
शौचालय की दुर्गंध से फरियादी परेशान, यूरिनल के उपकरण लापता
Raebareli News - सदर तहसील के सुंदर भवन में एसडीएम और तहसीलदार के कार्यालय हैं, लेकिन पुरुष शौचालय की गंदगी अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाती है। शौचालय की दीवारें पान की पीकों से भरी हैं और गंदगी फैली हुई है, जिससे बदबू पूरे वातावरण को प्रभावित कर रही है। आगंतुकों को भी इस दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है।
अमावां संवाददाता। सदर तहसील का खूबसूरत सा भवन जहां एसडीएम सदर व तहसीलदार सदर के कार्यालय से जुड़े बरामदे तहसील भवन की भव्यता बयान करते हैं। तहसील स्तरीय दोनों ही अधिकारियों के बरामदों की फर्श पर वोटर दिवस व गणतंत्र दिवस पर बनाई गई खूबसूरत रंगोली भवन की खूबसूरती में चार चांद लगाती है। लेकिन एसडीएम सदर कार्यालय के बरामदे से जुड़ा पुरुष शौचालय अधिकारियों की लापरवाही भी चीख-चीख कर बयान करता है। शौचालय में फैली गंदगी टूटा प्लास्टर टाइल्स और दरवाजे की टूटी सिटकनी किसी पिछड़े गांव के शौचालय के समान ही है। जिसे एक बार बनाकर छोड़ दिया गया और पलट कर देखना कोई नहीं आया।
जनपद की सदर तहसील भवन की जिसे मुख्य द्वार से देखते ही तबीयत खुश होती है। यहां तहसील दिवस के अलावा भी आए दिन जिला स्तरीय अधिकारियों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा सभी कार्यालयों में तहसील क्षेत्र के हजारों लोगों की आवाजाही बनी रहती है। अब बात करते हैं एसडीएम कार्यालय के बरामदे से सटे पुरुष शौचालय की। जिसके अंदर प्रवेश करते ही उल्टी सी आने लगती है। शौचालय की दीवारें पान की पीकों से रंगी पड़ी है। यहां लगे यूरिनल जिनके आधे उपकरण गायब है। बेसिन व शौचालय में फैली गंदगी तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की पोल खोल रही है। दरवाजे की टूटी सिटकनी दीवार से गिरी टाइल्स और शौचालय में फैली गंदगी के चलते लोग शौचालय में घुसने से भी परहेज करते हैं। जिसका नतीजा तहसील भवन के पूर्वी हिस्से से पेशाब से उठने वाली दुर्गंध पूरी तहसील का वातावरण बदबूदार बनाए रखती है लेकिन अपने घर से कार्यालय तक का सफर करने वाले इन अधिकारियों को ना शौचालय की मरम्मत या स्वच्छता की सुधि आती है और ना ही लंबे समय से आदत में आ चुकी पेशाब की दुर्गंध ही इन तहसील कर्मचारियों को अजीब लगती है। कभी कभार तहसील आने वाले आगंतुक को दुर्गंध तहसील भवन के बरामदे में पहुंचते ही महसूस हो जाती है। अपने मुकदमे की सुनवाई में आए महेश कुमार संतोष कुमार शिवचरण हरिश्चंद्र आदि फरियादियों का कहना है नाक पर कपड़ा बांधकर शौचालय में गए थे तब भी उल्टी आने लगी थी। भवन के पूरब के हिस्से से उठने वाली दुर्गंध बरामदे तक में वातावरण को बदबूदार बना देती है। हम लोगों का क्या है तारीख पर आए हैं।

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