
रामभक्तों को परकोटे के मंदिरों में दर्शन के लिए तीन महीने का करना होगा इंतजार, फिनिशिंग का काम बाकी
अयोध्या में परकोटे के मंदिरों में रामभक्तों के दर्शन के लिए अब लंबा इंतजार करना पड़ेगा। निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं होने के कारण दर्शन के लिए करीब तीन महीने का समय लग सकता है। हालांकि सप्त मंडपम में अगले महीने से दर्शन शुरू हो जाने की संभावना है।
राम मंदिर में रामलला के दर्शनार्थियों को मां अन्नपूर्णा सहित परकोटे सभी छह मंदिरों में दर्शन के लिए फिलहाल लंबा इंतजार करना होगा। हालांकि सप्त मंडपम में अगले महीने से दर्शन शुरू हो जाने की संभावना है। फिर भी 30 दिन का वक्त कम है। उसका कारण है कि विराजमान रामलला के अस्थाई मंदिर का अभी निर्माण चल रहा है। इसके अलावा दर्शनार्थियों को दर्शन कराने के लिए बैरीकेडिंग के जरिए लेन भी बनाया जाएगा। इस कार्य में समय लग सकता है। फिलहाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने फैसला किया है कि यदि सबकुछ ठीक रहा तो प्रतिष्ठा द्वादशी की तिथि 31 दिसम्बर 2025 से सप्त मंडपम में निर्धारित संख्या में श्रद्धालुओं को पास निर्गत दर्शन कराया जाएगा।
चैत्र नवरात्र में आम श्रद्धालुओं को परकोटे के मंदिरों का दर्शन मिल सकेगा। इसका निर्णय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने शुक्रवार को राम मंदिर परिसर में कार्यरत कार्यकर्ताओं व कर्मचारियों की बैठक में लिया। बैठक में तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय, न्यासी डॉ. अनिल मिश्र व मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के अलावा अन्य वरिष्ठ -कनिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के बाद तय हुआ कि परकोटे के सभी मंदिरों में अभी फिनिशिंग कार्य बाकी है। ध्वजारोहण समारोह की दृष्टि से सफाई कराई गयी थी, लेकिन अवशेष काम जल्द शुरू किया जाएगा।
यदि दर्शन शुरू हो गया तो भीड़ के दबाव में काम करने में कारीगरों व श्रमिकों को असुविधा होगी और एक बार दर्शन शुरू कराने के बाद बंद करना मुश्किल हो जाएगा। बताया गया बारीक कामों को पूरा होने में तीन महीने का समय लग सकता है। इसके कारण चैत्र नवरात्र से पहले यानि मार्च के अंत व अप्रैल में दर्शन शुरू कराया जाएगा।
कॉरिडोर के दोनों तरफ लगेगी टाइटेनियम की जालियां
राम मंदिर में प्रथम तल पर दिव्यांगो व वृद्ध एवं बुजुर्ग श्रद्धालुओं को राम दरबार का दर्शन कराने लिए पश्चिम दिशा में लिफ्ट लगवाई गयी है। यह लिफ्ट प्रथम तल पर कारीडोर में खुलती हैं। करीब 30 मीटर लंबे कॉरिडोर के दोनों तरफ पत्थरों की रेलिंग बनाई गयी है लेकिन छत और रेलिंग के बीच का हिस्सा खुला है। इस खुले स्थान से दुर्घटना की आशंका खारिज हो सकती है। इसके कारण तीर्थ ने निर्णय लिया है कि दोनों तरफ जालियां लगवाई जाए जिससे कारीडोर हवादार भी रहे और सुरक्षा भी हो जाए। इसीलिए तीर्थ क्षेत्र ने फैसला किया है कि यहां टाइटेनियम की जाली लगवाई जाएगी। इसके पहले राम मंदिर के तीनों तल पर खिड़कियों पर टाइटेनियम की ही जालियां लगाई गयी है।
दर्शन के लिए कार्य में तेजी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के आमंत्रित सदस्य व मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने कहा कि अभी छोटे-छोटे काफी काम बाकी है। उनको पूरा करने के लिए समय चाहिए। जल्दबाजी में हर काम नहीं किया जा सकता। फिलहाल हम तैयारी कर रहे हैं जैसे ही अनुकूलता दिखाई पड़ेगी उस वक्त सभी को दर्शन सुलभ करा दिया जाएगा।





