रक्षाबंधन पर रामलला के लिए बड़ी बहन देवी शांता ने भिजवाई राखी, श्रृंगी ऋषि आश्रम से पहुंची मिठाई और फल
रक्षाबंधन पर अयोध्या के राम मंदिर में उत्सव का माहौल है। रामलला विराजमान के लिए बड़ी बहन देवी शांता की ओर से चारों अनुजों के साथ पुजारियों के लिए भी राखियां और मिठाई के साथ फल भेजा गया है।

रक्षाबंधन पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसके पहले गुरुवार को राम मंदिर में विराजमान रामलला की बड़ी बहन देवी शांता की ओर से चारों अनुजों के साथ पुजारियों के लिए भी राखियां व मिठाई एवं फलादि भेजा गया। राखी समेत सभी सामग्रियों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के आशीर्वाद से उनके उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास को रामलला के अर्चक संतोष कुमार तिवारी की मौजूदगी में भेंट किया गया। महंत कमलनयन दास ने श्रृंगी ऋषि आश्रम से समर्पित राखी व उपहारों को पुजारी के हवाले कर मंदिर में अर्पित करने का निर्देश दिया। पुजारी तिवारी ने भेंट को स्वीकार कर शुक्रवार को निर्धारित मुहूर्त में रामलला को राखी बांधने का वचन दिया।
इस मौके पर महंत कमलनयन दास ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि 500 सालों की प्रतीक्षा के बाद हम सबके जीवन काल में राम मंदिर का निर्माण हुआ। निश्चित ही हम सब सौभाग्यशाली है और रक्षाबंधन का यह पवित्र उत्सव हमारे सौभाग्य की वृद्धि करने वाला सिद्ध होगा क्योंकि रक्षा सूत्र के धागे को जिन बहनों ने पूरी पवित्रता और श्रद्धा भाव से तैयार किया है, वह भाव ही पूरे समाज को एकजुट रखने की मजबूत डोर है। पुजारी संतोष तिवारी ने कहा कि रक्षा सूत्र बांधते समय 'येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः' मंत्र पढ़ा जाता है। इसका अर्थ है कि जो रक्षा धागा राजा बलि को बांधा गया था, वही पवित्र धागा मैं तुम्हारी कलाई पर बांधता हूं, जो तुम्हें सदा के लिए विपत्तियों से बचाएगा।
उन्होंने कहा कि भगवान ने जिस प्रकार राजा बलि का मान रखा और उनकी रक्षा की, उसी प्रकार से सबकी रक्षा करें। श्रृंगी ऋषि आश्रम के पुजारी महेंद्र दास गोस्वामी ने कहा कि देवी शांता चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ की पुत्री थी और उनका विवाह श्रृंगी ऋषि से हुआ था। तभी से प्रतीकात्मक रस्म निभाई जाती है। यह आयोजन महोत्सव का रुप ले चुका है।
ओडिशा के जगन्नाथ स्वामी और मधुबनी पेंटिंग की बनी राखियां
संस्था के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने बताया कि ओडिशा से भगवान जगन्नाथ स्वामी के अलावा मधुबनी पेंटिंग पर आधारित राखियां भी आई है। इसके अलावा महिला समूह की बहनों ने केले के तने से राखियों का निर्माण किया। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की अगुवाई कर रही अंजलि सिंह ने कहा कि रामलला हमारे आराध्य हैं, उनके लिए राखियों को बनाना और उन्हें धारण कराना ऐसा पवित्र एहसास है जिसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं है।
उधर श्रृंगी ऋषि आश्रम से आई यात्रा का रास्ते में कई स्थानों पर स्वागत हुआ। यात्रा में संस्थान के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र सिंह, अमर सिंह, देवेन्द्र सिंह, शमशेर, प्रदीप जायसवाल, विंदेश्वरी श्रीवास्तव, उदयभान गुप्ता, ध्रुव गुप्ता, रवि सिंह, पंकज सिंह, सतेन्द्र सिंह, जन्मेजय सिंह व अंजनी सिंह, अनीता मौर्य, उषा मौर्य तारावती व अनुपमा समेत अन्य शामिल रही।


