छह माह में मात्र 20% काम, बदहाली का शिकार लालगंज बस अड्डा
Raebareli News - लालगंज के जर्जर बस स्टेशन के जीर्णोद्धार का कार्य छह महीने से चल रहा है, लेकिन केवल 20 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। अधिकारी शीघ्र संचालन का दावा कर रहे हैं, जबकि स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा। स्थानीय लोग बिना सुरक्षा और सुविधाओं के बस संचालन को लेकर चिंतित हैं।

लालगंज संवाददाता। कस्बे के जर्जर बस स्टेशन के जीर्णोद्धार का दावा परिवहन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करीब छह माह से चल रहे मरम्मत और निर्माण कार्य के बावजूद अब तक महज 20 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। हालात ऐसे हैं कि “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” वाली कहावत यहां पूरी तरह चरितार्थ होती दिख रही है, जबकि विभागीय अधिकारी लगातार शीघ्र बस संचालन शुरू होने के दावे कर रहे हैं। लालगंज में जर्जर अवस्था के चलते करीब 20 साल से बंद पड़ा है। परिवहन अधिकारियों ने कई बार इसे संचालन का वादा भी किया, लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात ही रहा।
सालभर पहले सरकार ने इसे फिर से चालू करने का आदेश दिया। इसके बाद परिवहन निगम ने छह महीने पहले बस अड्डे की मरम्मत का काम शुरू करवाया। अधिकारियों के अनुसार पिछले छह महीने में बस अड्डे का जीर्णोद्धार कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बस स्टेशन के नाम पर केवल भवन का ऊपरी रंग-रोगन कर औपचारिकता निभा दी गई है, जबकि बाउंड्री वॉल, शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। पूरा परिसर जीर्ण-शीर्ण हालत में पड़ा है और कई स्थानों पर इसे निर्माण सामग्री रखने का ठिकाना बना दिया गया है।स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है, जब सुबह-शाम बस स्टेशन परिसर असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है। ऐसे माहौल में यात्रियों की सुरक्षा और बस संचालन को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के बस संचालन शुरू करना यात्रियों की परेशानी बढ़ा सकता है। मरम्मत कार्य शुरू होने पर लोगों को उम्मीद थी कि प्रयागराज, प्रतापगढ़ और कानपुर के लिए बसें फिर से यहीं से संचालित होंगी और रात में बसों का ठहराव भी परिसर में होगा, जिससे यात्रियों को सड़क किनारे इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लेकिन छह माह बीतने के बाद भी ये उम्मीदें अधूरी हैं।
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