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23 जुलाई, 2020|10:11|IST

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विवि जमीन प्रकरण में जौहर ट्रस्ट को नोटिस

विवि जमीन प्रकरण में जौहर ट्रस्ट को नोटिस

शर्तों का उल्लंघन कर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन अधिग्रहीत कराने के मामले में प्रशासन ने जौहर ट्रस्ट को पुर्नग्रहण का नोटिस जारी किया है। इस मामले की सुनवाई 31 जुलाई को होगी।

जौहर यूनिवर्सिटी के लिए तमाम जमीनों का अधिग्रहण सपा शासन में कराया गया था,लेकिन सरकार बदलने के बाद से सपा सांसद आजम खां की मुश्किलें बढ़ गई और तमाम फर्जीवाड़ा करने के आरोप उन पर लगे हैं। फिलहाल सपा सांसद परिवार समेत इन दिनों सीतापुर जेल में हैं। प्रशासन जौहर ट्रस्ट को आवंटित जमीनों पर कब्जा भी ले चुका है। इस वक्त जौहर यूनिवर्सिटी में कोविड केयर सेंटर अस्पताल चल रहा है। प्रशासन की ओर से जौहर ट्रस्ट को आवंटित जमीनों की जांच का काम एसडीएम सदर ने किया था। तत्ताकालीन एसडीएम ने जौहर ट्रस्ट को आवंटित की गई जमीन की जांच की थी तो उस जांच में कई खुलासे हुए थे। आरोप है कि सपा सांसद आजम खां ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए सपा शासन में जौहर ट्रस्ट के नाम पर जमीन ली थी। इस जमीन को लेते वक्त शासन की ओर से उस वक्त स्टांप शुल्क भी इस शर्त के साथ माफ किया गया था कि जौहर ट्रस्ट की ओर से ली गई जमीन पर चैरिटेबिल के कार्य होंगे। जांच रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट की इस जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी तामीर हो चुकी है। मगर, पिछले दस सालों में चैरिटेबिल का कोई कार्य न होने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में यह भी बात कही गई है कि ट्रस्ट को एक सीमा के तहत ही जमीन आवंटित की जा सकती है,लेकिन नियम कायदों का उल्लंघन कर जमीन दी गई। जांच रिपोर्ट में एसडीएम सदर ने जौहर ट्रस्ट को दी गई 160 एकड़ जमीन वापस लेने की संस्तुति की थी, जिस पर डीएम ने एडीएम कोर्ट में वाद दायर कराया था। इस मामले में अब जौहर ट्रस्ट को नोटिस जारी किया गया है। एडीएम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 31 जुलाई को होगी।

जौहर ट्रस्ट की जमीन की जांच में यह बात सामने आई थी कि ट्रस्ट ने जमीन मिलने के बाद से कोई भी चैरिटेबिल कार्य नहीं किया है। साथ ही एक 12,50 एकड़ जमीन से ज्यादा जमीन का आवंटन भी कराया गया है। साथ ही स्टांप शुल्क भी माफ करा लिया गया था। इस मामले में ट्रस्ट को नोटिस जारी किया गया है।

आन्जनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी

नियम कायदों को ताक में रखकर ली गई थी जमीनें

रामपुर। सपा सांसद आजम खां ने सपा शासन में नियम कायदों को ताक में रखकर जौहर ट्रस्ट के लिए जमीने ली थीं। अब प्रशासन ने नियम कायदों का हवाला देते हुए ट्रस्ट की जमीनों को वापस लेने के लिए कवायद शुरू कर दी है।

सपा सांसद आजम खां की मुश्किले कम होती नजर नहीं आ रही है। सपा शासन में जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण कराया गया था। जौहर ट्र्स्ट की ओर से संचालित यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए शासन से सीलिंग नियम के तहत जमीनें ली गई थी। अब इन जमीनों पर संकट गहराने लगा है। प्रशासन ने ट्रस्ट को आवंटित जमीनों की जांच पूरी करने के बाद इस मामले में वाद दायर कर लिया है। जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक अफसरों के मुताबिक जौहर ट्रस्ट को सीलिंग एक्ट के तहत जमीनों का आवंटन किया गया था। मगर, नियमानुसार किसी भी व्यक्ति को साढ़े 12 एकड़ से ज्यादा जमीन लेने का कोई अधिकार नहीं होता है,लेकिन सपा शासन में जौहर ट्रस्ट को साढ़े 12 के बजाए इससे ज्यादा जमीन दी गई। इसके अलावा ट्रस्ट की ओर से संचालित यूनिवर्सिटी की ओर से पिछले दस साल में कोई भी लोकहित का कार्य नहीं किया गया। लिहाजा अब इस जमीन पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

सीलिंग के क्या हैं नियम

कोई भी व्यक्ति साढ़े 12एकड़ से ज्यादा जमीन अपने नाम नहीं रख सकता।

विशेष परिस्थिति में ही ट्रस्ट या फिर संस्था लोक हित में काम करती है तो जमीन साढ़े 12 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीद सकती है।

यदि कोई संस्था साढ़े 12 एकड़ से ज्यादा जमीन लेती है तो उसे डीएम की अनुमति इस आधार पर लेनी होगी कि संस्था लोक हित में कार्य कर रही है।

स्टांप शुल्क माफी के नियम

यदि कोई निजी यूनिवर्सिटी जमीन अधिग्रहण लेती है तो उसे पूरा स्टांप शुल्क देना होगा।

सरकारी यूनिवर्सिटी को ही स्टांप शुल्क में छूट मिल सकती है क्योंकि उसका कुलाधिपति प्रदेश का राज्यपाल होता है।

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  • Web Title:Notice to Johar Trust in University land case