यूपी के इस जिले में राजस्व रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल, खतौनी और अन्य कागजात ऑनलाइन मिलेंगे

Deep Pandey लखनऊ, ज्ञान प्रकाश
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सभी पांचाें तहसीलों का राजस्व रिकॉर्ड पूरी तरह से डिजिटल हो गया है। अब नागरिकों को खतौनी या बंदोबस्त अभिलेखों के लिए कलेक्ट्रेट या तहसील के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

यूपी के इस जिले में राजस्व रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल, खतौनी और अन्य कागजात ऑनलाइन मिलेंगे

UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोगों के लिए राहत की खबर है। लखनऊ जिले में जमीन-जायदाद के कागजात और राजस्व रिकॉर्ड प्राप्त करने की दशकों पुरानी व्यवस्था अब इतिहास बनने जा रही है। लखनऊ की सभी 5 तहसीलों के रिकॉर्ड को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब नागरिकों को खतौनी या बंदोबस्त अभिलेखों के लिए कलेक्ट्रेट या तहसील के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब लोगों को खतौनी या बंदोबस्त अभिलेखों के ऑनलाइन ही मिल जाएंगे। इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से आदेश जारी कर दिया है।

दरअसल, लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश में जिला प्रशासन ने जिले की पांचों तहसीलों, सदर, मलिहाबाद, मोहनलालगंज, बीकेटी और सरोजनीनगर के अंतर्गत आने वाले सभी 7 परगनाओं (लखनऊ, मलिहाबाद, मोहनलालगंज, निगोहां, महोना, बिजनौर और काकोरी) के कुल 898 गांवों का डेटा डिजिटल कर दिया है। कुल 22,51,696 (22.51 लाख) रिकॉर्ड्स को स्कैन और डिजिटाइज किया गया है, जिनमें खतौनी, अधिकार अभिलेख, बंदोबस्त अभिलेख और चकबंदी रिकॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।

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इस व्यवस्था से दलालों और तहसील में होने वाली अनावश्यक देरी पर लगाम लगेगी

अब 15 अप्रैल से सभी प्रकार के राजस्व अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां केवल इसी वेबसाइट के माध्यम से ही जारी की जाएंगी। इस व्यवस्था से दलालों और तहसील में होने वाली अनावश्यक देरी पर लगाम लगेगी। अब तक किसानों और जमीन मालिकों को पुराने रिकॉर्ड निकलवाने के लिए कई दिनों तक तहसील के बाबू और अभिलेखागार के चक्कर लगाने पड़ रहे थे और किसानों को दिक्कतें झेलनी पड़ती थी। कई बार पुराने रिकॉर्ड फटे होने या न मिलने की समस्या भी आती थी लेकिन पर अब इस तरह की परेशानियों से नहीं जूझना पड़ेगा। अब एक क्लिक पर प्रमाणित प्रति मिलने से न केवल समय बचेगा, बल्कि धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी। इन सभी अभिलेखों को देखने और उनकी प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए एक विशेष वेबसाइट https://lucknowbhulekh.in तैयार की गई है।

अभियान की तरह हुआ प्रयास

राजधानी लखनऊ में सभी तहसीलों के राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की प्रक्रिया 2016 में शुरू हो गई थी। मौजूदा एडीएम प्रशासन शुभी सिंह ने इसे अभियान की तरह रखा। कोर्ट, बैठकों और निरीक्षण से अलग इसके लिए समय निकाला। आखिर में वेबसाइट की दिक्कत सामने आ गई नहीं तो 27 जनवरी को ही लॉन्च होना था। आखिरकार यह समस्या भी दूर हो गई और अब रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गए। अब इस व्यवस्था से राजधानी के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey

दीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।

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