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सावधान! मिनरल वाटर के नाम पर हो रहा सेहत से धोखा

यह खबर पढ़ने के बाद सावधान हो जाइए। आप मिनरल वाटर समझकर जो पानी पी रहे हैं वह अशुद्ध और सादा पानी है। शहर से लेकर गांवों तक बिना लाइसेंस पानी का...

सावधान! मिनरल वाटर के नाम पर हो रहा सेहत से धोखा
हिन्दुस्तान टीम,रामपुरWed, 15 May 2024 12:00 AM
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यह खबर पढ़ने के बाद सावधान हो जाइए। आप मिनरल वाटर समझकर जो पानी पी रहे हैं वह अशुद्ध और सादा पानी है। शहर से लेकर गांवों तक बिना लाइसेंस पानी का कारोबार चल रहा है। पानी का भी धड़ल्ले से दोहन हो रहा है।
वैसे तो पानी पिलाना पुण्य माना जाता है, लेकिन अब यही पानी पुण्य के बजाए कारोबार बन गया है। ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में कारोबारी न तो शुद्धता और न ही मानक का ख्याल रख रहे हैं। अधिकतर कारोबारियों के पास न भूगर्भ जल विभाग की एनओसी और न ही ब्यूरो आफ इंडिया स्टैंडर्ड से जारी बीआईएस मार्क की प्रमाणिकता है। शहर ही नहीं गांवों में भी कैंम्पस में भरकर ठंडे पानी की सप्लाई की जा रही है। अधिकतर लोग इसे मिनरल वॉटर समझकर खरीद रहे हैं। यह सिर्फ फिलटर कर फ्रीजर से तैयार पानी जरूर होता है।

इन स्थानों पर चल रहे वाटर प्लांट

रामपुर शहर, अजीतपुर, पटवाई, सैफनी, शाहबाद, मिलक, स्वार, बिलासपुर, चमरौआ, सैदनगर,दढ़ियाल, मसवासी, केमरी।

अशुद्ध पानी पीने से होने वाली बीमारियां

मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, दिमागी बुखार, पेचिश, टायफाइड, पीलिया, हैजा, पेट की कई बीमारियां

यह है पानी की शुद्धता का मानक

पानी में फ्लोराइड की मात्रा एक मिलीग्राम प्रतिलीटर होनी चाहिए। जबकि रामपुर के कई इलाकों में इसकी मात्रा तीन से छह मिलीग्राम प्रति लीटर है। आर्सेनिक की भी मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

पानी में प्लोराइड की मात्रा अधिक होने से हड्डियां कमजोर होने के साथ गौस्ट्रिक कैंसर जैसी बीमारी का भी खतरा मंडराने लगता है। दांत भी पीले पड़ने लगते हैं। इसलिए पानी की समय- समय पर जांच और अशुद्ध पानी से बचना चाहिए।

डा. जावेद अली, हड्डी रोग विशेषज्ञ

पानी का भी हो रहा खूब दोहन

फैक्ट्री, होटल और वाटर प्लांट में बोरिंग के लिए भूगर्भ जल विभाग से एनओसी लेनी जरूरी है। लेकिन, अधिकतर बिना एनओ वाटर प्लांट चल रहे हैं। प्रति प्लांट में रोजाना कई हजार लीटर पानी निकालकर बेचा जाता है। जबिक पानी के अधिक दोहन से पांच ब्लाक डार्क जोन में जा चुके है। हालांकि अब सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में आ गए हैं।

बोरिंग के लिए भूगर्भ जल विभाग से एनओसी लेनी जरूरी है। इसके बाद भी बोरिंग किया जा सकता है। यह नियम वाटर प्लांट पर भी लागू होता है। इसलिए बोरिंग से पहले विभाग से एनओसी लें।

रामऔतार, अवर अभियंता लघु सिंचाई

पैकिंग पानी के नमूने लेकर जांच की जाती है। लेकिन, इस साल अभी तक कोई नमूना नहीं लिया। शीघ्र अभियान चलाकर पानी के नमूने लिए जाएंगे। वाटर प्लांट संचालकों को भी खुले पानी की भी प्राइवेट या सरकारी लैव पर जांच करानी चाहिए। उनका विभाग इसमें पूरा सहयोग करेगा।

सुनील कुमार शर्मा, सहायक आयुक्त/खाद्य अभिहीत अधिकारी

अशुद्ध पानी से लीवर खराब होने का खतरा रहता है। हेपेटाइस बी,पलिया, किडनी में पथरी भी हो सकता है।स्वस्थ रहने के लिए रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन पानी का इस्तेमाल करें।

डा. कुलदीप चौहान, आयुर्वेद/ मनोचिकित्सक

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