राम मंदिर में दान गिनने के निर्देशों का 10% भी पालन नहीं; नृपेंद्र मिश्रा ने निगरानी में चूक मानी
राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने चढ़ावा में चोरी की घटनाओं के लिए गाइडलाइन का पालन नहीं होना मुख्य कारण माना है। उन्होंने कहा कि निगरानी में चूक हुई है। जो नियम बनाए गए थे, उनका दस प्रतिशत भी पालन नहीं हुआ है।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के बीच ही निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने यहां पर निगरानी में चूक की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि पूरे मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं के लिए एक सिस्टम लागू किया गया है। इसके लिए आदेश-निर्देश जारी किए गए थे। चढ़ावा की काउंटिंग के लिए भी नियम बने हैं और निर्देश जारी हुए हैं। इसके बाद भी इन निर्देशों का दस प्रतिशत भी पालन नहीं हुआ है। उन्होंने हालांकि श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को क्लीन चिट भी दी।
मीडिया से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मैंने यहां के लिए जारी निर्देशों और नियमों को पढ़ा है। उसमें सब कुछ साफ-साफ लिखा है। मंदिर में आने वाले चढ़ावा की काउंटिंग कैसे होगी। इसके लिए भी पूरी व्यवस्था बनी है। नियमों में पूरा विवरण है। अलग-अलग लोगों और संस्थाओं के लिए जिम्मेदारी भी तय हैं। एसबीआई की क्या जिम्मदारी होगी। राम मंदिर ट्रस्ट की क्या जिम्मेदारी होगी, हर चीज का नियम बना हुआ है। इसी के अनुसार अनुशासन का पालन होना चाहिए था।
निर्देशों में शुरुआत में ही यह भी कहा गया है कि पूरी व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए। इसके बाद भी लगता है कि सारे निर्देशों का पालन दस प्रतिशत से अधिक नहीं हुआ है। जिन निर्देशों का पालन होना चाहिए था, नहीं हुआ है। यहां पर नियमों का लगातार उल्लंघन हुआ है। आज जिस तरह की स्थिति सामने आई है, उसके पीछे मुख्य कठिनाई नियमों का पालन नहीं होना ही है। ऐसे में जरूरी है कि भविष्य के लिए सुधार अब कर लिया जाए। यह भी अब देखना होगा कि इसे लागू कैसे किया जाए।
यह आखिरी वार्निंग
नृपेंद्र मिश्रा ने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को क्लीन चिट देते हुए निष्कलंक बताया। उन्होंने कहा कि उनकी संलिप्तता इस कार्य में नहीं हो सकती। फिर भी मुखिया होने के नाते प्रश्न चिन्ह तो लगेगा ही। दो साल पहले जमीन के प्रकरण में वार्निंग मिली थी, जिससे सबक लिया जाना चाहिए था। अब यह अंतिम वार्निंग है, इसमें भी सुधार नहीं हुआ तो पनिश्मेंट की स्थिति होगी।
मिंट को सोना-चांदी की जिम्मेदारी नहीं दी गई
नृपेन्द्र मिश्र ने एक बड़े रहस्य से पर्दा उठाते हुए कहा कि तिरुपति देवस्थानम की तरह रामलला को श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धातुओं (सोना-चांदी) की व्यवस्था वित्त मंत्रालय की संस्था मिंट के माध्यम से नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि इसका प्रस्ताव किया गया था और तीन साल पहले मिंट संस्था के लोग यहां आकर 15 दिनों तक रहे। फिर वह वापस चले गए। मैं नहीं जानता कि किन कारणों से मिंट को यह जिम्मेदारी नहीं दी गई।


