अब टिन्नू खोलेगा राम मंदिर दान चोरी के राज, रिमांड पर सुभाष के साथ आमने-सामने होगी पूछताछ
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी के मामले में सबसे ज्यादा चर्चित रमा शंकर यादव उर्फ टिन्नू से अब राज उगलवाने की तैयारी है। टिन्नू को सुभाष के साथ आमने-सामने बैठाकर पुलिस पूछताछ करेगी। दोनों की रिमांड पर आज फैसला होगा।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में केस दर्ज होने से पहले से राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम सुर्खियों में है। आठ आरोपियों में चार को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा चुकी है। अब टिन्नू के साथ सुभाष श्रीवास्तव की कस्टडी रिमांड मांगी गई है। दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ होगी। रिमांड पर अदालत में आज फैसला होगा। पुलिस दोनों आरोपियों को उन स्थानों पर ले जाएगी, जहां पहले चार आरोपियों को ले जा चुकी है। पहले चार आरोपियों ने पुलिस को वह स्थल दिखाया है, जहां चढ़ावे की रकम का बंटवारा करते थे। टिन्नू यादव राम मंदिर में पास बनवाने में भी अहम भूमिका निभाता था, इसलिए चढ़ावा मामले से इतर यह भी बड़ा मामला एसआईटी की जांच में सामने आया है।
आरोपियों की ओर से नियुक्त अधिवक्ता कुलशेखर सिंह के अनुसार कि विवेचक ने आरोपी सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए प्रार्थना पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया है। इस आवेदन पर मंगलवार को सुनवाई होगी।राम जन्मभूमि परिसर के सूत्र बताते हैं कि पूरे परिसर में शायद ही कोई विभाग रहा होगा, जहां इसका सीधा हस्तक्षेप ना रहा हो। पुलिस के किसी बड़े अधिकारी जैसी हनक और पद साधारण कर्मचारी जैसा था, इसलिए विवेचक को भी पता है कि आरोपी के सीने में कई राज दफन हैं। मगर कड़ियां जोड़ने के लिए सबसे पहले अविनाश शुक्ला की कस्टडी रिमांड मांगी गई। पुलिस को सूचना थी कि अविनाश ने सबसे पहले चोरी शुरू की, इसके बाद पूरा गैंग जुड़ता गया।
टिन्नू का गणना कक्ष में था भरपूर दबदबा
अविनाश ने पुलिस को वह जगह भी दिखाई, जहां रकम बंटती थी। इसके बाद जीजा-साले अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के साथ करुणेश को स्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू हुई। अविनाश से पूछे सवालों की कड़ी को तीनों के जवाब से जोड़ा गया तो पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलीं। सूत्र बताते हैं कि अब तक चार लोगों ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि टिन्नू का दबदबा गणना कक्ष में भरपूर था। मगर किसी ने यह नहीं बताया है कि रकम बंटवारे के समय टिन्नू की मौजूदगी होती थी या नहीं।
टिन्नू और सुभाष से एक साथ पूछताछ
टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव से पूछताछ एकसाथ इसलिए हो रही है क्योंकि सुभाष गणना कक्ष में ड्यूटी लगाता था। पुलिस को शक है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि यह ड्यूटी टिन्नू के कहने पर लगाई जाती थी। सुभाष ही एक ऐसा आरोपी है, जिससे पुलिस को कुछ भी बरामद नहीं हुआ है। अब दोनों से पुलिस साथ पूछताछ करेगी तो कर्मचारियों की भर्ती से लेकर ड्यूटी लगाने तक के असली कारणों की जानकारी पता चलेगी। इसके कुछ दिन बाद रमाशंकर मिश्रा और मनीष यादव से पूछताछ प्रस्तावित है।
आरोप लगने के बाद भी बेधड़क राम मंदिर आता-जाता था टिन्नू
चढ़ावा चोरी मामले में सबसे अहम प्रश्न यह है कि मामला देश भर में चर्चा का विषय बनने के बावजूद और मुख्य आरोपी के रूप में टिन्नू यादव का नाम आने के बाद भी उसके मंदिर और घर आने-जाने पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। यह क्रम केस दर्ज होने के पहले तक जारी था। सूत्र बताते हैं कि कई दिनों तक टिन्नू को खुली छूट देने का नतीजा यह हुआ कि उसके पास से सिर्फ एक लाख रुपये बरामद हुए। हाई प्रोफाइल मामला होने के बावजूद जिम्मेदारों ने उसे खुली छूट दे रखी थी।
चढ़ावा चोरी के आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा 27 तक बढ़ी
चढ़ावा चोरी प्रकरण में गिरफ्तार आठों आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा की अवधि अदालत ने बढ़ा दी है। प्रभारी न्यायालय ने सभी आरोपियों को 27 जुलाई तक न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार में निरुद्ध रखने का आदेश दिया है। इससे पूर्व 29 जून को सभी आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण(एंटी करप्शन) न्यायालय में पेश किया गया था। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। सोमवार को न्यायिक अभिरक्षा की अवधि समाप्त होने पर आरोपियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत किया गया।
बताया गया कि भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय के जज रजत वर्मा के अवकाश पर होने के कारण मामले की कार्यवाही प्रभारी न्यायाधीश के समक्ष हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आठों आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा 27 जुलाई तक बढ़ा दी।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


