जब सुकरात को जहर दिया गया, अल्पमत में थे...
Prayagraj News - युवा सृजन संवाद ने लाउदर रोड स्थित तुल्सियानी एन्क्लेव में एक घर-गोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कवि प्रो. सदानंद साही ने अपने कविता संग्रह संगतराश की कविताएँ प्रस्तुत की। डॉ. जनार्दन और अन्य विद्वानों ने कविता पर विचार साझा किए, जिसमें कबीर और रैदास का प्रभाव स्पष्ट था।
युवा सृजन संवाद की ओर से रविवार को लाउदर रोड स्थित तुल्सियानी एन्क्लेव में घर-गोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर कवि, आलोचक व संपादक प्रो. सदानंद साही ने अपने कविता संग्रह संगतराश की चुनिंदा कविताओं का पाठ किया। कविता अल्पमत को प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब बुद्ध ने राजपाट छोड़ा, अल्पमत में थे। जब सुकरात को जहर दिया गया अल्पमत में थे। जब काशी छोड़नी पड़ी कबीर को ज़रूर रहे होंगे अल्पमत में...। कवि के पास क्या होता है में कहा कि फकत कुछ शब्द और सच को। सलीके से कहने का साहस.. बस इतने से हिल जाते हैं झूठ के गढ़ और गढ़पति...।
कविता पर विचार व्यक्त करते हुए डॉ. जनार्दन ने कहा कि शाही की कविता में कबीर और रैदास की मौजूदगी काव्य संवेदना का स्पष्ट करती है। उनकी कविता हाशिये के समाज के साथ खड़ी है। संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि सदानंद शाही की कविताओं में बुद्ध, कबीर, रैदास और गांधी का गहरा प्रभाव है। उनकी कविताओं का स्वर सहज और संप्रेषणीय हैं। अशरफ अली बेग और संजय पाण्डेय ने विचार व्यक्त किए। संचालन रिया त्रिपाठी ने किया। प्रो. जान्हवी सिंह, सत्यमोहन, डॉ. ब्रजेश कुमार, आरती चिराग, श्वेता सृष्टि, दिव्या, जगदीश, धर्मवीर, सोम,जया, खुशबू, अमृता, गौरी मौजूद रहीं।

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