राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय बनेंगे गवाह या आरोपी? चोरी की जानकारी थी, बरामद कराए थे 80 लाख
राम मंदिर दान चोरी के मामले के खुलासे के बाद ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय के बयान और गवाही को मजबूत साक्ष्य माना जा रहा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि उन्हें गवाह बनाया जाएगा। अगर वह गवाह नहीं बनते तो आरोपी बनने की तलवार उन पर लटक रही है।

अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर से चढ़ावा चोरी की दो स्तरों पर हो रही जांच में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव रहे चंपत राय मुख्य भूमिका में हैं। जल्द ही यह तय हो जाएगा कि चंपत राय गवाह बनेंगे या फिर आरोपी। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चंपत राय गवाह नहीं बने तो सह आरोपी बनाए जा सकते हैं! अब तक की जांच में तो उन्होंने सकारात्मक सहयोग दिया है। मुकदमे में अभियोजन पक्ष के लिए चंपत राय की गवाही अहम होगी। इस नाते माना जा रहा है कि चंपत राय को ही पुलिस मुख्य साक्षी बना सकती है।
दरअसल, चंपत राय की गवाही ही मुकदमे का आधार बनेगी। एसआईटी और पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि चढ़ावा चोरी के करीब 80 लाख रुपये ट्रस्ट के तत्कालीन महासिचव चंपत राय ने ही सौंपे थे। इसके बाद ही एसआईटी गठित हुई और प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद ट्रस्टी कृष्णमोहन की ओर से 8 नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ रामजन्मभूमि कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने वादी मुकदमा कृष्णमोहन की आरोपों के संबंध में गवाही दर्ज की है। चंपत राय से भी रुपयों की बरामदगी के संबंध में पूछताछ हुई है। एसआईटी ने भी कई चक्र पूछताछ की है।
वायरल वीडियो के मुताबिक चंपत राय पुलिस के साथ ही 5 जून को चढ़ावा चोरी की तलाश में निकले थे। उन्हें झोला लेकर निकलते भी देखा गया। इस नाते भी चंपत राय मुख्य गवाह माने जा रहे हैं। चंपत की गवाही आरोपों को साबित करने में मददगार साबित होगी और मुकदमे को मजबूती देगी। कानूनन भी चंपत राय को गवाही देनी पड़ेगी। यदि नहीं देते हैं तो उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। जांच से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि अब तक की जांच में कई उतार चढ़ाव आए हैं। चंपत राय के बयान के आधार पर आरोपियों से पूछताछ हुई है। चंपत राय ने जांच में अभी तक पूरा सहयोग दिया। हर रिकार्ड और तथ्य दिखाए हैं। हर सवाल का जवाब भी बेबाकी से दिया है।
दानपात्रों के चढ़ावा की गणना के दौरान चोरी का मुद्दा तब सामने आया जब बाथरूम में कुछ रुपये मिले। इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सक्रिय हुए और संदिग्ध आरोपियों की तलाश में लग गए। पुख्ता जानकारी की आधार पर रात में पुलिस को लेकर निकले और 80 लाख रुपये बरामद कर ले आए। यह सब होने के बाद मीडिया में आई खबरों को नजरंदाज करने की कोशिश की गई। चंपत ने अपनी संक्षिप्त सफाई में कहा कि कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी नहीं पाई गई। यहां से उनकी भूमिका पर सवाल उठने लगे। जब विवाद हाथ से बाहर निकल गया तो ट्रस्ट की ओर से चंपत राय ने राज्य सरकार से एसआईटी जांच की सिफारिश की। एसआईटी जांच में भी चढ़ावा चोरी के स्पष्ट सबूत मिलने के बाद स्थिति साफ हो गई।


