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बोले रायबरेली/सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों और बंदरों से सुरक्षा के नहीं हो रहे इंतजाम, लोग परेशान

बोले रायबरेली/सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों और बंदरों से सुरक्षा के नहीं हो रहे इंतजाम, लोग परेशान

संक्षेप:

Raebareli News - जिले के आवासीय क्षेत्रों, धर्मस्थलों और स्कूलों के पास बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। श्रद्धालुओं को प्रसाद के लिए मंदिरों में अक्सर बंदरों के हमलों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

Jan 10, 2026 07:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रायबरेली
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आवासीय क्षेत्रों, धर्मस्थलों और स्कूल कॉलेज के पास बंदरों का जमावड़ा लोगों के लिए बेहद परेशानी का सबब है। इसके साथ ही गली-गली में डेरा बनाए आवारा कुत्तों ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है। इन दोनों समस्याओं को हम बोले के तहत पहले भी उठा चुके हैं लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई ऐसी नहीं हुई है जिससे समस्या का स्थायी समाधान हो सके। आवारा कुत्तों और बंदरों की संख्या बढ़ते जाने से लोगों को कई परेशानियां परेशानी हो रही हैं। कई आवासीय क्षेत्रों, धर्मस्थलों और स्कूल कॉलेज के पास बंदरों का जमावड़ा लोगों के लिए बेहद परेशानी का सबब है।

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इस समस्या पर पहले भी हमने अपनी कवरेज के जरिए प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रयास किया है। इसके बावजूद अभी इस दिशा में कोई विशेष कार्य नहीं किए गए हैं। बंदरों और कुत्तों की बढ़ती संख्या के कारण लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।जिले के कई प्रमुख मंदिरों के आसपास बंदर भी खूब रहते हैं। ये अक्सर श्रद्धालुओं के पास रहने वाला प्रसाद बंदरों के हमले की मुख्य वजह होती है। इससे बचने के लिए मंदिर और जिला प्रशासन ने कोई खास व्यवस्था नहीं की है। जिले में गंगा घाट के किनारे सभी प्रमुख मंदिरों में हजारों भक्तों का हुजूम उमड़ता है। बछरावां क्षेत्र के शिव भवरेश्वर मंदिर में अक्सर कई मंदिर में भक्तों पर बंदर हमला देते हैं ।जिससे दिक्कत हो जाती है। जिले में प्रमुख मंदिरों में भीड़ को नियंत्रित करने के कोई खास इंतजाम नहीं हैं। कुछ मंदिरों को छोड़ दें तो बाकी में बंदर नहीं हैं। जिले प्रमुख भवरेश्वर,बाल्हेश्वर, सोहलेश्वर आदि शिव मंदिर में सर्वाधिक भीड़ होती है। ऐसे में आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार ने भवरेश्वर मंदिर के निकट लोगों से बात की तो उन्होंने खुल कर अपनी बात रखी। लोगों ने कहा कि भवरेश्वर मंदिर में अक्सर श्रद्धालुओं के पास रहने वाला प्रसाद बंदरों के हमले की मुख्य वजह होती है। इससे बचने के लिए मंदिर और जिला प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की है। लोगों ने बताया कि बछरावां क्षेत्र में स्थित पौराणिक भवरेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास बेहद रोचक है। लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की त्रिसीमा पर सई नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। शिवरात्रि और सावन के महीने में यहां लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहां हजारों की संख्या में बंदर मौजूद रहते हैं। यहां बंदरों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। सावन में लोगों को और भी दिक्कत होती है। लोग बताते हैं को इससे बचने के लिए पुजारी डंडे के साथ खड़े रहते हैं। भक्तों की परेशानी चरम पर पहुंच गई है। बंदर न केवल उनके प्रसाद को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि उनको घायल भी कर देते हैं। इससे भक्तों में दहशत का माहौल बना रहता है। भक्तों ने बताया कि यह अक्सर उनके पास से प्रसाद और खाने आदि का सामान छीनकर भाग जाते हैं । बंदरों के झुंड से बचना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय स्तर पर उनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। इससे के साथ जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग की है। जिले में इन दिनों की सबसे बड़ी समस्या बंदर बन गई है। यहां हर समय बंदरों का झुंड इन मंदिरों के आसपास घूमता रहता है। बंदर कभी मंदिर के अंदर तक घुसकर उत्पात मचा देते हैं तो कही मंदिर परिसर के बाहर खड़ी किसी की कार में तोड़फोड़ करते हैं। यही नहीं यहां तक कि यह दुकानों से भी प्रसाद लेकर निकल जाते हैं। भक्तों ने बताया कि किसी भी मंदिर में भक्तों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं। इससे लोगों को दिक्कत होती है। लोगों ने बताया कि जब भक्त कम आते हैं तो उनपर यह बंदर अधिक हमलावर होते हैं। जबकि जब संख्या अधिक होती है तो उनको इससे राहत मिल जाती है। यह भक्तों के समूह से दूर किनारे हो जाते हैं। सभी ने कहा कि इससे बचने के लिए इंतजाम किए जाने चाहिए। कई मंदिरों में सावन और नवरात्रि में स्थानीय पुलिस रहती है। लोगों ने कहा कि जिले के सभी मंदिरों में करीब दस हजार से अधिक बंदर रहते है। इन मंदिरों में आने वाले भक्तों को इन बंदरों से विशेष डर नहीं लगता है। लोगों ने बताया कि बच्चों और महिलाओं को कुछ दिक्कत होती है। बंदरों या आवारा कुत्तों के हमले के बाद पीड़ित व्यक्ति के इलाज के लिए मंदिर परिसर में कोई इंतजाम नहीं रहते हैं। जिले में कई क्षेत्रों में बंदरों से लोग परेशान हैं इसके लोग परेशान होते रहते हैं। जब भी कोई जा कर देख ले जिला अस्पताल में रोजाना दो से चार केस बंदर काटने के आ रहे हैं। लोगों ने बताया कि जिले के प्रमुख मंदिरों सहित सभी कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों का आतंक लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बंदरों का झुंड हर समय इन मंदिरों पर घाट पर घूमते रहते है। यहां तक कि मोटर सायकिलों और कारों में तोड़फोड़ करते हैं इसके साथ ही आसपास के घरों में घुसकर उत्पात मचाना और पौधों को नुकसान पहुंचाना आम बात हो गई है। स्थानीय लोग कई बार वन विभाग और नगर पंचायत के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसमें किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है और घरों में दहशत व्याप्त है। दहशत इतनी है कि कहीं कोई शादी या अन्य कोई समारोह हो चार आदमी अलग से लगाने पड़ते हैं कि कहीं बंदरों का झुंड न आ जाए। बंदरों और कुत्तों का आतंक निरंतर बढ़ने से लोग परेशान हैं। वन विभाग और नगर पालिका प्रशासन से बार-बार लोग बंदरों से छुटकारा दिलाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। लोगों ने कहा कि डलमऊ कस्बे में गंगा घाट के किनारे बने शिवमन्दिर में सावन में अच्छी खासी भीड़ रहती है। लोग यहां आते हैं और मां गंगा में स्नान करके भगवान शिव के मंदिर में जल अर्पित करते हैं। यहां कई मंदिर हैं इन मंदिरों में निरंतर बंदरों की बढ़ रही है। इसके कारण लोग परेशान होते रहते हैं। इससे अब लोग यहां आने से गुरेज करने लगे हैं। डलमऊ में मां गंगा के घाटों के पास बने इन मंदिरों में लोगों को असुविधा होने लगी है। इस ओर स्थानीय प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। शिकायतें और सुझाव शिकायतें -कुत्तों और बंदरों को पकड़ने के लिए जिला स्तर पर कोई टीम गठित नहीं है। -कुत्तों और बंदरों के काटे जाने की घटनाएं आए दिन आम हो रही हैं। -बंदरों को पकड़कर रखने के लिए कोई मंकी होम नहीं है। -लगातार बंदरों और कुत्तों की तादात बढ़ रही है इन पर कोई अंकुश नहीं है। -मंदिरों, घाटों आदि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों और बंदरों के झुंड बैठे रहते हैं। सुझाव -बंदरों और कुत्तों को पकड़ने के लिए जिला स्तर पर टीमें गठित की जानी चाहिए। -सड़कों पर कुत्तों और बंदरों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के इंतजाम किए जाएं। -बंदरों के लिए मंकी होम की व्यवस्था हो जिससे इनको वहां छोड़ा जा सके। -लगातार कुत्तों की तादात बढ़ रही है इन पर अंकुश लगाने के इंतजाम किए जाएं। -सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों और बंदरों के झुंड इकट्ठा न होने पाएं, इसकी व्यवस्था की जाए। नंबर गेम 10 हजार से अधिक बंदर जिले के मंदिरों और सार्वजनिक स्थल और कस्बों में हैं। 50 हजार से अधिक कुत्ते जिले में हैं। 02 हजार से अधिक बंदर बछरावां क्षेत्र के भवरेश्वर मंदिर के पास हैं। 01 हजार से अधिक डलमऊ स्थित गंगा घाट पर स्थित शिव मंदिरों में बंदर हैं। 100 से अधिक हर माह पूरे जिले में कुत्ते और बंदर काटने के मामले आते हैं। बोले अधिकारी आवारा कुत्तों के संरक्षण के लिए नगर पालिका प्रशासन व्यवस्था कराएगा उनमें टीके आदि की व्यवस्था विभाग करेगा। अभी बंदरों के संरक्षण लिए अभी कोई योजना नहीं है। यदि कोई व्यवस्था होती है तो लागू करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। अन्य जो भी आवारा गोवंश हैं। उनको पकड़ कर नजदीकी गौशाला में भिजवाया जा रहा है। जो भी विभागीय स्तर से सुविधाएं हैं वह लोगों को दी जा रहीं हैं। केके द्विवेदी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी इनकी भी सुनें मंदिर व उसके आसपास हजारों की संख्या में बंदरों का झुंड रहता है वह यहां पर आने वाले भक्तों से मौका पाते ही प्रसाद व अन्य सामान छीन कर भाग जाते हैं। जिससे लोगों को दिक्कत होती है। इन बंदरों के लिए कोई व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे मंदिर परिसर से इन्हें दूर रखा जा सके। नदीम भवरेश्वर जिले का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यहां पर वह सुविधा नहीं है जो होनी चाहिए। यदि इसे पर्यटक स्थल के रूप में उत्तर प्रदेश की सरकार घोषित कर दे तो निश्चित रूप से इसका और क्षेत्र का और विकास हो सकता है। इस ओर स्थानीय प्रशासन को भी ध्यान देना चाहिए। खुशहाल वर्मा मंदिर की ऐतिहासिकता को देखते हुए क्षेत्र में इसे विकसित कराया जाना चाहिए। बेहतर रूप से विकसित होने से यहां का व्यापार भी बढ़ेगा, इससे श्रद्धालुओं की सुविधा तो बढेगी ही। व्यापार कारोबार को भी काफी फायदा मिलेगा। शैलेन्द्र कुमार भवरेश्वर मंदिर का पौराणिक महत्व है। श्रद्धालुओं को कार्यक्रम के लिए परिसर में अलग स्थान बनाए जाने की जरूरत है। इससे श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। इससे सभी को काफी फायदा मिलेगा। कारोबार को भी बढावा मिलेगा। दिनेश कुमार जिले के प्रमुख मंदिर हो कस्बा या गांव अब बंदरों के आतंक से सब लोग परेशान हो गए हैं। आए दिन यह घरों में घुस जाते हैं और टीन शेड और घर का सामान बिखेर कर सब्जियां आदि उठा ले जाते हैं और खाते पीते रहते हैं। रोकने पर काटने दौड़ते हैं बच्चों को खासकर बहुत दिक्कत होती है। सुहैल आवारा कुत्तों के झुंड अक्सर बाजार में खड़े रहते हैं। ग्राहक डरते हैं और बिक्री भी प्रभावित होती है। कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बाजार में सुरक्षा के लिए कुछ करना ज़रूरी है। इस पर ध्यान दिया जाए। संकल्प वर्मा किसी प्रमुख मंदिर आने-जाने में अब डर लगता है। यहां के प्रमुख मंदिरों में हर जगह कुत्ते और बंदर नजर आते हैं। कई बार मंदिर जाते समय टक्कर हो चुकी है। इनकी की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सुबह में मंदिर हो या सड़क यहां जमावड़ा लग जाता है। अभिषेक अवस्थी सड़कों पर बंदर और कुत्तों के झुंड में घूमते रहते हैं ।कभी भी सामने आ जाते हैं। कई बार जान बचाने के चक्कर में गाड़ी फिसल जाती है। यह अब आम परेशानी बन गई है, लेकिन प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा। हर तिराहे में शाम को स्थिति खराब हो जाती है। आशीष बंदर और कुत्तों के झुंड सबकी समस्या बने हुए हैं । इसमें महिला बच्चे सहित हर तबके के लोग शामिल हैं। कोई भी इनके आतंक से अछूता नहीं है। सबसे अधिक दिक्कत होती है जब यह घरों में तोड़फोड़ मचा देते हैं। समान खराब कर देते हैं। इनको लेकर प्रशासन को कोई ठोस व्यवस्था बनानी चाहिए। शिवम अवस्थी मंदिरों के पास यह झुंड में दुकानों के पास में पहुंच रहे हैं और दुकान का सामान बर्बाद कर दे रहे हैं। इन के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। किसी प्रकार ये लोग दुकान की रखवाली करते है। इससे दिक्कत होती है। लोग परेशान होते हैं। विनय सोनी इनके कारण ठीक से लोगों की दुकानदारी नहीं हो पा रही है। हर दुकान दार इस समस्या से परेशान हो रहा है। इससे बचने के लिए जरूरी इंतजाम होने चाहिए। इस पर सभी को ध्यान देने की आवश्यकता है। इससे सभी को राहत मिलेगी। वरुण कुमार वर्तमान समय में आवारा पशुओं की समस्या एक प्रमुख समस्या हो गई है। इसकी वजह से से कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिनमें समान नष्ट होना, दुकानदारों और ग्राहकों पर हमले और पशुओं की बीमारी भी शामिल है। भभूति इनमें अक्सर बीमारियाँ फैल रही हैं, जिससे वे कमजोर हो रहे हैं और इस से उनकी मृत्यु भी हो सकती है। इनकी संख्या बढ़ने से पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि वे अधिक संसाधनों का उपयोग करते हैं और गंदगी फैलाते हैं। सरदार बंदर बहुत ही प्यारे होते हैं यह किसी को बिना मतलब नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। लोग इनके स्थानों को समाप्त कर रहे हैं। तनाव और संघर्ष भी बढ़ रहा है। इनके लिए प्रशासन रहने के इंतजाम करने चाहिए । जिससे सभी को राहत मिल सके। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। श्याम साधू कम हो रहे वनों के कारण बढ़ रहे हैं बंदर रायबरेली संवाददाता। आमतौर पर जंगलों में रहकर अपना भोजन तलाश करने वाले बंदरों के प्राकृतिक आवास लगातार तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण और औद्योगिकीकरण से घटते जा रहे हैं। इससे बंदर इंसानी आबादी की ओर आ गए हैं। वनों में उगने वाले पौधों के फलों की बजाय बंदर भी वही भोजन कर रहे हैं, जिसे इंसान ग्रहण कर रहा है। खाद्य पदार्थों के कारण भी बंदरों के व्यवहार में बदलाव आ गया है। इसके लिए जरूरी है कि मनुष्य और बंदरों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के प्रयासों पर चर्चा होनी चाहिए। हालात यह हो गए हैं कि मादा बंदर जल्द गर्भधारण कर रही हैं। बंदर अधिक हिंसक हो गए हैं। जहां तक संभव हो सके जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास पर दखलंदाजी करने से बचना पड़ेगा। पशु प्रेमी श्याम साधू का मानना है कि किसानों को बंदरों की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए इस समस्या का कारगर तरीका नसबंदी है। वन विभाग बंदरों को पकड़ने के लिए स्थानीय लोगों को भी प्रशिक्षित करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि बंदर यदि खाने की वस्तु छीनने के लिए आप पर झपटे तो उससे मुकाबला न करें बल्कि उस वस्तु को दूर फेंक दें। विशेषज्ञों का मानना है कि जब जानवरों का इंसानों से डर खत्म हो जाता है और वे उपद्रवी बन जाते हैं, तो वे इसके आदी हो जाते हैं। मौका मिलते ही बंदर उठा ले जाते हैं घर का सामान बंदरों से लोग हैं परेशान ऊंचाहार । क्षेत्र में दर्जनों गांवों के लोग बंदरों से परेशान हैं। लोगों के घरों से मौका पाते ही सामान उठा ले जाते हैं। यहां तक कि घर की महिलाए खाना तभी बनाती है। जब घर के एक सदस्य डंडा लेकर पहरेदारी करता है। आए दिन लोग बंदरों के काटने से घायल भी हो जाते हैं। बंदरों व कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रखने के आदेश यहां पर बेअसर साबित हो रहा है। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते आदेश परवान नहीं चढ़ रहा है। जिससे आमजन मानस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के हजारों लोग बंदरों के आतंक से परेशान हैं। लेकिन कोई ठोस कदम न उठाएं जाने के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र के मिर्जापुर एहारी, छिपीया, लक्ष्मी गंज, रामचन्द्रपुर, कमोली, किशुन दास पुर, ऊंचाहार कोटरा बहादुर गंज, शहजादपुर, कोटिया चित्रा समेत दर्जनों गांवों ये झुंड के झुंड निकलते हैं। और ग्रामीणों घरों की पहरेदारी करनी पड़ती है। तब घर का भोजन बन पाता है। यहीं नहीं घर में छोटे बच्चों को भी मौका पाते ही उठा ले जाते हैं। जिससे ज्यादातर ग्रामीणों को खेत से लेकर घर तक की पहरेदारी करनी पड़ती है। क्षेत्र के इन मंदिरों पर रहता है। इनका जमवाड़ा क्षेत्र के प्रसिद्ध भोलेनाथ का मिर्जापुर एहारी स्थिति बूढ़े बाबा मंदिर, रामचन्द्रपुर के रेलवे क्रॉसिंग के पास हनुमानजी का मन्दिर, कोटरा बहादुर गंज के जमादार बाबा समेत करीब एक दर्जन से अधिक मन्दिरों पर इनका जमवाड़ा रहता है। भक्तों के मन्दिर के पास पहुंचते ही ये सचेत हो जाते हैं अगर इनके खाने के लिए कुछ सामग्री नहीं लिया है। तो मौका मिलते ही प्रसाद को झपट्टा मार कर छुड़ा लेते हैं और पेड़ो पर चढ़कर बड़े आराम से खाते हैं और अन्य सामग्री फेक देते हैं।