बोले रायबरेली : गांवों मेंे हैं गंदगी के ढेर नहीं हो पा रहा निस्तारण

Mar 12, 2026 04:18 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रायबरेली
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Raebareli News - ग्रामीण इलाकों में लाखों रुपए खर्च कर एमआरएफ सेंटर बनाए गए थे, लेकिन सफाई अभियान फेल हो गया है। ग्राम पंचायतों में कचरे के ढेर लगे हैं और ई-रिक्शा भी प्रभावी नहीं हो रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण गांवों में गंदगी बढ़ रही है, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बोले रायबरेली : गांवों मेंे हैं गंदगी के ढेर नहीं हो पा रहा निस्तारण

ग्रामीण इलाकों में कई ग्राम पंचायतो में लाखों रुपए खर्च करके एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर बनाए गए थे। जिनका उद्देश्य घर-घर से एकत्रित कचरे को लाकर उन्हें छांट कर डिस्पोज किया जाना था। इसके लिए उपकरण लगाए गए थे। कई ग्राम पंचायतो ने कूड़ा एकत्र करने के लिए ई रिक्शा भी खरीदा था। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। यह योजना ग्रामीण इलाके में फेल होती दिख रही है। कोई ऐसा सेंटर नहीं हैं जहां समुचित व्यवस्था और संचालन दुरस्त हो रहा हो। इससे गांवों में कूड़ा निस्तारण नहीं हो पा रहा है जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं ।

इससे स्वच्छता अभियान फेल होता दिख रहा है।कई सेंटर के उपकरण बदहाल हो चुके है। 650 के करीब ग्राम पंचायतो में ई-रिक्शा खरीदे गए हैं। इसके बाद भी वह घरों से कूड़ा उठा न के बराबर ही उठा रहे है। जिले में 980 ग्राम पंचायतें हैं सभी में एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर बनाए गए हैं। इन ग्रामीण इलाकों में करीब 25 लाख आबादी है। ग्राम पंचायतों में कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर नहीं बल्कि रायबरेली संवाददाता। गांवों में सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए कागजों पर खर्च कर दिए जाते हैं। हकीकत में जमीन पर लाख रुपए का भी काम दिखाई नहीं पड़ता है। गांव की सड़कों, मोहल्लों और गलियों में लगे कूड़े के ढेर और उनसे निकलने वाली बदबू ने लोगों का जीना दुश्वार कर रखा है। ग्राम पंचायतों की उदासीनता के कारण लोगों को समस्याओं से निजात नहीं मिल पा रही है। ब्लॉकों और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन जनसमस्याओं के अनभिज्ञ बने हुए हैं। जिले की ऐसी कोई ग्राम पंचायत नहीं है जहां कूड़े के ढेर न लगे हुए हों। इसमें थुलरई, कितूली, कठघर, तेरूखा सहित 18 विकास खण्डों की सभी ग्राम पंचायतों में गंदगी फैली हुई है । नालियों और सड़कों के किनारे कूड़ों के अंबार लगे हैं इससे लोग काफी हैरान और परेशान नजर आ रहे हैं। गंदगी और कूड़े के ढेर लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं। जिम्मेदार कागजों में काम को दर्ज करके खानापूर्ति कर रहे हैं। सिर्फ कागजों पर सफाई हो रही है। हकीकत में सिर्फ अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। लोग शिकायत करते हैं पर उसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। लोग अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं फिर भी अव्यवस्था है। लोगों की इन समस्याओं को लेकर हिन्दुस्तान अखबार ने लोगों से बात की तो उनका दर्द छलक पड़ा। लोगों ने कहा कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों में साफ सफाई का हाल बुरा है। इस मामले में एक भी ग्राम पंचायत आदर्श नहीं है। हाल ये है कि ब्लॉक मुख्यालय जहां है उसके आस पास के गांवों में भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। लोगो ने कहा कि ग्राम पंचायतों में कूड़ा उठाने का अभियान कागजों पर सिमट कर रह गया। हाल ये है कि इन ग्रामीण इलाकों में बहुत से ग्राम पंचायतोंी कंटेनर तक नहीं हैं तो लोग गंदगी कहां फेंके यह बड़ी दिक्कत है। इससे लोग परेशान होते रहते हैं। इसीलिए लोग घरों के और नलियों आदि के पास में जमा कूड़ा जब हवा के झोके के साथ लोगों के घरों में वापस घुसने लगता है, तब भी जिम्मेदारों की आंख नहीं खुलती है। जिले में करोड़ो की लागत से हर ग्राम पंचायतों में कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए गए हैं। कूड़ा ले जाने के लिए ई रिक्शा भी खरीदे गए हैं लेकिन हकीकत में ये ग्राम प्रधान के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं। इनसे कूड़ा नहीं ढोया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में गंदगी ज्यों की त्यों है। लाखों की लागत से गांवों बने कूड़ा निस्तारण केंद्र में कूड़ा नहीं पहुंच रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप जहां देखो वहीं गंदगी फैली नजर आती है।नालियां में जमा हो रहा कूड़ा जनसंख्या के अनुरूप संसाधन का अभावकोढ़ में खाज का काम कर रहा है। वर्तमान में जिले के ग्रामीण क्षेत्र में करीब 20 प्रतिशत ही कंटेनर रखे गए हैं। इनमें से आधे से ज्यादा खस्ताहाल हो गए हैं। सड़कों के किनारे रखे कंटेनर में बहुत ही कम लोग कूड़ा फेंकने जाते हैं। हर ग्राम पंचायतों में कम से कम सौ कंटेनर हों तो शायद व्यवस्था में कुछ बदलाव नजर आए। यही नहीं, कूड़ा निस्तारण केंद्र बनने के बाद भी गांवों में इधर उधर ही कूड़ा फेका जाता है। जिले के सभी ब्लाकों में गंदगी के ढेर लगे हैं। लोगो ने कहा कि यहां पास कूड़ा निस्तारण केंद्र है फिर भी यहां गंदगी के ढेर लगे हुए हैं कूड़ा उठाने के लिए लोग समय से नहीं पहुंचते जब तक आते हैं आधा कूड़ा सड़क या नालियों में उड़ के चला गया होता है। लोग इस कूड़े के चलते आए दिन परेशान होते रहते हैं इसका अभी तक स्थाई निस्तारण नहीं हो पाया है। हालत ये है कि इस गंदगी से बुजुर्गों और बच्चों को बहुत दिक्कत होती है। सांस के बीमारी अक्सर हो जाती है। प्लास्टिक से पैदा हो रहे खतरों के लिए हों जागरूक, नहीं तो बढ़ेंगी मुश्किलें एक तरफ प्लास्टिक से मुक्ति का अभियान चलाया जाता है, दूसरी तरफ प्लास्टिक के उपयोग बढ़ावा दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए कथनी-करनी का यह अंतर समाप्त करना होगा और प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की ठोस योजना बनाकर उस पर अमल की जरूरत है। साथ ही प्लास्टिक का विकल्प तैयार करने के शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए।प्लास्टिक प्रदूषण कितना घातक सिद्ध हो रहा है, अब यह बात छिपी हुई नहीं है। यह जमीन ही नहीं, पानी को भी प्रदूषित कर रहा है। माइक्रोप्लास्टिक के रूप में जो नया खतरा सामने आया है, जिससे सभी चिंतित नजर आ रहे हैं। रक्त, फेफड़े, यकृत, मस्तिष्क ही नहीं गर्भ तक माइक्रोप्लास्टिक पहुंच गया है। जिले में प्लास्टिक कचरा जिस तरह से निकल रहा है इसके निपटने की व्यवस्था नहीं है। प्लास्टिक प्रदूषण जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे खतरा पैदा हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करने और प्लास्टिक कचरे के निस्तारण पर जोर दिया जाना चाहिए। लोग कहते है कि प्लास्टिक से मुक्ति के लिए अभियान चलते रहते हैं, लेकिन इनका खास असर नजर नहीं आता।बिजली कनेक्शन से प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट चले रायबरेली। बिजली कनेक्शन न होने से प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट का संचालन गति से नहीं हो पा रहा है। शिवगढ़ व महराजगंज विकास खंड के दो गांवों में लगा प्लांट महज काम चलाने के लिए जनरेटर से चलाए जा रहे हैं। दोनों प्लांटों में कनेक्शन न होने से इनका उपयोग लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। बिजली विभाग ने दोनों के कनेक्शन के लिए करीब पांच लाख रुपए की डिमांड की है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने निदेशालय से कनेक्शन के लिए पैसा मांगा है। वहीं कनेक्शन न होने से महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन फेज दो के तहत जनपद के सभी ग्राम पंचायतों में कचरा निस्तारण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए दो विकास खंडों शिवगढ के गोविंदपुर में व महराजगंज के मोन गांव में सोलह-सोलह लाख रुपये से प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट लगाया गया। इन प्लांटों में गांव से आन वाले प्लास्टिक का निस्तारण किया जाना है। अभी जनरेटर के माध्यम से इसका संचालन किया जा रहा है। इन गांवों में चल रहे प्लांटों में अभी उस हिसाब से काम नहीं हो रहा है। मोन गांव में अभी तक 500 किलो प्लास्टिक सेल किया गया है।लोग बोलेगांव के कई जगह प्लास्टिक कचरा फैला हुआ है, लोगों को परेशानी हो रही है। इस समय शादी के कारण भी कचरे की समस्या ज्यादा बढ़ रही है। -विनोद विश्वकर्मा कूड़े से खाद बनाने वाला यह प्लांट तो शहर में लगा है कई जगह डंप किए गए कूड़े के चलते उसमें से भारी बदबू निकलती रहती है। जिससे सांस लेना भी हराम हो गया है । -राजा शर्मागांव में सेंटर बेकार साबित हुए, गांव में कूड़ा निस्तारित के लिए कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। -लल्लू कूड़े की बदबू से लोगों के गांव में दिक्कत होती है। निस्तारण के इंतजाम किए जाने चाहिए लोगों राहत मिल सके, जरूरत पड़ने पर हम लोग खुद सफाई करते हैं। -रामविलास बोले जिम्मेदारजिले में 980 ग्राम पंचायत हैं सभी में अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में कूड़ा ले जाने के लिए करीब 650 पंचायतों में ई रिक्शा आदि खरीदे गए हैं। 16-16 लाख की कीमत से दो प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर बनाए गए हैं। सौम्यशील सिंह, डीपीआरओप्रस्तुति- दुर्गेश मिश्र,प्रेम नारायण, पवन तिवारी

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