राम मंदिर दान चोरी: आरोपियों के 20 करीबियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक, CEO की नियुक्ति की तैयारी
Ram mandir News: राम मंदिर दान चोरी प्रकरण की जांच जोरशोर से जारी है। इस बीच दान चोरी मामले में पकड़े गए आठों आरोपियों के करीबियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगा दी गई है। उधर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी है।

Ram Mandir Controversy: अयोध्या के श्री राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में विवेचना के दौरान हो रहे खुलासों के बीच आठों आरोपियों के संपर्क में रहे करीब 20 लोगों के जिला छोड़ने पर रोक लगा दी गई है। पचास से अधिक को नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने प्रकरण से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की। इस दौरान उनके बयान दर्ज कर आरोपियों से उनके संबंधों की जानकारी जुटाई गई। इस बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सीईओ की नियुक्ति की तैयारी में है। तय हुआ है कि ट्रस्ट अपने पैसे पर सीईओ की नियुक्ति करेगा। सीईओ को ट्रस्ट से सैलरी मिलेगी। छह जुलाई की बैठक में ट्रस्ट ने सीईओ चयन के लिए तीन सदस्यों रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े की कमेटी बना दी है। यह सभी अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। कमेटी ट्रस्ट को तीन नाम सौंपेगी। अगली बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम पर चर्चा हो सकती है।
आरोपियों के करीबियों से मिली जानकारियों का मिलान कर रही पुलिस
उधर, आरोपियों के करीबियों से मिली जानकारियों का मिलान पुलिस आरोपियों से पूछताछ में सामने आए तथ्यों, कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों से कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की अलग-अलग टीमें सूची में शामिल लोगों को फोन या दूसरे माध्यमों से सूचना देकर पूछताछ को बुला रही हैं। उनसे आरोपियों से संबंध, लेन-देन, मुलाकातों और बाद की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी मांगी जा रही है। अधिकांश को जांच तक पुलिस के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
रिकार्ड में आई रकम से पहले की चोरी का हिसाब नहीं
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की रकम को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। अब तक की जांच में सामने आया कि गणना से पहले कितनी रकम चोरी हुई, उसका हिसाब लगाना मुश्किल है। अब तक हुई नगद बरामदगी, संपत्ति के रिकार्ड, जेवर, आभूषण से ही आकलन किया जा सकता है कि कितनी रकम चोरी हुई होगी। क्योंकि गणना के बाद बैंक पहुंची रकम के हर पैसों का हिसाब है। चोरी गणना के दौरान या पहले ही की गई। इस नाते बरामद रकम के अलावा केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है।
एसआईटी और पुलिस की अब तक की जांच में साफ हुआ कि चढ़ावा की चोरी गणना के दौरान या कैश हैंडलिंग के दौरान हुई। जितनी रकम बैंक पहुंच गई, उसका पूरा हिसाब है। इस नाते यह अनुमान ही लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने कितने की चोरी की होगी। सीसीटीवी फुटेज में भी गणना कर्मचारी नोट और गड्डी छिपाते दिखे। यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी रकम चोरी की। यह भी सटीक तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि यह चोरी कब से चल रही थी। अब तक कितनी रकम चोरी गई होगी। बरामद नगदी को ही चोरी की रकम माना जा सकता है। इसके अलावा आरोपियों के पास से मिले वाहन, इलेक्ट्रानिक्स गैजेट्स, संपत्ति के कागज तथा आभूषण से यह माना जा सकता है कि चढ़ावे की रकम से यह सब जुटाई गई। जांच से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि जितनी रकम और संपत्ति मिल जाती है, उसे ही चोरी की रकम माना जा सकता है। इस अधिकारी के मुताबिक हम मुकम्मल तौर पर यह नहीं कह सकते कि कितने की चोरी की गई है। फिलहाल, जांच चल रही है। एसआईटी अपनी जांच कर रही है और पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
चढ़ावा प्रकरण की सुनवाई 13 जुलाई को
वहीं, सुप्रीम कोर्ट अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ सोमवार को इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
टिन्नू-सुभाष को कस्टडी रिमांड पर लेगी पुलिस
पुलिस अब आने वाले समय में टिन्नू और सुभाष को कस्टडी रिमांड पर लेगी। अब तक चार अन्य आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर ले पूछताछ हो चुकी है। टिन्नू और सुभाष से भी पुलिस पहले जेल में पूछताछ करेगी फिर कोर्ट से इनकी भी कस्टडी रिमांड मांगी जाएगी। पुलिस अविनाश, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश को रिमांड के दौरान मिले साक्ष्य और जानकारियों का सत्यापन कर रही है।
सीईओ को ट्रस्ट देगा सैलरी
चढ़ावा चोरी जैसे जघन्य अपराध के बाद दुनिया भर में जिस तरह ट्रस्ट की फजीहत हुई है, उसे देखते हुए बड़े बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। मंदिर की प्रशासनिक सहित सभी तरह की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने और संचालन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को जवाबदेह बनाने के लिए ट्रस्ट सीईओ की नियुक्ति करने जा रहा है। एक रिटायर्ड और अच्छी छवि के सनातनी अफसर की तलाश तेज कर दी गई है। सीईओ की तनख्वाह ट्रस्ट देगा। यह माना जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली बैठक में ट्रस्ट सीईओ के लिए चयनित तीन व्यक्तियों के नामों का पैनल रखेगा। इन पर चर्चा के बाद नए सीईओ के नाम का ऐलान हो सकता है। साथ ही ट्रस्ट में आमूल-चूल परिवर्तन किए जाएंगे। इसकी तैयारी भी तेज हो गई है। सीईओ को लेकर कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
चढ़ावा चोरी प्रकरण में जिस तरह एसआईटी ने कदम-कदम पर बरती गईं लापरवाहियों और गैरजिम्मेदाराना रवैये का उल्लेख रिपोर्ट में किया है, उससे ट्रस्ट के अस्तित्व पर सवालिया निशान लग गए हैं। पूरा विपक्ष एकजुट होकर ट्रस्ट को भंग करने की मांग पर अड़ा है। इस पूरे घटनाक्रम में ट्रस्ट की साख तार-तार हुई है। इसे दोबारा से प्रतिष्ठित करने के लिए ट्रस्ट में हर स्तर पर बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सीईओ की नियुक्ति के साथ ही ट्रस्टियों का दखल भी घटाया जाएगा ताकि कोई अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न कर सके। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्टी अनिल मिश्र द्वारा अपनी शक्तियों के दुरुपयोग का खुलकर उल्लेख किया गया है। ऐसे में ट्रस्ट अब फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। ट्रस्ट एवं मंदिर प्रशासन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा। ट्रस्ट नहीं चाहता है कि इसमें किसी तरह का सरकारी दखल हो। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी, ट्रस्टी और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के पराशरण ने इस मुद्दे पर लंबी चर्चा की है। फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जब ट्रस्ट बना था, तब उसके उपनियम पराशरण ने ही तैयार किए थे। माना जा रहा है कि ट्रस्ट इन प्रस्तावों को 22 जुलाई की बैठक में रखेगा।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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