राम मंदिर दान चोरी: नोटों की गिनती में शामिल होते ही सरगना बन गया टिन्नू का भतीजा मनीष

लखनऊ, विशेष संवाददाता
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एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष यादव की भर्ती उसके ताऊ रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। टिन्नू ने मनीष की भर्ती के लिए कागजात एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी को दिए थे। रत्नेश ने सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के जरिए गणनाकर्मी पद पर संविदा प्रक्रिया पूरी कराई।

राम मंदिर दान चोरी: नोटों की गिनती में शामिल होते ही सरगना बन गया टिन्नू का भतीजा मनीष

श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है इसमें शामिल आरोपियों की करतूतों की परतें खुल रही हैं। पता चला है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव गणना टीम में भर्ती होते ही चढ़ावा चोरी गिरोह का सरगना बन गया था। सीसीटीवी फुटेज की जांच में नोटों की गड्डियां चुराते सीधे तौर पर तीन लोग देखे गए। अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा। यह तीनों चढ़ावे की रकम पार करते थे और बाकी तीन अन्य इनकी मदद करते थे। मदद में सभी घेरा बनाकर सीसीटीवी फुटेज के आगे खड़े हो जाते थे।

सीसीटीवी फुटेज में दिखी चोरी

एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष यादव की भर्ती उसके ताऊ रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। टिन्नू ने मनीष की भर्ती के लिए कागजात एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी को दिए थे। रत्नेश ने सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के जरिए गणनाकर्मी पद पर संविदा प्रक्रिया पूरी कराई। रिकार्ड के मुताबिक 15 अप्रैल 2026 को ही मनीष यादव की भर्ती हुई और 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की गड्डियां पार करते हुए सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ।

मनीष को 50 दिन में ही मिल गई बड़ी भूमिका

ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय के ड्राइवर रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू सीधे तौर पर पैसे चोरी करते हुए तो नहीं पकड़े गए लेकिन आशंका है कि उसने अपने भतीजे मनीष को आगे किया। मनीष यादव गणनाकर्मी के तौर पर 50 दिन ही भर्ती रहा लेकिन कुछ ही दिनों में वह बड़ी भूमिका में आ गया था। जैसे उसकी भर्ती ही चढ़ावे की चोरी के लिए ही कराई गई थी। फिलहाल यह जांच का विषय है लेकिन भर्ती के तुरंत बाद चोरी में पकड़ा जाना सवाल तो खड़े ही करता है।

एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून तक की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हो पायी। इतने की जांच में चढ़ावा चोरी की पूरी कलई खुल गई। यह भी सही है कि सबसे ज्यादा संपत्ति और रुपये अविनाश शुक्ला के पास से ही बरामद हुए। अविनाश के सहयोगी के रूप में मनीष काम कर रहा था। बाकी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा तथा करुणेश पांडेय इनकी मदद कर रहे थे।

अयोध्या के एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि जांच से यह साफ होता है कि जैसे मनीष यादव की भर्ती चढ़ावा चोरी के लिए ही कराई गई थी। किसी भी संस्था में यदि कोई नया कामगार आता है तो उसे सिस्टम समझने में वक्त लगता है। मनीष यादव 26 अप्रैल को भर्ती होता है और पहले दिन से पैसों की चोरी में लग जाता है। उसकी यह करतूत इस ओर इशारा करती है कि भर्ती ही चोरी के लिए कराई गई थी।

अनधिकृत तौर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उसके ताऊ रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव पर थी। टिन्नू के परिवार का होने के नाते भी गणना कक्ष में उसकी चलने लगी थे। पहले से चोरी कर रहे गणनाकर्मियों ने उसे अपने गिरोह में शामिल कर लिया। कुछ दिनों में मनीष ने चढ़ावा चोरी की कमान खुद संभाल ली थी।

पुलिस ने टिन्नू-मनीष की मांगी रिमांड, सुनवाई आज

अब पुलिस ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन के पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की है। मामले के विवेचक और क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में विशेष अभियोजन अधिकारी के माध्यम से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा और बरादमगी होने की संभावना है। इसी उद्देश्य से दोनों से अभिरक्षा में लेकर विस्तृत पूछताछ की अनुमति मांगी गई है। अदालत ने पुलिस के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तिथि तय की है।

79 लाख मिले, तीन करोड़ की आशंका पर उठ रहे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में एक बार फिर नए सवाल उठने लगे हैं। मामले में पहले तत्कालीन ट्रस्ट नेतृत्व के दौरान करीब 79 लाख रुपये बरामद कर पुलिस को सौंपे जाने की बात सामने आई थी। वहीं बाद में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी होने की आशंका जताई। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 3 करोड़ रुपये के इस दावे की सच्चाई क्या है।

यदि पुलिस के समक्ष 79 लाख रुपये की बरामदगी दर्ज कराई गई थी, तो बाद में 3 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका किन तथ्यों, दस्तावेजों या आंतरिक आकलन पर आधारित थी। क्या यह अनुमान दानपात्र की गिनती, ऑडिट, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ या किसी अन्य साक्ष्य के आधार पर लगाया गया था। या फिर ट्रस्ट ने ट्रस्ट के अंदर खाने में तीन करोड़ रुपए आरोपियों से बरामद किए गए और किन्ही कारणों से मामले को छोटा दिखाने के लिए 79 लाख ही बरामद होने की लिखापढ़ी की गई। इन सब मामलों में चर्चाओं का दौर जारी है। इस दिशा में जांच भी चल रही है।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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