जनता का केस बंद, नेताजी फंसे रहे गए; जनप्रतिनिधियों पर कोरोना काल के मुकदमे वापस लेने की मांग

Feb 13, 2026 03:03 pm ISTsandeep लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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यूपी विधानसभा में सपा विधायक फहीम इरफान ने कोरोना काल के मुकदमों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जनता के केस वापस हो गए, लेकिन जनप्रतिनिधि अब भी फंसे हैं। स्पीकर सतीश महाना ने सरकार को आदेश की समीक्षा कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

जनता का केस बंद, नेताजी फंसे रहे गए; जनप्रतिनिधियों पर कोरोना काल के मुकदमे वापस लेने की मांग

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कोविड-19 महामारी के समय दर्ज मुकदमों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक फहीम इरफान ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोरोना काल में आम नागरिकों पर दर्ज कई मामलों को सरकार ने वापस ले लिया था, लेकिन जनप्रतिनिधियों पर दर्ज मुकदमों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विषय में स्पष्ट नीति बनाई जाए ताकि जनप्रतिनिधियों को भी समान रूप से राहत मिल सके।

कोविडकाल के केस वापस हों- सपा विधायक

फहीम इरफान ने कहा कि कोविड-19 के दौरान लागू प्रतिबंधों और नियमों के उल्लंघन के आरोप में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। बाद में सरकार ने परिस्थितियों को देखते हुए आम लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने का फैसला किया था। लेकिन जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों को लेकर स्थिति अभी भी अस्पष्ट है, जिससे असमानता की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करे और समानता के आधार पर निर्णय ले।

स्पीकर ने सरकार को समीक्षा का निर्देश दिया

इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी संज्ञान लिया और सरकार को मामले की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि पहले जारी आदेशों में जनप्रतिनिधि किसी कारणवश शामिल नहीं हो पाए हैं या छूट गए हैं, तो उस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार को पूरे मामले का परीक्षण कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि न्यायसंगत समाधान निकल सके।

अध्यक्ष के निर्देशों के बाद सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि कोविड काल में दर्ज मुकदमों की स्थिति की जांच कराई जाएगी और यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन मामलों को वापस लिया गया है और किन्हें नहीं। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में क्या नीति अपनाई जा सकती है। इस मुद्दे के उठने के बाद सदन में चर्चा का माहौल बना रहा और उम्मीद जताई गई कि सरकार जल्द ही इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लेकर स्थिति को साफ करेगी।

आपको बता दें हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 25 जनप्रतिनिधियों पर कोरोना गाइडलाइंस उल्लंघन के तहत दर्ज मुकदमे वापस लेने की अनुमति दे दी थी। कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य सरकार अब संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकेगी। बताया जा रहा है कि ये मुकदमे कोरोना महामारी के दौरान जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से जुड़े हुए थे।

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