
यूपी के लोगों को राहत, बिजली बिल नहीं बढ़ेगा, रेट बढ़ाने का प्रस्ताव आयोग से खारिज
यूपी के साढ़े तीन करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। यूपी में अब बिजली की नई दरें नहीं बढ़ाई जाएंगी। यह लगातार छठा साल जब है जब प्रदेश में बिजली की दरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है।
यूपी के साढ़े तीन करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। यूपी में अब बिजली की नई दरें नहीं बढ़ाई जाएंगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने शनिवार को बिजली की नई दरें जारी कर दी हैं। यह लगातार छठा साल जब है जब प्रदेश में बिजली की दरों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। बिजली की नई दरों को बढ़ाने को लेकर पावर कारपोरेशन ने प्रस्ताव रखा था जिसे नियामक आयोग ने खारिज कर दिया है। आयोग के इस फैसले से बिजली उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है। लगातार छठे साल दरों में इजाफा न करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। साथ ही आयोग ने बहुमंजिला इमारतों और टाउनशिप से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए एक अलग कंसल्टेशन पेपर जारी किया। बतादें कि कंपनियों को हर साल 30 नवंबर तक नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) का प्रस्ताव दाखिल करना होता है। इसी प्रस्ताव पर नियामक आयोग के निर्देश पर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाते हैं। इस पर सुनवाई के बाद नई दरें तय की जाती हैं।
नियामक आयोग ने पाया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपूर्ति के लिए 163,778.24 मिलियन यूनिट बिजली की जरूरत होगी। इसकी खरीद पर 1,10,993.33 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। बिजली वितरण कंपनियों ने 164,592.49 मिलियन यूनिट बिजली खरीद के लिए 1,12,865.33 करोड़ रुपये का अनुमानित वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) दाखिल किया था। आयोग ने डिस्कॉम द्वारा दावा किए गए 13.77% के मुकाबले 13.35% के वितरण घाटे को मंजूरी दी है। यूपी सरकार 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी।
आयोग ने उपभोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले 86,18329 करोड़ रुपये के राजस्व को मंजूरी दे दी है। इससे सभी डिस्कॉम को 1.03.283.29 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। आयोग ने कहा है कि इससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिजली कंपनियों को 7,710.04 करोड़ रुपये का घाटा होगा। हालांकि, एक अप्रैल 20205 तक बिजली कंपनियों के पास 18592.38 करोड़ रुपये का अनुमानित जमा अतिरिक्त है। लिहाजा बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव का आयोग ने कोई कारण नहीं पाया है।
बहुमंजिला इमारतों के लिए अलग से परामर्श पत्र होगा जारी
नियामक आयोग ने साफ किया है कि वह बहुमंजिला इमारतों और टाउनशिप में आ रही दिक्कतों को लेकर अलग से परामर्श पत्र जारी करेगा। बहुमंजिला इमारतों और टाउनशिप में सिंगल पॉइंट उपभोक्ताओं को काफी दिक्कतें आ रही हैं। उपभोक्ताओं ने इस टैरिफ मामले की जनसुनवाई में आयोग से शिकायत की थी कि सिंगल पॉइंट कनेक्शन होने की वजह से उन्हें साझा क्षेत्र में इस्तेमाल हो रही बिजली की जानकारी नहीं मिलती है। आपके अखबार 'हिन्दुस्तान'• ने बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले उपभोक्ताओं की इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
उपभोक्ता परिषद ने जताया आयोग का आभार
पावर कार्पोरेशन के प्रस्तावित एआरआर में बढ़ोत्तरी के खिलाफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिकाएं दायर की थीं और बिजली दरों में प्रस्तावित इजाफे का विरोध किया था। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने टैरिफ ऑर्डर में दरों में बढ़ोत्तरी न किए जाने के लिए आयोग का आभार जताया। शनिवार को उन्होंने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात की।
नोएडा में छूट जारी रहेगी
आयोग ने नोएडा पावर कंपनी (एनपीसीएल) की बिजली दरें भी यथावत रखने का निर्णय दिया है। इससे तय हो गया है कि एनपीसीएल पोषित उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में दस प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी। नोएडा क्षेत्र के लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अतिरिक्त वसूली की भरपाई के लिए एनपीसीएल उपभोक्ताओं को बिजली बिल में दस प्रतिशत छूट दे रही है।
लंबे समय तक दरों में इजाफा न होने के आसार
इस साल भी बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 18,592 करोड़ रुपये बकाया निकला है। अब कुल बकाया राशि 51 हजार करोड़ रुपये के पार जा चुकी है। बिजली दरों में इजाफे के पहले पावर कार्पोरेशन को यह बकाया चुकता करना होगा। लिहाजा अब एक लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में इजाफे के आसार न के बराबर रह गए हैं। उपभोक्ता परिषद पहले ही बकाये की वजह से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत की मांग कर रहा है।
टैरिफ आदेश में यह भी खास
| सिर्फ मध्यांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ही वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वितरण हानियों के लिए तय लक्ष्य को पूरा करने में कामयाब रहे। सबसे खराब प्रदर्शन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का रहा। उसके बाद दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का नंबर है। |
| प्रदेश सरकार लाइफलाइन उपभोक्ता (एक किलोवॉट के), निजी ट्यूबवेल उपभोक्ताओं आदि को पहले की तरह ही सब्सिडी देती रहेगी। |
| वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आपूर्ति की औसत लागत 8.18 (रुपये/यूनिट) होने का अनुमान है, जबकि औसत बिलिंग दर 7.61 (रुपये/यूनिट) होने का अनुमान है। |
| वितरण हानियों को वित्तीय वर्ष 2029-30 तक 10.74% करने का लक्ष्य तय किया गया है। |
| दिन रात के लिए टैरिफ श्रेणी पिछले साल जैसे ही रहेंगे। यानी, अभी इन्हें प्रभावी नहीं किया जाएगा। |





