मनरेगा: लक्ष्य से 139% अधिक मिला काम, 39.96 लाख मानव दिवस सृजित
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में रोजगार सृजन में 139% लक्ष्य हासिल किया है। 39.96 लाख मानव दिवस सृजित हुए, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 27.93% और अनुसूचित जातियों की 19.22% रही। 0.96 लाख ग्रामीण परिवारों को औसतन 41 दिन का काम मिला है।

रामपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। लक्ष्य से 139% अधिक को काम मिला है, वहीं 39.96 लाख मानव दिवस सृजित किए गए। ग्राम्य विकास विभाग के तहत मार्च 2026 तक जनपद रामपुर में रोजगार सृजन का आंकड़ा अपने निर्धारित लक्ष्य को मीलों पीछे छोड़ गया है। वित्तीय वर्ष के लिए तय 28.60 लाख मानव दिवस के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष मार्च 2026 तक 39.96 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया, जो लक्ष्य का शानदार 139.72 प्रतिशत है। इस अवधि में कुल 0.96 लाख (96 हजार) ग्रामीण परिवारों को रोजगार से जोड़ा गया, जिससे समावेशी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकत मिली है।
महिलाओं और अनुसूचित जाति की मजबूत भागीदारी
योजना के तहत समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने पर खास जोर दिया गया है। कुल सृजित रोजगार में महिलाओं की भागीदारी 27.93 प्रतिशत रही है। मार्च 2026 तक महिलाओं के लिए 11.16 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया। वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग की हिस्सेदारी 19.22 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसके तहत 7.68 लाख मानव दिवस सृजित हुए। हालांकि, इन आंकड़ों में अनुसूचित जनजाति के खाते में कोई कार्य दिवस दर्ज नहीं हुआ है।
प्रति परिवार औसतन 41 दिन का काम
मनरेगा का मूल उद्देश्य प्रत्येक इच्छुक वयस्क सदस्य वाले ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी देना है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जिले में रोजगार पाने वाले 0.96 लाख परिवारों को औसतन 41.63 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इस दौरान रोजगार की निरंतरता चाहने वाले 2823 परिवार ऐसे रहे जिन्होंने अपने 100 दिवस का रोजगार सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो आजीविका सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद सकारात्मक संकेत है।
130 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च
सीडीओ गुलाब चंद्र के अनुसार रोजगार के इन रिकॉर्ड आंकड़ों के साथ-साथ वित्तीय प्रगति भी उल्लेखनीय रही है। मार्च 2026 तक इस योजना के तहत 130.51 करोड़ रुपये की धनराशि ग्रामीण विकास और मजदूरी पर खर्च की जा चुकी है। वर्तमान समय में मनरेगा के तहत श्रमिकों को 252.00 रुपये की दैनिक अकुशल मजदूरी दी जा रही है।
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