राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कई बार डिलीट की गई गिनती वाले कमरे की सीसीटीवी फुटेज, रिकवरी की कोशिश
राम मंदिर के चढ़ावा चोरी की जांच में जुटी एसआईटी कर्मचारियों और पुजारियों के बयान के साथ ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की जांच में भी जुटी हुई है। एसआईटी को पिछले कुछ महीनों की रिकॉर्डिंग डिलीट मिली है। इन्हें रिकवर करने की कोशिश हो रही है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच में जुटी एसआईटी को गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी फुटेज की रिकॉर्डिंग पिछले कुछ महीनों में कई बार डिलीट मिली है। डीबीआर को दिल्ली भेजकर इन्हें रिकवर करने की कोशिश हो रही है। वहीं, कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया की छानबीन में भी एसआईटी जुट गई है। पुजारियों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। रडार पर राम मंदिर के करीब ढाई सौ से अधिक कार्यकर्ता हैं। इन सभी से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया है। इनमें दर्जनों अवैतनिक सेवा देने वाले वरिष्ठ पदाधिकारी है जबकि निर्धारित मानदेय कर्मचारी के रूप में कार्यरत कर्मचारी भी हैं। दूसरी तरफ राम मंदिर में पूजा-पाठ करने वाले पुजारियों से भी परिसर स्थित ग्रीन हाउस में काफी देर पूछताछ हुई है।
एसआईटी इनकी नियुक्ति का पैमाना और परिसर में जिम्मेदारी का निर्धारण किस रूप में किया गया था, इसपर भी छानबीन कर रही है। इसके पहले इनकी पूरी सूची तैयार कराकर जांच अधिकारियों ने लिया है। एसआईटी से जुड़े अधिकारियों ने परिसर के बाहर स्थित ट्रस्ट के कार्यालय जो कि श्रीराम निवास मंदिर में संचालित है, का भी गुरुवार को निरीक्षण किया। इसके अलावा वहां से सम्बन्धित आवश्यक जानकारी भी ली।
कई बार डिलीट मिली सीसीटीवी फुटेज
राममंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी मामले की जांच में जो सबसे महत्वपूर्ण बात निकल कर आई है, वह यह है कि नोटों के गिनती वाले कमरे में लगे सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग को एक बार नहीं कई बार डिलीट किया गया है। जांच अधिकारियों ने सीसीटीवी के डीबीआर को जांच के लिए दिल्ली के प्रयोगशाला भेज दिया है। वहां एक्सपर्ट यह पता लगाएंगे कि कब-कब डाटा डिलीट किया गया है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुरानी फाइल को रिकवर किया जाएगा और उसे साक्ष्य के रूप में रखा जाएगा।
महिपाल ने किया था डिलीट का दावा
पूर्व लेखाकार महिपाल ने दान के रुपयों की बड़े पैमाने पर चोरी का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि उनके कार्यकाल में सीसीटीवी कैमरे से आठ महीने का डाटा डिलीट किया गया था। सूत्र बताते हैं कि जांच प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की तो उन्हें शक हुआ कि शायद अभी कुछ दिन पहले भी रिकॉर्डिंग को डिलीट किया गया है। कुछ वर्षों के भीतर यह प्रक्रिया कई बार तो नहीं अपनाई गई। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने सीसीटीवी कैमरे के लगे डीबीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) को दिल्ली स्थित लैब में भेजा है।
सीसीटीवी लगाने वालों से पूछताछ
सूत्र बताते हैं कि सीसीटीवी लगाने वाले लोगों से भी अधिकारियों ने कई घंटे पूछताछ की है। उनसे यह जाना गया है कि उन्होंने सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग को डिलीट किया या नहीं। हालांकि पूछे गए प्रश्नों के जवाब की जानकारी नही मिल सकी है। अधिकारियों ने दूसरे दिन राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू से काफी देर पूछताछ की है। पूरे बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है।
गोपाल राव और अनिल मिश्रा के पास बड़ी जिम्मेदारी थी
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पदाधिकारियों की जिम्मेदारी को दो भागों में बांटा गया था। पहली आंतरिक और दूसरी बाहरी। आंतरिक जिम्मेदारी में गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्रा बताए जा रहे हैं। महासचिव चंपत राय बाहरी मामलों में हस्तक्षेप करते थे, इसलिए गोपाल राव और अनिल मिश्रा की बड़ी जिम्मेदारी मानी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि एसआईटी की जांच का सामना इन दोनों को सर्वाधिक करना पड़ेगा। गोपाल राव से अधिकारी कुछ पूछताछ कर चुके हैं आने वाले दिनों में और करेंगे। गुरुवार को डॉ अनिल मिश्रा से भी पूछताछ हुई है, क्योंकि नोट गिनने की व्यवस्था में निगरानी की जिम्मेदारी में शामिल थे।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


