राम मंदिर में टोटल रिकॉल; अखिलेश के चंदा चोरी आरोपों से सीईओ नियुक्ति तक ऐसे बदला नजारा
अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी के आरोपों को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों, चंपत राय के जवाब और अब सीईओ की नियुक्ति , यानी तीन महीने में यहां का पूरा नजारा ही बदल दिया है।

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान चोरी के समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों के बाद शुरू हुआ बवंडर सड़क से संसद तक पहुंचा। एसआईटी जांच हुई, चोरी में गिरफ्तारियां हुईं, ट्रस्ट में इस्तीफे हुए। पूरा प्रबंधन सीईओ को सौंपने का फैसला हो गया।ट्रस्ट के शीर्ष पदों पर बदलाव हुआ। 22 जुलाई की बैठक में मंदिर की प्रशासनिक, सुरक्षा और धार्मिक व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने के फैसले लिए गए। तीन माह में सबकुछ बदल गया। अब अनुशासन के लिए मशहूर भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा के हाथों व्यवस्था आ गई है।
4 जून : चोरी हुई नकदी बरामदगी से हलचल
चार जून को चढ़ावे की गणना के दौरान संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आई। एक कर्मचारी के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात सामने आई। पांच जून को एक वीडियो वायरल हुआ। बताया गया कि यह बाद में आरोपी बनाए गए गणना कर्मी अविनाश शुक्ल का था। वीडियो में उसे एक बैग के साथ ले जाते हुए दिखाया गया था। हालांकि मामला सार्वजनिक नहीं हुआ।
7 जून : सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया सवाल
सात जून को चढ़ावे में चोरी का मामला सार्वजनिक चर्चा में आया। स्थानीय नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे मुद्दा बनाया और मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल उठाए। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने पर शाम को तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने दान प्रबंधन की आंतरिक जांच और ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है। एक तरह से अखिलेश के आरोपों का खंडन कर दिया। इसके बाद भी अखिलेश पीछे नहीं हटे। चंपत राय पर ही सीधा हमला किया। एक के बाद एक आरोपों की बौछार होने लगी। चोरी हुए रुपयों की बरामदगी वाला पांच जून का वीडियो भी वायरल हो गया।
13 जून : सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय एसआईटी
विवाद बढ़ने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर शासन ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली टीम में लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन कुमार शामिल थे। एसआईटी ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका, रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू की। चंपत राय और मंदिर प्रशासन से जुड़े अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ हुई।
23 जून : एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कार्रवाई की सिफारिश
करीब एक सप्ताह की जांच के बाद 23 जून को एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी। विजय विश्वास पंत ने रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को दी। रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों की ओर इशारा करते हुए कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की गई। बाद की रिपोर्टों में सीसीटीवी निगरानी, तलाशी और गणना प्रक्रिया समेत कई व्यवस्थागत खामियों का उल्लेख सामने आया। जांच में कई मौकों पर चढ़ावे की रकम से छेड़छाड़ के साक्ष्य मिलने की बात भी रिपोर्ट हुई।
25 जून : कृष्ण मोहन की तहरीर पर केस दर्ज, आठों आरोपी गिरफ्तार
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें आठ लोगों को नामजद किया गया। आरोपों में चोरी, धन के गबन, आपराधिक विश्वासघात और साजिश जैसी धाराएं शामिल थीं। एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस ने रामशंकर यादव, मनीष यादव, अविनाश शुक्ल, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ मामला प्रशासनिक जांच से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के चरण में पहुंच गया।
26 जून : चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र का इस्तीफा स्वीकार
आठ गिरफ्तारियों और एसआईटी की रिपोर्ट के बाद अखिलेश यादव के आरोपों और दान चोरी पर एक तर ह से मुहर लग गई। ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल उठे। उन पर चौतरफा दबाव बढ़ गया। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इससे ट्रस्ट में प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव की जमीन तैयार हुई।
6 जुलाई : ट्रस्ट की बैठक में बड़ा प्रशासनिक बदलाव
छह जुलाई की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। खास बात यह रही कि चढ़ावा प्रकरण में केस कराने वाले कृष्ण मोहन को अंतरिम प्रशासनिक दायित्व मिला। इसी बैठक में मंदिर के प्रशासनिक संचालन के लिए सीईओ की नियुक्ति को चयन समिति बनाने का फैसला हुआ। अगली बैठक 22 जुलाई को तय की गई।
22 जुलाई : एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार, सीईओ चयन टला
22 जुलाई की बैठक तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को नहीं मिली थी, इसलिए चढ़ावा प्रकरण पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। ट्रस्ट ने सीसीटीवी, चढ़ावा गणना व्यवस्था की समीक्षा की। स्टेट बैंक के साथ गणना को लेकर हुए एमओयू और कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। सीईओ चयन समिति ने बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों का हवाला देते हुए चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक माह अतिरिक्त मांगा, जिसे ट्रस्ट ने मंजूर कर लिया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या देखते हुए प्रशासनिक कार्यों के लिए सचिव नियुक्त करने का निर्णय हुआ। मंदिर के धार्मिक कार्य संतों के निर्देशन में संचालित करने, धार्मिक समिति का पुनर्गठन और आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने का भी फैसला हुआ।
22 जुलाई से दो सिंतबर तक
22 जुलाई को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार था लेकिन समय बढ़ा दिया गया। इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई एसआईटी बनी। 17 अगस्त पहली एसआईटी की रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने ट्रस्ट को सौंप दी। रिपोर्ट में चढ़ावा गणना व्यवस्था में प्रशासनिक एवं पर्यवेक्षण संबंधी खामियों और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सीईओ की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। 5500 से ज्यादा आवेदनों में से जीतेंद्र मिश्र का सीईओ के लिए चयन हो गया। चंपत राय की जगह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव महासचिव बन गए। अब माना जा रहा है कि व्यवस्थाओं में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।


