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वंदे मातरम के समय कुछ लोग चुप रह जाते हैं या लॉबी में रहते हैं, CCTV में सब है: राजा भैया

वंदे मातरम के समय कुछ लोग चुप रह जाते हैं या लॉबी में रहते हैं, CCTV में सब है: राजा भैया

संक्षेप:

राजा भैया ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि आखिर कौन लोग हैं, जो वंदे मातरम के गायन के दौरान चुप रह जाते हैं या फिर लॉबी में निकल जाते हैं। कुंडा विधायक ने कहा कि संविधान की बात करने वाले समझें कि वंदे भारत को संविधान सभा ने ही मान्यता दी थी।

Dec 23, 2025 01:57 pm ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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वंदे मातरम पर यूपी विधानसभा में चर्चा के दौरान जनसत्ता दल के नेता राजा भैया ने सवाल उठाया कि आखिर किसे राष्ट्रगीत से आपत्ति है। राजा भैया ने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि हमारा राष्ट्रगीत विवाद में आएगा। यह किसी धर्म के विरोध में नहीं है। देश का हर सदन वंदे मातरम से ही शुरू होता है, लेकिन क्या इस सदन में कुछ सदस्य ऐसे नहीं हैं जो वंदे मातरम पर चुप रह जाते हैं या फिर लॉबी में बैठे रहते हैं। सीसीटीवी में सब कुछ दर्ज है। यह प्रमाण है, जिसे कभी भी देखा जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि कुछ चीजें ऐसी हैं, जो खुलकर सामने आनी चाहिए। वंदे मातरम किसी एक व्यक्ति के कहने या लिखने पर राष्ट्रगीत नहीं बना था। पूरी संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि वंदे मातरम राष्ट्रगीत होगा और जन गण मन राष्ट्रगान होगा। उस सभा में कौन-कौन से महानुभाव थे, यह बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन आज कष्ट हुआ। वंदे मातरम पर चर्चा कोई हास-परिहास का विषय नहीं है। हम मानकर चल रहे थे कि वंदे मातरम सभी के लिए पूज्य है। बंकिम चंद्र चटर्जी ने बंगाल में इसे लिखा, लेकिन पूरे भारत ने इसे स्वीकार किया।

राजा भैया ने कहा, 'खुदीराम बोस का जन्म बंगाल के मिदनापुर में हुआ था। उन्हें फांसी मुजफ्फरपुर बिहार में मिली थी और उनके अंतिम शब्द वंदे मातरम थे। इसी तरह मदन लाल धींगरा का पंजाब में जन्म हुआ और लंदन में फांसी की सजा मिली थी। इसी तरह शाहजहांपुर में जन्मे रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर में फांसी मिली थी। उनके भी आखिरी शब्द वंदे मातरम ही थे। हमारा कहने का उद्देश्य यह है कि वंदे भारत की व्यापकता पर तब कोई प्रश्न नहीं उठा, जब देश बड़े संकट से गुजर रहा था। किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि आगे चलकर हमारा राष्ट्रगीत विवाद में आएगा। यह किसी धर्म के विरोध में नहीं है।'

'कभी ताइवान माता या जापान माता सुना है? सिर्फ भारत को मां का दर्जा'

कुंडा के विधायक ने कहा कि वैदिक काल से हमने अपने राष्ट्र को मां माना है। सभी जगह देशभक्त हैं और वे अपने राष्ट्र के प्रति आस्था रखते हैं, लेकिन हमने कभी जापान माता, ताइवान माता या अमेरिका माता नहीं सुना। ऐसा इसलिए क्योंकि हम प्राचीन काल से भारत माता कहते आए हैं और उस धरती ने हमारा पालन-पोषण भी किया है। एक बात यह समझ नहीं आती कि वंदे मारतम पर आखिर किसे और क्यों आपत्ति है। यह कहा जाता है कि वंदे मातरम को दिल से गाना चाहिए, डंडे से नहीं। आखिर डंडा कौन चला रहा है? राष्ट्रगीत को दिल से गाना चाहिए, इसमें कोई दोराय नहीं है।

'जनता से अपील कि वोट देते समय ध्यान रखे, कौन वंदे मातरम नहीं गाता'

हम जब चुनाव लड़ने जाएंगे तो मतदाताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि कौन वंदे मातरम पर चुप रह जाता है और बैठा रह जाता है। संविधान की बात करने वाले लोग यह समझें कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत का दर्जा संविधान सभा ने ही दिया था। कल को कोई यह देगा कि हम भारत को अपना भाग्य विधाता नहीं मानते हैं और इसलिए राष्ट्रगान को भी हटा दिया जाए।

Surya Prakash

लेखक के बारे में

Surya Prakash
दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। करियर की शुरुआत प्रिंट माध्यम से करते हुए बीते करीब एक दशक से डिजिटल मीडिया में हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क के इंचार्ज हैं। और पढ़ें
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