
सरकारी नीति का मजाक बना रहे जिम्मेदार अफसर, जानें हाई कोर्ट ने क्यों की ये सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार के जवाबी हलफनामे की कॉपी राज्य सरकार के अधिवक्ता को सौंप दें। जिलाधिकारी जौनपुर को भी निर्देश दिया कि केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर कार्रवाई करें। अनुग्रह राशि का भुगतान के लिए की गई सरकारी घोषणा के अनुसार बकाया राशि का भुगतान करें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेल दुर्घटना में जान गंवाने वाले दंपती के नाबालिग अनाथ बच्चे को अनुग्रह राशि देने से इनकार करने पर गंभीर टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों से जिम्मेदाराना व्यवहार करने की अपेक्षा की जाती है लेकिन इस मामले में उनका व्यवहार नीति का मजाक उड़ाने जैसा है।

खंडपीठ को बताया गया कि याची के माता-पिता की रेल दुर्घटना में मृत्यु होने का कोई सबूत नहीं है इसलिए भुगतान नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस दलील पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि राज्य का यह कहना पूर्ण रूप से अस्वीकार्य है। कोर्ट कहा कि हमारे विचार से यह उन लोगों द्वारा नीति का मजाक उड़ाने जैसा है जो राज्य विभाग के मामलों के शीर्ष पर हैं। जब केंद्र सरकार ने दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किया है तो उन दस्तावेजों को राज्य सरकार द्वारा भुगतान के आधार के रूप में लिया जाना चाहिए था।
कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार के जवाबी हलफनामे की कॉपी राज्य सरकार के अधिवक्ता को सौंप दें। साथ ही जिलाधिकारी जौनपुर को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर मामले में आवश्यक कार्रवाई करें और अनुग्रह राशि का भुगतान के लिए की गई सरकारी घोषणा के अनुसार बकाया राशि का भुगतान करें। राज्य प्राधिकारियों ने मृत्यु के प्रमाण के अभाव का हवाला देते हुए राहत देने से इनकार कर दिया जबकि केंद्र सरकार ने पहले ही बच्चे के दावे का सत्यापन कर अपने हिस्से की धनराशि जारी कर दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार के आचरण को नीति का मजाक करार देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के शीर्ष अधिकारियों को केंद्र सरकार द्वारा बताए गए दस्तावेजों के आधार पर याची को भुगतान करना चाहिए था।
यह है मामला
नाबालिग याची आदर्श पांडेय उर्फ अंश ने रेल दुर्घटना में जान गंवाने वाले माता के-पिता के आश्रित के रूप में सरकार द्वारा घोषित अनुग्रह राशि की मांग करते हुए याचिका की है। याचिका के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों ने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक राहत की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने मृतकों के आश्रितों के लिए पांच लाख रुपये की राशि का प्रस्ताव रखा था और राज्य के मुख्यमंत्री ने भी इसी तरह की घोषणा की थी। कार्यवाही के दौरान केंद्र सरकार ने प्रति-शपथपत्र दाखिल कर पुष्टि की कि केंद्र की ओर से घोषणा के अनुसार याची को भुगतान किया जा चुका है।





