राम मंदिर में चोरी नहीं डाका; नृपेंद्र मिश्रा के बयानों से मुश्किल में ट्रस्ट, बड़े बदलाव की तैयारी

अयोध्या, वरिष्ठ संवाददाता
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा में चोरी की घटना को भवन निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने डाका करारा दिया है। उनके बयान से ट्रस्ट में खलबली सी मची हुई है। माना जा रहा है कि अब राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। ट्रस्ट में व्यवस्था परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं।

Ram Mandir Scam

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में भवन निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के बयानों से खलबली मची है। नृपेंद्र मिश्रा ने यहां हुई चोरी को डाका करार दिया है। टीवी चैनलों पर उनके बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी कार्रवाई और मंदिर की व्यवस्था में परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं। नृपेंद्र मिश्रा ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज में ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे चोरी की पुष्टि होती है। यह भी कहा कि केवल 45 दिनों की वीडियो रिकॉर्डिंग है, उससे पहले की फुटेज नहीं मिल रही है। इस बयान के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और काउंटिंग प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

नृपेंद्र ने साक्षात्कार में यह भी कहा है कि मंदिर ट्रस्ट का ढांचा बदलकर प्रशासनिक ढांचा तैयार करना चाहिए। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नृपेंद्र मिश्रा के लगातार आ रहे बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि उनके सार्वजनिक रुख को शीर्ष स्तर की सहमति के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। इसी वजह से चर्चा तेज हो गई है कि विशेष जांच दल(एसआईटी) की रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा हो सकती है।

सूत्रों के हवाले से यह भी कयास हैं कि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, प्रमुख सदस्य डॉ. अनिल मिश्र और व्यवस्था संचालन से जुड़े गोपाल राव पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ सकता है। उनसे पद छोड़ने को भी कहा जा सकता है। चढ़ावा प्रकरण में नाम सामने आने के बाद टिन्नू यादव समेत कुछ कर्मचारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की संभावना है। हालांकि, अब तक ट्रस्ट, एसआईटी अथवा शासन स्तर से किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सभी की नजरें एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाले संभावित निर्णयों पर टिकी हैं।

15 दिन में पूरी नहीं हो सकती जांच, श्रद्धालुओं के सामने आए रिपोर्ट: नृपेन्द्र

राम मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े कथित अनियमितता प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को लेकर नृपेन्द्र मिश्र ने कहा कि इतने गंभीर और व्यापक मामले की जांच मात्र 15 दिनों में पूरी हो जाना न तो व्यावहारिक है और न ही कानूनी दृष्टि से संभव प्रतीत होता है।

एक मीडिया साक्षात्कार में नृपेन्द्र मिश्र ने कहा कि यदि मामले में आरोपों की पुष्टि होती है तो आगे चार्जशीट तैयार करनी होगी, साक्ष्यों का संकलन करना होगा और विधिक प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा। इसके लिए जांच अधिकारी, अभियोजन पक्ष तथा अन्य संबंधित प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। यह पूरी प्रक्रिया समय मांगती है और इसे जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके। उनके अनुसार जांच की गुणवत्ता समय सीमा से अधिक महत्वपूर्ण है।

एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक हो

नृपेन्द्र मिश्र ने यह भी कहा कि एसआईटी अपनी जांच पूरी करने के बाद जो रिपोर्ट सरकार को सौंपे, उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इस प्रकरण से करोड़ों राम भक्तों और श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई है, इसलिए जांच के निष्कर्षों को जनता से छिपाने के बजाय उनके सामने रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि जांच में क्या तथ्य सामने आए, किसकी जिम्मेदारी तय हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि श्रद्धालुओं का विश्वास भी मजबूत होगा।

दानपात्रों में चढ़े सोना-चांदी के आभूषणों का हिसाब नहीं

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्रों में चढ़ाए गए सोना-चांदी के आभूषणों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। नृपेंद्र मिश्रा ने दावा किया है कि दानपात्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषण चढ़ाए जाते थे, लेकिन उनका समुचित हिसाब-किताब कहीं दिखाई नहीं देता। नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, देशभर से आने वाले अनेक श्रद्धालु भावनात्मक रूप से जुड़कर रामलला को अपने सबसे प्रिय आभूषण तक अर्पित कर देते थे।

कई भक्त अपने कान के आभूषण, अंगूठी, कंगन व अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दानपात्र में डालकर चले जाते थे। उन्होंने कहा कि दानपात्रों से नकदी निकालने और उसकी गिनती का कार्य 44 सदस्यीय टीम द्वारा किया जाता था। इस प्रक्रिया में बैंक कर्मियों के साथ-साथ ट्रस्ट के कर्मचारी भी निगरानी में तैनात रहते थे।

इसके बावजूद दानपात्रों से निकलने वाले सोना-चांदी के आभूषणों का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया। नरेंद्र मिश्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि नकदी गिनती के दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों को नोटों की गड्डियों से रकम निकालकर जेब में रखते हुए सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है। कहा कि यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है।

बयानों के पीछे नई भूमिका की चर्चा, कयास तेज

नृपेंद्र मिश्र के लगातार आ रहे बयानों ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। एक ओर उनके बयानों को सख्त कार्रवाई के संकेत माने जा रहे हैं, दूसरी ओर कुछ लोग इसके पीछे उनकी संभावित नई भूमिका की संभावना भी तलाश रहे हैं। जानकारों का कहना है कि राम मंदिर निर्माण का प्रमुख चरण लगभग पूरा हो चुका है। भवन निर्माण समिति की भूमिका भी सीमित होती जा रही है।

ऐसे में नृपेंद्र मिश्र द्वारा हाल के दिनों में मंदिर प्रशासन में एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की वकालत को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अयोध्या में चर्चा है कि मंदिर निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव हो सकते हैं। इसके साथ अटकलें भी हैं कि सीईओ जैसे पद का सृजन होता है तो नृपेंद्र मिश्र जैसी प्रशासनिक और नौकरशाही पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति की भूमिका बन सकती है।

पूर्व में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और देश के शीर्ष नौकरशाहों में शामिल रहे नृपेंद्र मिश्र के बयानों को कई लोग सामान्य प्रतिक्रिया से अधिक महत्व दे रहे हैं। उनका मानना है कि चढ़ावा प्रकरण पर जिस स्पष्टता और मुखरता के साथ वह सामने आए हैं, उससे संकेत मिलता है कि शीर्ष स्तर पर भी व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने को लेकर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है। हालांकि, इन चर्चाओं और अटकलों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट और न शासन स्तर से किसी नई नियुक्ति अथवा प्रशासनिक बदलाव को लेकर औपचारिक घोषणा की गई है। इसके बावजूद नृपेंद्र मिश्र के हालिया बयानों ने राम मंदिर ट्रस्ट की भविष्य की संरचना और नेतृत्व को लेकर बहस को नई दिशा दे दी है।

Yogesh Yadav

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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