शासन में लटकी 300 ई-व्हीकल स्वामियों की सब्सिडी
रामपुर में सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए दी जा रही सब्सिडी का लाभ वाहन मालिकों को नहीं मिल पा रहा है। बजट की कमी के कारण लाखों रुपये खर्च करने वाले उपभोक्ता ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। विभाग ने शासन को बजट के लिए पत्र भेजा है, लेकिन सब्सिडी का रास्ता अभी भी साफ नहीं है।

रामपुर। बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दे रही है। सरकार का दावा है कि ई-वाहन खरीदने पर उपभोक्ताओं को भारी छूट और सब्सिडी दी जाएगी, ताकि लोग पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों को छोड़कर पर्यावरण अनुकूल वाहनों की तरफ रुख करें। लेकिन, जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले में सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना बजट के अभाव में दम तोड़ती दिख रही है। हालत यह है कि वाहन मालिकों का बजट तो ई-वाहन खरीदने में लग गया, लेकिन सरकार का बजट खाली होने की वजह से उन्हें मिलने वाली सब्सिडी का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, अकेले रामपुर जिले में करीब 300 से अधिक वाहन स्वामी ऐसे हैं, जिन्होंने सरकार की सब्सिडी नीति पर भरोसा करके लाखों रुपये खर्च कर इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया या चौपहिया वाहन खरीदे थे। वाहन पंजीकरण और सब्सिडी के लिए आवेदन किए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन आज तक इन उपभोक्ताओं के बैंक खातों में सब्सिडी की एक कौड़ी भी नहीं पहुंची है। वाहन मालिकों का कहना है कि उन्होंने ई-वाहन इसलिए चुना था क्योंकि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से राहत मिलेगी और सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी से गाड़ी की शुरुआती कीमत थोड़ी कम पड़ जाएगी। लेकिन अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने तो लोन लेकर गाड़ियां खरीदी थीं और अब वे सब्सिडी की रकम से लोन की किस्त चुकाने की उम्मीद लगाए बैठे थे, जो अब टूटती नजर आ रही है。
संभागीय परिवहन विभाग ने शासन को भेजा पत्र::
सब्सिडी न मिलने के कारण जब उपभोक्ताओं का दबाव और शिकायतें बढ़ने लगीं, तो स्थानीय संभागीय परिवहन विभाग ने इस मामले में संज्ञान लिया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनकी तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। स्थानीय स्तर पर स्क्रूटनी और दस्तावेजों के सत्यापन का काम पूरा कर लिया गया है। जबकि,शासन को बजट के लिए पत्राचार किया गया है।
दफ्तर की स्थिति::
-हमारे स्तर पर सब्सिडी से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। समस्या मुख्यालय स्तर पर बजट की अनुपलब्धता के कारण है। जिले के लंबित आवेदनों की पूरी सूची और आवश्यक बजट की मांग को लेकर शासन को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। जैसे ही शासन से बजट स्वीकृत होकर आएगा, सभी लाभार्थियों के खातों में सीधे राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
-राजेश कुमार श्रीवास्तव,एआरटीओ।
ई-वाहनों के बढ़ते ग्राफ के मुख्य कारण::
-पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें: पारंपरिक ईंधन की आसमान छूती कीमतों से आम आदमी का मासिक बजट बिगड़ रहा है।
-कम रखरखाव लागत : इलेक्ट्रिक वाहनों में इंजन न होने के कारण सर्विसिंग और मेंटेनेंस का खर्च बहुत कम आता है।
-पर्यावरण के प्रति जागरूकता: युवा वर्ग और जागरूक नागरिक वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


