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अब कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामर भर्ती की जांच, निशाने पर इस विभाग में हुईं नियुक्तियां

अब कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामर भर्ती की जांच, निशाने पर इस विभाग में हुईं नियुक्तियां

संक्षेप:

अभ्युदय कोचिंग में कोर्स कोआर्डिनेटर भर्ती के मामले में गड़बड़ी के चलते अब कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रोग्रामर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती की भी जांच होगी। इसमें मुख्य रूप से देखा जाएगा कि नियुक्तियां योग्यता के अनुसार हुई हैं या नहीं।

Jan 10, 2026 08:21 am ISTYogesh Yadav लखनऊ, प्रमुख संवाददाता
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मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत संचालित कोचिंग में कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती के मामले ने आउटसोर्सिंग कंपनियों का खेल उजागर किया है। इसे लेकर मंत्री असीम अरुण सख्त हो गए हैं। अब आउटसोर्सिंग पर रखे गए 460 कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रोग्रामर व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती की भी जांच होगी। इसमें देखा जाएगा कि इन लोगों की नियुक्तियों में योग्यता को नजरंदाज तो नहीं किया गया है। इसे लेकर समाज कल्याण विभाग की ओर से जांच के लिए पत्र लिखा गया है।

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यह भर्तियां आश्रम पद्धति स्कूलों, अभ्युदय कोचिंग और छात्रवृत्ति योजना के साथ ही मंडलीय कार्यालयों में आईटी के कार्यों इत्यादि के लिए की गईं हैं। अब यह देखा जाएगा कि पदों पर भर्ती के लिए जो अर्हता निर्धारित थी, उसके अनुसार ही पदों पर चयन किया गया या नहीं। पद पर भर्ती के लिए जो प्रक्रिया तय की गई थी, उसका पालन किया गया या नहीं। जो कमेटियां गठित की गईं थी, उन्होंने सख्ती से नियमों का पालन कराया या नहीं।

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कंप्यूटर ऑपरेटर के 300 पदों, मल्टी टॉस्क सर्विसेज (एमटीएस) के 150 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों और 10 कंप्यूटर प्रोग्रामर रखे गए थे। कंप्यूटर ऑपरेटर को 18 हजार रुपये प्रति महीने मानदेय, कंप्यूटर प्रोग्रामर को 60 हजार रुपये तक मासिक मानदेय और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को 10 हजार रुपये तक मासिक मानदेय दिया जा रहा है। वहीं कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) इत्यादि अलग से दिया जाता है। फिलहाल, समाज कल्याण विभाग अब आउटसोर्सिंग पर हुईं सभी भर्तियों के दस्तावेज खंगाल रहा है।

अभ्युदय कोचिंग में कोर्स कोआर्डिनेटर के 69 पदों पर आउटसोर्सिंग पर हुई भर्ती में से 48 अयोग्य अभ्यर्थियों की भर्ती की गई। पद पर भर्ती के लिए पीसीएस मुख्य परीक्षा पास होना अनिवार्य था लेकिन अर्हता को ताक पर रखकर अयोग्य लोगों को कोर्स कोआर्डिनेटर बना दिया गया। दो साल तक यह 60 हजार रुपये प्रति महीना मानदेय भी लेते रहे। अब भर्ती में गड़बड़ी सामने आने के बाद आउटसोर्सिंग पर विभाग में विभिन्न पदों पर हुई भर्ती की जांच की जाएगी।