
पूजा पाल ने सपा के PDA के खिलाफ भाजपा की मुहिम को दे दी नई धार, अब भगवा खेमा उठाने की तैयारी में
कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल के कदम ने समाजवादी पार्टी के PDA के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी की मुहिम को नई धार दे दी है। इसका लाभ अब भगवा खेमा उठाने की तैयारी में है।
यूपी में कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल अचानक सोशल मीडिया पर छा गई हैं। पूजा द्वारा विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ और फिर सपा से उनके निष्कासन ने एक नई बहस छेड़ दी है। पूजा पाल के कदम ने समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ के खिलाफ भाजपा की मुहिम को नई धार दे दी है। सूबे में पाल-बघेल समाज की पिछड़ों में अच्छी भागीदारी है। विधायक राजू पाल की हत्या के बाद सहानुभूति की जो लहर पूजा के साथ बसपा से सपा की ओर शिफ्ट हुई थी, उसका लाभ अब भगवा खेमा उठाने की तैयारी में है।
यूं तो पूजा पाल ने माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में हुई हत्या के बाद भी योगी सरकार की तारीफ की थी। यही नहीं राज्यसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी लाइन से इतर भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया था। इस मामले में सपा ने राकेश प्रताप, अभय सिंह और मनोज पांडे को तो बाहर का रास्ता दिखा दिया था, मगर पूजा पाल पर कार्रवाई से परहेज किया था। मगर सदन में पूजा पाल के कदम ने सपा को बेहद असहज कर दिया। पूजा ने खुद को न्याय दिलाने और माफिया को मिट्टी में मिलाने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध और भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर जिस तरह ऐलानिया मुहर लगाई, वो सपा को नागवार गुजरी।
सपा से बर्खास्तगी के बाद पूजा की मुख्यमंत्री से मुलाकात और मीडिया से बातचीत में उनके तीखे तेवर, विपक्ष को असहज कर सकते हैं। जानकारों की मानें तो माफिया अतीक व अशरफ की हत्या चूंकि पुलिस कस्टडी में हुई थी तो भाजपा इसका सीधा राजनैतिक श्रेय लेने से बचती रही है। ऐसे में पूजा पाल के रूप में भाजपा को एक ब्रांड एंबेसडर व पीडीए की काट का हथियार मिल गया है।
बृजभूषण के बोल से सपा को राहत
दूसरी ओर सपा कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयान से कुछ राहत महसूस कर रही है। बृजभूषण ने पूजा पाल पर सपा द्वारा की गई इस कार्रवाई को सही ठहराया है। वे पूजा के इस कदम को पार्टी लाइन से इतर जाने और अनुशासनहीनता की श्रेणी में बता रहे हैं। हालांकि भाजपा और सपा के पूजा पाल को लेकर किए जाने वाले सियासी प्रयोगों का नतीजा तो 2027 में ही दिखेगा।





