राम मंदिर का CEO कैसा हो? डिग्री के साथ चाहिए कई खूबियां, शर्तें तय; ट्रस्ट देगा सैलरी- घर और सुविधाएं
Ram Mandir CEO News : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीईओ की योग्यता और उनसे अपेक्षाओं के मानक तय कर दिए हैं। सीईओ का ग्रेजुएट होना तो जरूरी है ही उनके पास कम से कम 20 साल का एडमिनिस्ट्रेटिव या फाइनेंशियल मैनेजमेंट का एक्सपीरिएंस होना चाहिए। कैंडिडेट का हिंदू होना भी जरूरी है।

Ram Mandir CEO News : राम मंदिर दान चोरी को लेकर रोज नई-नई बातें सामने आ रही हैं। इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य रहेगा। इसके साथ ही उसमें कई और खूबियां भी होनी चाहिए। तीन सदस्यीय समिति ने शुक्रवार को सीईओ की पात्रता के मानक तय कर दिए। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक अप्लाई कर सकेंगे। बताया गया है कि कैंडिडेट का ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके साथ ही उसके पास प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का एक्सपीरिएंस होना चाहिए। अभ्यर्थी का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी अनिवार्य शर्त है। नियुक्ति तीन वर्ष के लिए होगी।
ट्रस्ट देगा सैलरी, घर और अन्य सुविधाएं
सीईओ को वेतन, आवास ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी। एक तरह से यह वेतनभोगी कर्मचारी मंदिर के लिए समर्पित रहेगा। बताया जा रहा है कि वह तीर्थ क्षेत्र से वेतन प्राप्त करने वाला यह सीईओ पूरी तरह से न्यास के अधीन होगा। वह न्यास के प्रति उत्तरदायी होगा।
बैठक से पहले सीईओ का नाम तय होने की उम्मीद
ट्रस्ट की 22 जुलाई को होने वाली बैठक से पहले श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के सीईओ का नाम तय होने के आसार हैं। तीन सदस्यीय समिति ने काम शनिवार से शुरू कर दिया है। नई दिल्ली में हुई बैठक में सीईओ चयन के प्रक्रिया रूपरेखा पर विचार हुआ। उसके अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू होगी। गोविंद देव गिरी साफ कर चुके हैं कि 22 जुलाई के पहले समिति तीन नामों का प्रस्ताव ट्रस्ट को दे देगी।
22 की बैठक में उठ सकता है पुजारियों की नियुक्ति का मुद्दा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक में पुजारियों की भर्ती का मुद्दा भी उठ सकता है। मंदिर व्यवस्था के लिए 100 पुजारियों की भर्ती होनी थी, लेकिन अब तक 20 पुजारी ही काम कर रहे हैं। पुजारियों की भर्ती को लेकर कड़े नियम और शर्तों के कारण भी यह मामला अटका रहा। अब परकोटे में भी मंदिर बन चुके हैं तो पुजारियों की तैनाती भी जरूरी हो गई है। अगली बैठक में यह मुद्दा भी रखा जाएगा और कोई निर्णय लिया जा सकता है।
मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद तय किया गया था कि पूजा पाठ के लिए 100 पुजारियों की भर्ती होगी। सुप्रीम का फैसला आने के पहले से ही यहां मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास के नेतृत्व में पांच पुजारी व्यवस्था देख रहे थे। जब श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया तो पुजारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। पहले 20 पुजारियों की भर्ती की गई लेकिन कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद के कारण इसे रद्द करना पड़ा। मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास के गोलोकवासी होने के बाद चार पुजारी काम कर रहे थे। ट्रस्ट ने दोबारा 16 पुजारियों की भर्ती की और इन्हें छह महीने का प्रशिक्षण दिलाकर मंदिर की सेवा में तैनात किया। सत्येंद्र दास के बाद किसी को मुख्य पुजारी का दायित्व नहीं दिया गया।
मंदिर नियमावली के मुताबिक पुजारी के लिए अनिवार्य अर्हता रामानंदीय परंपरा से दीक्षित होना चाहिए। त्रिकाल संध्या का भी अनुभव हो। संस्कृत भाषा का ज्ञान होने के साथ ग्रंथों का पारायण करते समय उच्चारण की शुद्धता बनी रहे। पुजारी वैष्णव संप्रदाय से होना चाहिए। मंदिर के निर्माण का बड़ा हिस्सा लगभग पूरा हो चुका है। अब पुजारियों की संख्या भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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