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सरकारी पार्क की जमीन खरीदने में फंसे भाजपा नेता

हिन्दुस्तान टीम,रामपुरNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 10:40 PM
सरकारी पार्क की जमीन खरीदने में फंसे भाजपा नेता

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं जिला मीडिया प्रभारी राजीव मांगलिक सरकारी पार्क की जमीन खरीदने में फंस गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में उन पर रामपुर पार्क के नाम पर आरक्षित नॉन जेडए भूमि खरीदने का आरोप है। इसमें तत्कालीन सब रजिस्ट्रार की भूमिका भी संदिग्ध मानी गई है। डीएम ने इस मामले में एसडीएम सदर और तहसीलदार से रिपोर्ट तलब की है।

भाजपा नेता राजीव मांगलिक ने कुछ समय पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब स्थित शादीनगर के निकट अहमदनगर जागीर में भूमि खरीदी थी। इस भूमि की खरीद में उन पर 818317 रुपये का कम स्टांप का वाद डीएम कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में सुनवायी के दौरान जब पत्रावली पर सिटी मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट देखी तो डीएम के संज्ञान में आया कि उक्त भूमि सरकारी है और वह कुंवर अबीर हुसैन के पूर्वजों को 40 रुपये वार्षिक लगान पर खेती के लिए ठेके पर दी गई थी।

इसका इंद्राज अभिलेखों में बताया गया, जबकि यह जमीन प्रांतीय सरकार की नॉन जेडए भूमि है और इसके इंतजामियां जिलाधिकारी रामपुर हैं। यह रामपुर पार्क के नाम आरक्षित है। इस जमीन का बैनामा कराने का हक अबीर हुसैन का नहीं था फिर भी जमीन की खरीद-फरोख्त हो गई। इसमें दस्तावेज पंजीकृत कराने में संबंधित सब रजिस्ट्रार की भूमिका संदिग्ध पायी गई है। अब डीएम ने इस मामले में एसडीएम सदर और तहसीलदार सदर से 15 दिन में रिपोर्ट तलब की है।

साल भर पहले दर्ज हुआ था मुकदमा

तत्कालीन डीएम आन्जनेय कुमार के आदेश पर बीते वर्ष सितंबर में लेखपाल सत्येन्द्र प्रकाश शर्मा ने सिविल लाइंस कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें जमीन भाजपा नेता राजीव मांगलिक पर खरीदने का आरोप था। जिसमें तहसील सदर के तत्कालीन सब रजिस्ट्रार, राजद्वारा निवासी अतुल कपूर, आवास विकास कालोनी निवासी सोनू अग्रवाल, राहिला तहजीब पत्नी तहजीब हुसैन और उनके परिवार के अबीर हुसैन, अनम हुसैन, आमरा हुसैन निवासी रामपुर फीलिग स्टेशन को नामजद किया गया था। मालूम हो कि अतुल कपूर और सोनू अग्रवाल जमीन की खरीद में गवाह हैं।

प्रशासन की लापरवाही से बिक रही सरकारी जमीन

रामपुर में यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई मामले इस तरह के प्रकाश में आ चुके हैं। इसमें प्रशासन की लापरवाही से सरकारी जमीनों पर पहले अवैध तरीके से कब्जे होते हैं और फिर उनकी खरीद-फरोख्त होती है। वर्तमान में भी कई ऐसी सरकारी जमीनें हैं जो अभिलेखों में राज्य सरकार के नाम दर्ज हैं, लेकिन एक ही प्रॉपर्टी के कई-कई दावेदार कागजात लिए घूमते हैं। आए दिन इन संपत्तियों को लेकर हंगामें होते हैं, टकराव की स्थिति सामने आती है। इसमें प्रशासन का ढुलमुल रवैया सामने आता है।

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