राम मंदिर दान चोरी: 2000 से शुरुआत, फिर रोजाना तीन लाख तक पार, पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने उगले कई राज

अयोध्या, संवाददाता।
Follow us on Google News
share

राम मंदिर दान चोरी के तीन आरोपियों को पुलिस ने रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान आरोपियों ने पुलिस को कई चौंकाने वाली बातें बताई हैं। चोरी की शुरुआत कैसे हुई? इसको लेकर भी कई राज उगले हैं।  

ram mandir chadhava chori

Ram Mandir Controversy: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को पुलिस ने रिमांड पर लिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान चढ़ावा चोरी के आरोपी करुणेश पांडेय, लवकुश तिवारी और अनुकल्प मिश्र अहम राज उजागर किए हैं। आरोपियों ने पुलिस अफसरों को बताया कि चढ़ावे की चोरी की शुरुआत सबसे पहले अविनाश शुक्ला ने की। उसे देखकर करुणेश भी साथ जुड़ गया। इसके बाद अनुकल्प समेत सभी आरोपी संगठित समूह बनाकर रोजाना अधिक से अधिक रकम चढ़ावे से चुराने लगे।

शुरुआत दो-दो हजार रुपये से हुई, बाद में हौसला बढ़ने पर 15-20 हजार से लेकर तीन-तीन लाख रुपये तक रोजाना पार करने लगे थे। सूत्रों के मुताबिक यह खुलासा आरोपियों ने पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान किए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक रिमांड के दौरान हवालात में यह आरोपी रोते रहते थे और सोते भी नहीं थे। थोड़ी देर के लिए अगर नींद आ भी जाए तो फिर झटके से उठकर रोने लगते थे।

किसी भी की नहीं होती थी तलाशी

दो लोगों के जरिए शुरू हुई यह चोरी धीरे-धीरे दोनों के अन्य करीबियों तक पहुंची। एक के बाद एक दूसरे आरोपी भी इस महापाप में जुड़ते गए। बताया गया कि चढ़ावे की गणना के वक्त चोरी करना आसान इसलिए हो गया था कि किसी भी व्यक्ति की कोई तलाशी नहीं होती थी। आरोपी चुराई रकम बाथरूम की सीवर लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में रख देते थे। घर जाते वक्त जेबों और जुराबों में गड्डियां छिपाकर निकल जाते थे। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि इसमें रैक बना है, और ऊपर से एक कवर लगा है। इस नाते यहां किसी को शक नहीं होता था और चोरी के रुपये सुरक्षित रहते थे। दोबारा मौका देखकर चुराई धनराशि मंदिर परिसर से बाहर पहुंचा दी जाती थी।

शक न हो, इसलिए पहले कम नोट उड़ाए

आरोपियों ने बताया कि जब चोरी शुरू की तो पकड़े जाने का भय रहता था। इस कारण पहले दो-दो हजार रुपये पार किए। लगातार कई दिनों तक किसी को संदेह नहीं हुआ न पूछताछ हुई तो सभी बेखौफ होकर गड्डी पर गड्डी पार करने लगे। देखते ही देखते एक दिन में जो जितने रुपये निकाल पा रहा था, निकालने लगा। आरोपियों ने माना कि 10-15 हजार रुपये आसानी से जेबों आ जाते थे। वे शर्ट कभी इन नहीं करते थे। इस नाते जेबों में भरी गड्डी का पता नहीं चलता था। कभी किसी ने टोका-टाकी भी नहीं की। इन आरोपियों ने बताया कि 15-15 हजार की चोरी रोज करने पर लालच बढ़ गया और फिर एक लाख से तीन लाख तक एक व्यक्ति ने रोज पार करना शुरू कर दिया। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि अधिक से अधिक धन बटोर लेने का जैसे कंपटीशन शुरू हो गया था। जो जितना पार कर ले जा रहा था, निकाल ले जा रहा था। लालच में ऐसे फंसे कि कभी इस बात का भान नहीं हुआ कि यह पैसा भगवान के चढ़ावे का है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अभी भी इन्हें पैसे चोरी करने का कोई अफसोस नहीं है। पूछने पर पूरे रैकेट के बारे में आसानी से बताते हैं।

जेल के दबंग कैदी बता रहे बचने के गुर

आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि जेल जाने के बाद गंभीर आरोपों में बंद खूंखार कैदी इन्हें बचने का रास्ता भी बताने लगे। यह कहकर ढांढस बंधा रहे हैं कि डकैती करने वाले भी बच जाते हैं। तुम लोगों ने तो सिर्फ चोरी की है। जमानत भी होगी और मुकदमे में भी राहत मिल जाएगी। आरोपियों ने बताया कि जेल आने पर कुछ राहत मिल गई थी, लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे मामला बढ़ता गया वैसे-वैसे मुश्किलें भी बढ़ीं। आरोपियों के पैतृक गांव-शहर के मोहल्लों तक में चर्चा होने लगी तो अहसास हुआ कि राम मंदिर में चोरी कर बड़ी गलती की है। इस नाते पड़ोस के लोगों ने भी उनके परिवारों से दूरी बना ली।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, UP News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News, और lucknow Weather अपडेट हिंदी में पढ़ें। साथ ही UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Election 2027 Candidates से जुड़ी ताज़ा खबरों के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करें।
Hindi NewsUP News2000 से शुरुआत, फिर रोजाना 3 लाख तक पार, मंदिर दान चोरी पर आरोपियों ने उगले राज