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ऋतुराज वसंत के स्वागत को तैयार हुआ रामपुर

हिन्दुस्तान टीम,रामपुरPublished By: Newswrap
Mon, 15 Feb 2021 11:11 PM
ऋतुराज वसंत के स्वागत को तैयार हुआ रामपुर

सरसों खेतों में उठी फूल, बौरें आमों में उठी झूल, बेलों में फूले नए फूल, पल में पतझड़ का हुआ अंत, आया वसंत, आया वसंत... कवि सोहनलाल द्विवेदी ने बसंत की खूबसूरती इन पंक्तियों में बखूबी बयां की है। बसंत यानी प्रेम, उल्लास और उमंग का माहौल। बसंत के आने पर ना केवल प्रकृति बल्कि हर व्यक्ति इस के रंग में सराबोर दिखता है।

माघ माह की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन से शरद ऋतु की विदाई और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। बसंत को यूं ही ऋतुओं का राजा नहीं कहा जाता। ये मौसम का यौवन काल है। जिस तरह यौवन मनुष्य के जीवन में बसंत काल है, उसी तरह बसंत प्रकृति का यौवनकाल है। इस समय प्रकृति अपने अप्रतिम सौन्दर्य को लेकर इठलाती है। इसके आने से सर्दी की विदाई और गर्मी के आने की आहट सुनाई देने लगती है।

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ऐसे हुआ मां सरस्वती का अवतार

16 फरवरी को वसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाएगा। इस अवसर पर मां सरस्वती की आराधना की जाती है। मां सरस्वती की आराधना करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है। मां सरस्वती को ज्ञान की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। वसंत पंचमी के स्वागत के लिए लोगों में भारी उत्साह भी देखने को मिल रहा है। मान्यता है कि माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती ब्रह्माजी के मुख से प्रकट हुईं थी। इसीलिए इस तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। ज्ञान की देवी होने और इस तिथि को प्रकट होने की वजह से मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

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बसंत पंचमी को पीले रंग का है बहुत महत्व

इस दिन के लिए पीले रंग का विशेष महत्व माना गया है। वसंत पंचमी के दिन पीले फूल, पीले मिष्ठान अर्पित करना शुभ माना जाता है।माना जाता है कि भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है।

इस दिन पीले वस्त्र पहनने और भेंट करने चाहिए। इस दिन लोग सुबह उठाकर स्नान करते हैं।इसके बाद शिक्षा से जुड़ी चीजों की पूजा करते हैं. इस दिन जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।साथ ही साथ मां सरस्वती की आरती की जाती है।

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कैसे करें मां सरस्वती का पूजन

मां सरस्वती की पूजा के दौरान विशेष रूप से दूध, दही, मक्खन, धान का लावा, तिल के लड्डू, गन्ने का रस, पका हुआ गुड़, चंदन, शुद्ध घी, अदरक, सफेद धान के अक्षत, श्वेत चंदन, पीला वस्त्र, शर्करा, नारियल, श्रीफल, बदरीफल, गुलाल आदि का इस्तेमाल किया जाता है।

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वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त

श्री ज्वाला जी ज्योतिष सेवा केंद्र के आचार्य पंडित नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि 16 फरवरी को सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि आरंभ होगी और इसका समापन 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर होगा।

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फागोत्सव होगा शुरू

बसंत पंचमी से फागोत्सव की शुरुआत हो जाती है। मंदिरों में भगवान को पीत वस्त्र धारण कराए जाते हैं वहीं चंग की थाप पर फाग गीत शुरू हो जाते हैं। अबीर और गुलाल उडऩे लगता है। यह क्रम होली तक जारी रहेगा। इसके अलावा विवाह मुहूर्त के अलावा गृह प्रवेश आदि शुभ कार्यों के लिए भी ये दिन श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसे में इस दिन खूब विवाह होते हैं।

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चिकित्सकीय दृष्टि से बसंत देता है शरीर को स्फूर्ति

वसंत शरीर को स्फूर्ति, मन में उल्लास और प्रकृति में नवीनता देता है। शहर के चिकित्सक डॉ वी वी शर्मा ने बताया वसंत से होली के बीच मौसम परिवर्तन का शरीर पर असर पड़ता है। सर्दी की विदाई होने से और गर्मी की दस्तक दीदी से वातावरण में तापमान बढ़ जाता है। जिससे शरीर में स्फूर्ति आ जाती है। शरीर में फुर्ती आने पर मस्तिष्क में मेलेनिन नामक पदार्थ सक्रिय हो जाता है। जिससे मन में उमंग आ जाती है।

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बसंत पंचमी पर होंगे विभिन्न संस्कार

बसंत पंचमी पर विद्यारंभ संस्कार, पट्टी पूजन संस्कार होंगे। जिला ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष पंडित संजय शर्मा ने बताया कि हिंदू परंपरा में चार पांच साल के बच्चे का विद्यारंभ संस्कार होता है। नए कपड़े पहना कर पाटी पुजाई कराई जाती है।बसंत पंचमी के दिन शिशुओं को पहला अक्षर सिखाया जाता है। सरस्वती पूजन के दौरान कॉपी, किताब तथा पेंसिल-पेन का स्पर्श कराया जाता है। भारतीय संगीत, साहित्य और कला में बसंतु ऋतु का महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत में एक विशेष राग बसंत के नाम पर बनाया गया है जिसे राग बसंत कहते हैं।

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बसंत पंचमी पर इन संस्कारों की रहेगी धूम

नामकरण, मुंडन, छेदन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह, गृहप्रवेश, प्रतिष्ठान उद्घाटन समेत शुभ काम के लिए वसंत पंचमी महामुहूर्त है।

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हर गली मोहल्ले में गूंज उठी शहनाई

वसंत पंचमी को किसी भी शुभ कार्य को किया जा सकता है। इसके लिए कोई भी मुहूर्त नहीं देखा जाता। मंगलवार को शहर में करीब 300 से ज्यादा विवाह समारोह हैं। शहर का कोई भी विवाह मंडप मैरिज हाल लोन होटल रिसोर्ट आदि खाली नहीं है। यही स्थिति हलवाई और बैंड वालों की है। बसंत पंचमी पर शहर में विवाह की धूम मची रहेगी।

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