बिजनौर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग, MBBS के 11 छात्र सस्पेंड; डेढ़ महीने तक दबा रहा मामला
रैगिंग की घटना करीब डेढ़ महीने पहले घटित हुई थी। बिजनौर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शुरुआत में इसे आंतरिक मामला मानकर सुलझाने या दबाने का प्रयास किया, लेकिन पीड़ित छात्र ने हिम्मत दिखाते हुए इसकी शिकायत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज करा दी।

बिजनौर जिले के महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (एमवीएएसएमसी) में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के एक छात्र के साथ रैगिंग का मामला सामने आया है। करीब डेढ़ माह पूर्व हुई घटना को कॉलेज प्रशासन ने करीब डेढ़ माह तक दबाए रखा और आंतरिक मामला मानकर सुलझाने का प्रयास करता रहा। मगर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन तक मामला पहुँचने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने जांच कराई और कड़ी कार्रवाई करते हुए एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के 11 छात्रों को दोषी पाया और उन्हें निलंबन व जुर्माने की सजा सुनाई है।
डेढ़ महीने तक दबाए रखा मामला
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के अनुसार, रैगिंग की घटना करीब डेढ़ महीने पहले घटित हुई थी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शुरुआत में इसे आंतरिक मामला मानकर सुलझाने या दबाने का प्रयास किया, लेकिन पीड़ित छात्र ने हिम्मत दिखाते हुए इसकी शिकायत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज करा दी। एनएमसी के हस्तक्षेप के बाद कॉलेज प्रशासन को अनुशासनात्मक कदम उठाने पड़े।
MBBS के 11 छात्रों पर गिरी गाज
एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच के बाद एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के कुल 11 छात्रों को दोषी माना गया है। इनमें एक छात्र को 10 हजार रुपये जुर्माना व छह सप्ताह का निलंबन, एक को 10 हजार रुपये जुर्माना व चार सप्ताह का निलंबन तथा एक छात्र को पांच हजार रुपये जुर्माना व दो सप्ताह के निलंबन तथा आठ छात्रों को दो सप्ताह के निलंबन की सजा दी गई है। हालांकि नाम न छापने की शर्त पर विद्यार्थियों ने बताया, कि इनमें कुछ छात्र ऐसे भी दोषी मान लिए गए जो रैगिंग में शामिल नहीं थे और इत्तेफाकिया वहां पर मौजूद थे
मानसिक प्रताड़ना से उबर नहीं पाया पीड़ित छात्र
कड़ी कार्रवाई के बावजूद पीड़ित छात्र अब तक इस मानसिक प्रताड़ना के सदमे से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। सूत्रों के मुताबिक छात्र दूसरे प्रदेश का रहने वाला है। रैगिंग की घटना ने उसके मानसिक स्वास्थ्य पर आघात किया है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन का दावा है कि छात्र की कई बार काउंसलिंग की जा चुकी है और वह की गई कार्रवाई से भी संतुष्ट है।
रैगिंग के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डा. तुहिन वशिष्ठ का कहना है कि संस्थान में रैगिंग के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। घटना करीब डेढ़ माह पुरानी है और आंतरिक जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई भी करीब एक माह पूर्व की जा चुकी है। सभी छात्रों के अभिभावकों को भी बुलाया गया था। कॉलेज अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि परिसर के भीतर प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल बना रहे।


