3 दिन में छोड़ें गाड़ी और दें 2 लाख का हर्जाना, गोमांस का दावा साबित न हो पाने पर HC का सख्त आदेश
गोमांस ले जाने के आरोप में एक शख्स की गाड़ी 18 महीने तक जब्त रही। हाई कोर्ट ने उसके मामले में सुनवाई के बाद तीन दिन के अंदर गाड़ी छोड़ने और याचिकाकर्ता को दो लाख रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष गोमांस की बात साबित नहीं कर सका था।

UP News : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोमांस ले जाने के अप्रमाणित दावे पर 18 महीने से अधिक समय तक गाड़ी जब्त रखने की कार्रवाई पर सख्त एतराज जताते हुए सरकार से याचिकाकर्ता को दो लाख रुपए बतौर हर्जाना अदा करने को कहा है। इस मामले में कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों की अवैध और मनमानी कार्रवाई के चलते याचिकाकर्ता मोहम्मद चंद को गंभीर आर्थिक हानि हुई। जिस गाड़ी को जब्त किया गया था वो परिवहन वाहन था और याचिकाकर्ता की आजीविका का साधन था। पीठ ने याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार करते हुए तीन दिनों के अंदर गाड़ी छोड़ने का आदेश दिया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश को गोमांस परिवहन के अप्रमाणित दावे पर वाहन जब्त करने के लिए 2 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही राज्य को अवैध जब्ती करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से हर्जाने की इस रकम की वसूली की छूट दी है। वेबसाइट ‘बार एंड बेंच’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता मोहम्मद चंद 18 अक्टूबर 2024 से जब्ती किए जाने के कारण इस गाड़ी से कोई आमदनी नहीं कर सके। 18 महीने से अधिक का समय बीत गया। हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और याचिकाकर्ता को हुए नुकसान को देखते हुए मनमानी कार्रवाई के मुआवजे के रूप में दो लाख रुपए का हर्जाना देना उचित होगा। हाई कोर्ट ने यह फैसला बागपत के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित जब्ती आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गुरफान अली दलीलें पेश कीं।
इस याचिका में मेरठ मंडल के आयुक्त द्वारा याचिकाकर्ता की अपील खारिज किए जाने को भी चुनौती दी गई थी। यह तर्क दिया गया कि इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि वाहन में गोमांस का ले जाया जा रहा था। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अपने दावे को साबित करने का भार राज्य पर है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की कि गौ संरक्षण कानून के तहत किसी वाहन को तभी जब्त किया जा सकता है जब यह पाया जाए कि उसमें गोमांस ले जाया जा रहा था। कोर्ट ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश गौहत्या निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए एक अधिकृत प्रयोगशाला की रिपोर्ट अनिवार्य है।
पीठ ने माना कि यह साबित करने का भार राज्य पर है कि याचिकाकर्ता के वाहन से जब्त किया गया मांस गोमांस था, लेकिन 18 अक्टूबर 2024 की मांस परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किया गया मांस गाय या उसके उपवंश का होने का संदेह था। मांस की जांच बागपत स्थित पशु चिकित्सालय में की गई, लेकिन परीक्षक मांस के स्रोत के बारे में आश्वस्त नहीं थे। इसी वजह से उन्होंने मांस के नमूनों के पुष्ट निदान का अनुरोध किया, लेकिन इस संबंध में कोई रिपोर्ट रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
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Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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