
किसी ने फैसला सराहा तो किसी ने टिप्पणी से किया इनकार
Rampur News - सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने पूरी तरह से रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन कुछ विवादित धाराओं पर रोक लगाई है। नेताओं ने कहा कि सरकार बिना मुस्लिमों की सहमति के...
रामपुर। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ कानून को लेकर अपना अहम फैसला सुनाया है। हालांकि, अदालत ने इस कानून पर पूरी तरह से रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पूरे कानून को स्टे करने का कोई आधार नहीं है। कुछ सेक्शन पर विवाद है, इसको लेकर कोर्ट आगे की सुनवाई कर रही है। वक्फ कानून को लेकर अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने कहा कि सरकार बिना मुस्लिमों की सहमति के बिल पास कर देती है। वहीं सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने इस फैसले को स्वागत करने योग्य बताया। वहीं राजनीतिक जानकारों ने कहा कि कहा कि संसद की विधायी शक्ति वैध है, लेकिन वह मौलिक अधिकारों से टकराने वाले उपबंधों को स्थगित कर सकती है।
इस तरह निर्णय ने सरकार की पारदर्शिता की मंशा और मुस्लिम पक्ष की धार्मिक स्वतंत्रता-दोनों के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है। जहां तक संभव हो वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुस्लिम होना चाहिए। साथ ही न्यायालय ने गैर-मुस्लिम को सीईओ नियुक्त करने संबंधी संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट का फैसला धार्मिक स्वतंत्रता-दोनों के बीच संतुलन बनाने बाला है। - मौलाना मोईन अख्तर हमदानी, अध्यक्ष- तहरीक-ए-गरीब नवाज अल हिंद सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून को पूरी तरह रद्द नहीं किया, बल्कि कुछ विवादित प्रावधानों जैसे पांच वर्षों तक इस्लाम पालन की शर्त और कलेक्टर को संपत्ति तय करने का अधिकार निलंबित कर दिया। सरकार की पारदर्शिता की मंशा और मुस्लिम पक्ष की धार्मिक स्वतंत्रता-दोनों के बीच संतुलन साधा। - डा. मोहम्मद नासिर , असिस्टेंट प्रोफेसर-राजनीतिक विज्ञान, रजा डिग्री कॉलेज रामपुर -हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की भावना से काम हो रहा है। यह निर्णय राष्ट्र की एकता व अखंडता को और सुदृढ़ बनाएगा। -हरीश गंगवार, जिलाध्यक्ष भाजपा सरकार संसद की बिना सहमति के बिल पास कर देती है। जिनके लिए कानून बना रहे हैं, कम से कम उनसे तो सहमति ली जाए। बिल किसानों के लिए बनाते हैं मगर उनसे सहमति नहीं लेते। मुस्लिमों के लिए बिल बनाते हैं मगर उनसे सहमति नहीं लेते हैं। -प्रमिल कुमार शर्मा, उर्फ निक्कू पंडित, जिलाध्यक्ष कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हम स्वागत करते हैं। केंद्र सरकार के द्वारा वक्फ कानून जो बनाया गया था, वह जनहित में नहीं था। किसी भी कानून को बनाने से पहले जनहित का ख्याल हमेशा रखा जाता है। केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया। - प्रमोद निरंकारी, जिलाध्यक्ष बसपा हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज वक्फ कानून की कुछ धाराओं पर लगाई गई अंतरिम रोक का हार्दिक स्वागत करते हैं। यह फैसला संविधान की आत्मा, नागरिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की दिशा में एक साहसिक और संतुलित कदम है। मुईन पठान, प्रदेश महासचिव, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग)

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