झूठे मुकदमों ने जिंदगी बर्बाद कर दी; रिटायर्ड टीचर ने जहर खाकर जान दी, पूर्व DG समेत 6 को जिम्मेदार बताया
ललितपुर में 2002 के चिगलौआ कांड के पीड़ित 80 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक राजाराम गोस्वामी ने जहर खाकर जान दे दी। सुसाइड नोट में उन्होंने तत्कालीन एसपी, पूर्व डीजी समेत छह लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

ललितपुर जिले के बार क्षेत्र स्थित ग्राम चिगलौआ में साल 2002 में हुए बहुचर्चित कांड के पीड़ित रिटायर्ड शिक्षक राजाराम गोस्वामी ने गुरुवार को जहर खाकर जान दे दी। मरने से पहले उन्होंने न्यायाधीश, एसपी और इंस्पेक्टर थाना बार के नाम लिखी चिट्ठियों में तत्कालीन एसपी और पूर्व डीजी समेत छह लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। चिगलौआ निवासी अनुराग गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता सेवानिवृत्त शिक्षक 80 वर्षीय राजाराम गोस्वामी ने फोन पर उन्हें जानकारी दी कि उन्होंने जहर खा लिया है। सूचना पर वह घर पहुंचे और पिता को कार से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार पहुंचे। हालत में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज ललितपुर रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया। अनुराग ने बताया कि पिता की जेब से उन्हें सुसाइड नोट मिले।
सुसाइड नोट में पूर्व डीजी समेत 6 को जिम्मेदार ठहराया
सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि ‘5 जुलाई 2002 का दिन मेरे जीवन का एक सबसे बुरा दिन होकर आया। तत्कालीन एसपी पर उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि झूठे आरोपों में उन्हें न केवल अपमानित किया गया, बल्कि भरी सड़क पर उनके कपड़े उतरवाकर बेरहमी से पीटा गया। पूरा गांव साक्षी है कि हमने कोई अपराध नहीं किया था, लेकिन झूठे मुकदमों ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी।’ राजाराम ने अपनी मौत के लिए तत्कालीन एसपी और पूर्व डीजी, एक सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, शिक्षामित्र और झूठी गवाही देने वाले लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। इस बारे में बार थाने के प्रभारी रमेश चंद्र मिश्र ने कहा कि घटना की बेहद गंभीरता से जांच की जा रही है। शव को पोस्मार्टम के लिए भेजा गया है। नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
परिवार की मांग पर डाक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
चिगलौआ कांड जिले के बहुचर्चित मामलों में से एक रहा है। आत्महत्या करने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक की छवि बेहद साफ सुथरी रही है। इसलिए जैसे ही लोगों को जानकारी मिली कि सेवानिवृत्त शिक्षक ने आत्महत्या कर ली, वैसे ही लोग मृतक के परिजनों से संपर्क करने में जुट गए। घटना की जानकारी मिलते ही सांसद अनुराग शर्मा सहित भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। भीड़ बढ़ते ही पुलिस और खुफिया भी अलर्ट हो गयी। भारी पुलिस फोर्स पोस्टमार्टम हाऊस पर तैनात कर दिया गया। इस बीच मृतक के परिजनों ने चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने के लिए मांग उठाई।
24 वर्ष पहले हजारों लोगों ने किया था प्रदर्शन
आपको बता दें 24 साल पहले इस मामले में जेल भेजे गए सेवानिवृत्त शिक्षक के समर्थन में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया था। तत्कालीन विधायक पूरन सिंह बुंदेला, पूर्व विधायक रामकुमार तिवारी ने लोगों के साथ पांच दिन आमरण अनशन किया था। तब तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा अधिकारी की मौजूदगी में तत्कालीन एसपी ने पीड़ित शिक्षक से मांफी मांगी थी। सुसाइट नोट में भी इस का जिक्र है। प्रभारी निरीक्षक थाना बार रमेश चंद्र मिश्र ने बताया कि इस मामले की बेहद गंभीरता से जांच की जा रही है। शव का पंचनामा भरकर पोस्मार्टम के लिए भेजा गया है। नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


