खुद की गर्दन न फंसे, इसीलिए कर्मचारियों पर मड़ा दोष

खुद की गर्दन न फंसे, इसीलिए कर्मचारियों पर मड़ा दोष

संक्षेप:

Rampur News - हिन्दुस्तान फालोअपणाली को लेकर हैं। चर्चा है इस मामले में विभाग के अफसर ने खुद की गर्दन बचाने के लिए अपने कर्मचारियों पर ही कार्रवाई कर दी। शहर के कि

Nov 17, 2025 12:12 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रामपुर
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उद्यान विभाग में किसानों के लिए आए सरकारी बीज जलाने के मामले में हुई कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल जांच करने वाले अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर हैं। चर्चा है इस मामले में विभाग के अफसर ने खुद की गर्दन बचाने के लिए अपने कर्मचारियों पर ही कार्रवाई कर दी। शहर के किला परिसर स्थित उद्यान विभाग के कार्यालय के बाहर शुक्रवार को किसानों के लिए बंटने के लिए आए बीज के बोरे जला दिए गए थे। बताते हैं कि कुछ किसान नेताओं ने उद्यान विभाग में बीज घोटाले की शिकायत अधिकारियों से की थी। इसके बाद कार्रवाई से बचने के लिए बीज के बोरों को जला दिया था।

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डीएम ने मामले की जांच सीडीओ गुलाब चंद्र को सौंपी थी। चूंकि मामले की गंभीरता को देखते हुए यह जांच सीडीओ स्तर से की जानी थी मगर जांच को राजकीय अधीक्षक उद्यान द्वारा पूरा कराया गया। उन्होंने 24 घंटे के अंदर ही जांच को पूरा करते हुए अपने विभाग के कर्मचारी उद्यान निरीक्षक व दो अन्य कर्मचारियों को दोषी मानते हुए उन पर अनुशासनिक कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिख दिया। अब इसमें किसान नेताओं का आरोप है कि इस प्रकार के गंभीर प्रकरण की जांच जिला स्तरीय अधिकारियों को स्वयं करनी चाहिए थी। जिस विभाग में यह घटनाक्रम हुआ, उसके अध्यक्ष ने जांच में अपने कर्मचारियों पर ही दोष मड़ दिए और स्वयं को बचा लिया। इसीलिए उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। ---------- बोले किसान नेता, अधिकारी पर भी हो कार्रवाई भाकियू भानु के जिलाध्यक्ष सलीम वारसी का कहना है कि बीज जलाने के मामले में राजकीय अधीक्षक उद्यान अजय कुमार पर भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। उनके विभाग में किसानों को जो बीज बंटने आया था, वह कैसे और क्यों जला दिया गया। इसकी जिम्मेदारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की भी बनती है। उन्होंने कहा कि वह अधीक्षक उद्यान के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम और कमिश्नर को पत्र लिखेंगे। रखे-रखे एक्सपायर हो गया बीज, अधीक्षक को क्यों नहीं थी जानकारी बोरियों के रैपर पर एनएचडीआरएफ छपा हुआ था। उसकी उत्पादन तिथि 19 जून 2023 और एक्सपायर तिथि 18 मार्च 2024 अंकित थी। सवाल यह उठता है कि करीब डेढ़ साल पहले एक्सपायर हो चुके बीज को अगर कर्मचारी जला देते हैं तो इसकी जानकारी राजकीय अधीक्षक उद्यान को कैसे नहीं हुई। यह बीज डेढ़ साल पहले जब किसानों के लिए बंटने के लिए आया था तो उसे जलाने की नौबत क्यों आन पड़ी। इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए जब राजकीय अधीक्षक उद्यान से फोन पर बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।