधन के बाद सवर्ण समाज, विशेषकर ब्राह्मण समाज, भय, अपमान और कानूनी उत्पीड़न का सामना कर रहा है, उसी तरह यूजीसी एक्ट के बाद भी सवर्ण बच्चों के साथ अन्याय की आशंका है। इसे समानता के नाम पर संवैधानिक विश्वासघात बताया गया। ज्ञापन में यूजीसी की सवर्ण-विरोधी व मेरिट-विरोधी नीतियों को तत्काल निरस्त करने, एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी संशोधन व दिशा-निर्देश जारी करने, प्रयागराज माघ मेला प्रकरण सहित साधु-संतों व ब्राह्मण बटुकों से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय/न्यायिक जांच कराने तथा अनुच्छेद 14 के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए समान व्यवहार को व्यवहारिक रूप से लागू करने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालो में विकास शर्मा, शिव कुमार शर्मा, केके शर्मा, अनेश शर्मा, हरिओम मिश्रा, प्रदीप कपिल, अजय भारद्वाज, श्याम सुंदर शर्मा आदि रहे।

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