चढ़ावा सुरक्षित रहने का सबूत मांगने वालों का दान लौटा सकता है ट्रस्ट, भेंट में मिली थीं ये वस्तुएं
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने पर दर्जनों दानदाताओं ने मीडिया में आकर कई गंभीर आरोप लगाए थे। ऐसे में ट्रस्ट अब ऐसे श्रद्धालुओं का समर्पण लौटाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। आरोप था कि उनकी दान की गई वस्तुओं की रसीद नहीं दी गई और राम मंदिर में भी उनका दिया गया दान नहीं रखा गया।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। जिन श्रद्धालुओं ने अपने दान की गई वस्तुओं की रसीद न मिलने और उन्हें मंदिर में प्रदर्शित या सुरक्षित न रखने के आरोप लगाए थे, उनके समर्पण को लौटाने पर ट्रस्ट गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
ट्रस्ट का मानना है कि श्रद्धालुओं के द्वारा राम मंदिर में वस्तुओं को रखने का आग्रह स्वीकार करने योग्य नहीं है, क्योंकि मंदिर के गर्भगृह में एक निश्चित स्थान है। यहां समय-समय पर उपयोगी वस्तुओं को रखकर ही उपयोग किया जाता है। पुनः यथास्थान पर सुरक्षित करा दिया जाता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा दी जाने वाली धातुओं का परीक्षण और उनकी शुद्धता परखे बिना कैसे रसीद दी जा सकती है। दानदाताओं द्वारा दी जाने वाली वस्तुओं की शुद्धता परखने पर उसकी मात्रा तय होती है, जबकि दानदाताओं को रसीद में निर्धारित तौर की रसीद धातु के रूप में ही स्वीकार की जाती है।
दान में मिली थी ये वस्तुएं
चढ़ावा चोरी के आरोप के साथ देश भर से विभिन्न श्रद्धालुओं ने अपने समर्पण के गायब होने का आरोप लगाया था। इसमें पूर्व गृह सचिव एस लक्ष्मीनारायण द्वारा समर्पित स्वर्ण मंडित श्रीरामचरित मानस, सिंधी समाज द्वारा 200 किलो चांदी की ईंटें, सराफा बंधुओं द्वारा लगभग 60 किलो चांदी, चांदी का कागभुसंडि, बहुमूल्य हार और चांदी की पादुका शामिल थीं। इन सभी बहुमूल्य चढ़ावे का हिसाब व सबूत न्यास ने छह जुलाई को विधिवत रूप से सार्वजनिक किया था। स्वर्ण मंडित श्रीरामचरित मानस, कागभुसंडि, बहुमूल्य हार और पादुका को मीडिया को दिखाया गया। चांदी की सिल्लियों को गलाकर उसे सुरक्षित रखने का सबूत भी सार्वजनिक किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में चढ़ावा प्रकरण पर दाखिल की गईं तीन याचिकाएं
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट हेराफेरी की लेकर सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें एक याचिका नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें चढ़ावा चोरी की सीबीआई जांच की मांग के अलावा मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों के कैग से ऑडिट कराने का भी आदेश देने की गुहार लगाई गई है। दूसरी याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दाखिल की है, जिसमें मामले की जांच के लिए सीबीआई की अगुवाई में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है ताकि मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच करनी चाहिए।
तीसरी याचिका राजद सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दाखिल की गई है जिसमें मंदिर ट्रस्ट के पूरे वित्तीय कामकाज के फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की है। याचिका में केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को ऐसे नियामक सुपरवाइजरी और ऑडिट सिस्टम बनाने और उन्हें लागू करने का आदेश देने की मांग की है जो लाखों भक्तों का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी हों।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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