डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा एम्स : प्रमोद
Raebareli News - रायबरेली के दरियापुर में 12 वर्ष पूर्व स्थापित एम्स को पूरी क्षमता से संचालित न करने पर राज्यसभा में प्रमोद तिवारी ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बेड, डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी है, जिससे चिकित्सा सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

रायबरेली, संवाददाता। जनपद के दरियापुर में बने एम्स को बारह वर्ष बाद भी पूर्ण क्षमता के साथ संचालित न कराए जाने को लेकर सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की मौजूदगी में सरकार की घेराबंदी की है। राज्यसभा में सांसद प्रमोद तिवारी ने सरकार से कहा कि पिछले बारह वर्ष पूर्व रायबरेली में एम्स की स्थापना की गयी थी। एम्स की स्थापना का उददेश्य रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर एवं प्रतापगढ़ सहित उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तथा मध्यांचल के लगभग चालीस जनपदों के साथ बिहार एवं मध्य प्रदेश के भी कई हिस्सों की बड़ी आबादी के लिए जीवन रक्षक एवं उन्नत चिकित्सा सेवाओं के साथ जनता को अत्याधुनिक एवं बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराना रहा है।
प्रारम्भ में एम्स के लिए नौ सौ साठ बेड के बड़े अस्पताल की परिकल्पना की गयी थी। वर्तमान में मात्र छह सौ दस बेड तक ही सीमित है। डाक्टरों विशेषकर सीनियर रेजीडेंट डाक्टर की भारी कमी है। स्वीकृत लगभग दो सौ एसआरओ के पदों के विरूद्ध वर्तमान में केवल सैंतीस एसआरओ कार्यरत हैं। यह चिन्ताजनक है कि अस्पताल में अभी भी चौहत्तर प्रतिशत तक पद रिक्त पड़े हैं। यह अत्यन्त गंभीर स्थिति है कि इस संस्थान में प्रोफेसर के कुल तैंतीस पदों के विरूद्ध मौजूदा समय में मात्र सात नियुक्तियां की गयी हैं। एडिशनल प्रोफेसर के स्वीकृत छब्बीस पदों में से केवल पांच पदों पर ही नियुक्ति हो सकी है। संस्थान में फैकल्टी के दो सौ एक स्वीकृत पदों के विरूद्ध 85 पद रिक्त हैं। सोलह सौ छब्बीस मेडिकल एवं नॉन मेडिकल स्टाफ के स्वीकृत पद के विपरीत अभी भी चार सौ पचास से अधिक पद रिक्त हैं। उन्होंने सरकार पर करारा तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ गांधी परिवार से ईष्र्या एवं द्वेष के कारण जनपद में बनने वाला।
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